Doughnut: क्या आप जानते हैं डोनट की कहानी, कहां से आई ये स्वादिष्ट पेस्ट्री?

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डेली संवाद, नई दिल्ली। Doughnut: बिजनेस मीटिंग के लिए रेस्त्रां में आए विशाल के क्लाइंट को आने में वक्त है। कॉफी और कुछ स्नैक्स ऑर्डर करने के लिए जैसे ही मेन्यू में नजर फिराई तो पाया कि डोनट्स (Doughnut) के लिए एक पूरा मेन्यू कवर अलग से है। डोनट्स को लेकर सबसे ज्यादा आकर्षण युवाओं में देखने को मिल रहा है, खासतौर पर 18 से 35 साल की उम्र के लोगों को यह बेहद पसंद आता है। वे डिजिटल रूप से सक्रिय हैं, उन्हें फूड ट्रेंड के बारे में जानकारी है और वे हमेशा कुछ ऐसा आजमाने की तलाश में रहते हैं, जो देखने में आकर्षक और अनोखा हो।

बदल रहा है साथ

उनके लिए खाना सिर्फ स्वाद नहीं है, यह एक अनुभव है। डोनट्स (Doughnut) नाश्ते के भोजन से लेकर शाम को कुछ मीठा खाने की क्रेविंग तक को शांत करने का विकल्प बन चुका है। लोग अब बोल्ड फ्लेवर, टेक्सचर और यहां तक कि बेक्ड या ग्लूटन-फ्री डोनट्स जैसे विकल्पों के साथ प्रयोग करने के लिए तैयार हैं। यही वजह है कि हम फ्लेवर में नवाचार करने के साथ ही इसकी प्लेटिंग एस्थेटिक्स और पेयरिंग के माध्यम से इस क्लासिक ट्रीट को उभार रहे हैं।

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पारंपरिक रूप से डोनट्स कॉफी या हॉट चॉकलेट के साथ बहुत अच्छे लगते हैं, लेकिन हम इसे कई तरह के फ्लेवर वाली चाय, कोल्ड ब्रू और मसालेदार पेय पदार्थों के साथ भी परोस रहे हैं। कुछ अलग करने के लिए हमने चिली चीज डिप्स व हर्ब-इन्फ्यूज्ड बटर के साथ भी इसको परोसा है। डोनट्स को अन्य चीजों के साथ मिलाते समय हम यह ध्यान रखते हैं कि भले ही हम इसे विपरीत स्वाद के साथ परोसें मगर दोनों एक-दूसरे के पूरक बन जाएं। अच्छी बात यह रही कि इसमें लोगों की प्रतिक्रिया सकारात्मक तौर पर अद्भुत रही है।

हर मूड का अपना स्वाद

शुगर ग्लेज्ड, चाकलेट फ्रॉस्टेड, जेली फिल्ड, सिनेमन शुगर वे पारंपरिक किस्में हैं, जिनके बल पर डोनट विदेश से भारतीय बेकरियों की शेल्फ तक पहुंच चुके हैं। शेफ लगातार इनके फ्लेवर में विशिष्ट टॉपिंग और फिलिंग के साथ प्रयोग कर रहे हैं, जिससे डोनट प्रेमियों को लगातार कुछ नया ही मिलता है। क्लासिक ग्लेज्ड या चॉकलेट सहित हमने गुलाब-पिस्ता, गुलकंद क्रीम चीज, कैफे मोका और चिली-मैंगो फ्लेवर के डोनट्स तैयार किए हैं।

इस विदेशी व्यंजन में जब देसी स्वाद मिलता है, तो हमारे मेहमान इसके अनूठे अंदाज से आश्चर्यचकित रह जाते हैं। अब डोनट्स स्नैक नहीं, गोरमे फूड बन चुका है। हम इसमें एडिबल फ्लॉवर, गोल्ड डस्ट और आर्टिस्टिक चॉकलेट वर्क करते हैं। इनके अलावा मिनी डोनट टॉवर, डोनट सैंडविच और डोनट्स पर पसर्नलाइज्ड टॉपिंग भी लोकप्रिय हो रहे हैं।

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इंटरनेट मीडिया पर मची धूम

जेन जी आज अपनी हर गतिविधि को इंटरनेट मीडिया पर अपलोड करना चाहता है। ऐसे में जब वे इस तरह के अनूठे आकार-स्वाद वाले डोनट्स ट्राई करते हैं तो एक बार इसकी तस्वीर अवश्य लेना पसंद करते हैं। इसलिए हम इस बात का भी ध्यान रखते हैं कि डोनट्स न सिर्फ स्वाद में लाजवाब हों, बल्कि उनकी तस्वीर देखने वाला व्यक्ति भी आकर्षित हो जाए। इंस्टाग्राम और रील्स ने डोनट्स को खूब प्रचलित कर दिया है। सुंदर डोनट की तस्वीर या वीडियो तुरंत ध्यान आकर्षित करती है और यह लोगों को इसे देखने या आगे दोबारा ऑर्डर करने के लिए प्रेरित करती है।

हाईवे पर स्वाद का सफर

अमेरिका की यह मजेदार मिठाई दरअसल वहां नीदरलैंड से आई थी और वह भी मात्र दो शताब्दी पहले। अमेरिका आकर बसे डच इसकी रेसिपी अपने साथ लाए और उनमें से कुछ ने रोजी-रोटी कमाने के लिए डोनट्स बेचने की शुरुआत की। शीघ्र ही इस आसान सी किसी बड़े गुलगुले जैसी मिठाई ने राजमार्गों के किनारे टेक-अवे फूड स्टाल्स में जगह बना ली और सफर के साथ इसकी लोकप्रियता बर्गर की तरह शहर-दर-शहर फैलती गई।

ऐसे हुआ डोनट में छेद

डोनट्स को एक तरह का फ्राइड केक कहा जाता था, मगर तब इसमें छेद नहीं होता था। डोनट्स में छेद करने की शुरुआत 1847 में हुई। यह छेद सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि जरूरी वजह से है। पहले जब डोनट्स बिना छेद के बनाए जाते थे, तो तले जाने के बाद बाहरी हिस्सा तो पक जाता था, लेकिन अंदर का हिस्सा कच्चा रह जाता था। ऐसे में अमेरिका के एक जहाज के कप्तान हैनसेन ग्रेगरी ने बीच से आटा निकालने का सुझाव दिया। इससे डोनट चारों ओर से अच्छे से पकने लगा। तभी से डोनट्स में छेद किया जाने लगा।

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मानसी जायसवाल, डेली संवाद ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। वे लोकल खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। वह 5 सालों से अधिक समय से Daily Samvad (Digital) में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत डेली संवाद से की। उन्होंने पंजाब के जालंधर के खालसा कालेज से एमए की डिग्री हासिल की है।
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