Kamakhya Devi Temple: कामाख्या देवी मंदिर के इन रहस्‍यों को जानकर खुली की खुली रह जाएंगी आपकी आंखें…आईए जाने कैसे पहुंचें कामाख्या मंदिर?

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डेली संवाद, गुवाहाटी। Kamakhya Devi Temple: अगर आप रहस्य, आस्था और तंत्र-मंत्र से जुड़ी जगहों में दिलचस्पी रखते हैं, तो आपको असम का कामाख्या देवी ( Kamakhya Devi) मंदिर जरूर जाना चाहिए। दरअसल, असम में गुवाहाटी शहर के पश्चिमी भाग में नीलाचल पहाड़ी पर स्थित मां कामाख्या टेंपल एक विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां हर रोज लगभग लाखों भक्त देवी कामाख्या के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं।

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मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं। यहां देवी के किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि एक कुंड की पूजा होती है। इस मंदिर से कई रहस्यमयी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें से एक यह है कि यहां देवी के रजस्वला होने पर ब्रह्मपुत्र नदी का पानी तीन दिन के लिए लाल हो जाता है। आइए जानते हैं शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में।

कामाख्या मंदिर का महत्व

कामाख्या मंदिर (Kamakhya Devi) सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह तंत्र-मंत्र और सिद्धियों की साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, यहां माता सती का योनि भाग गिरा था। यही कारण है कि यहां शक्ति की उपासना होती है और देवी के इस रूप को महिलाओं की शक्ति और सृजन क्षमता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में तांत्रिक अपनी सिद्धियों को सिद्ध करने के लिए आते हैं।

कैसे बना कामाख्या मंदिर?

पौराणिक कथा के अनुसार, माता सती अपने पिता दक्ष के यज्ञ में बिना बुलाए पहुंच गई थीं। जब उन्होंने देखा कि उनके पति भगवान शिव का अपमान हो रहा है, तो उन्होंने खुद को यज्ञ की अग्नि में समर्पित कर दिया। इससे दुखी होकर भगवान शिव ने उनका जलता हुआ शरीर उठाया और तांडव करने लगे।

जिससे संसार में प्रलय की स्थिति उत्पन्न हो गई। तब भगवान विष्णु ने सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए। जहां-जहां ये टुकड़े गिरे, वहां शक्तिपीठ बन गए। कामाख्या मंदिर उसी स्थान पर बना है, जहां माता सती का योनि भाग गिरा था।

क्यों खास है यह मंदिर?

इस मंदिर की एक खास बात यह है कि यहां देवी की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि मंदिर में एक प्राकृतिक कुंड है, जिसे फूलों से ढका जाता है। भक्त इसी कुंड की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि एक समय ऐसा आता है जब माना जाता है कि देवी रजस्वला होती हैं।

उस दौरान मंदिर के कपाट तीन दिन के लिए बंद कर दिए जाते हैं और इस दौरान ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि नदी का रंग लाल किसी प्राकृतिक कारण से बदलता होगा, लेकिन भक्तों के लिए यह देवी का चमत्कार ही है।

क्या होता है कामाख्या मंदिर में?

यह मंदिर तंत्र-मंत्र और अनुष्ठानों के लिए भी जाना जाता है। कई लोग यहां काला जादू से छुटकारा पाने के लिए आते हैं। हालांकि, यह गलतफहमी भी है कि यहां काला जादू किया जाता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। असल में, यहां तांत्रिक साधु लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए अनुष्ठान करते हैं।

कामाख्या मंदिर में वशीकरण पूजा भी होती है, जिसका उद्देश्य पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत बनाना होता है। यह पूजा किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि आपसी संबंध सुधारने के लिए की जाती है।

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साधु और अघोरी की भूमिका

साधु और अघोरियों द्वारा काला जादू या वशीकरण हटाने की पूजा की जाती है। कामाख्या मंदिर में हमेशा साधु-संत और अघोरी साधना में लीन रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि उन्हें दस महाविद्याओं का ज्ञान होता है। वे विशेष अनुष्ठान करके लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने में मदद करते हैं।

मंदिर में होने वाले अनुष्ठान

  1. तांत्रिक और साधु यहां विशेष अनुष्ठान करके बुरी शक्तियों से छुटकारा दिलाते हैं।
  2. रिश्तों को सुधारने और आपसी प्रेम बढ़ाने के लिए यह पूजा की जाती है।
  3. यहां बकरे और भैंसों की बलि दी जाती है, लेकिन मादा जानवर की बलि नहीं दी जाती है।
  4. नवरात्रि और अंबुबाची मेले के दौरान यहां विशेष पूजा होती है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं।

कैसे पहुंचें कामाख्या मंदिर?

  • सड़क मार्ग से – कामाख्या मंदिर सड़क द्वारा शहर के कई केंद्रों से जुड़ा हुआ है। गुवाहाटी से कामाख्या मंदिर जाने के लिए आप टैक्सी या फिर बस ले सकते हैं।
  • रेल मार्ग – कामाख्या रेलवे स्टेशन से आप आसानी से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
  • हवाई मार्ग – सबसे नजदीकी हवाई अड्डा गुवाहाटी का गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो 14 किमी दूर है

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