SIR: चुनाव आयोग ने काट दिए 48 लाख वोटरों के नाम, बिहार में चुनाव से पहले मचा घमासान

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डेली संवाद, पटना। SIR Bihar Latest News Update: बिहार (Bihar) में चुनाव से पहले बड़ा धमाका हुआ है। बिहार में 48 लाख लोगों के वोट काटे गए हैं। इन वोटरों का नाम काटने से पहले बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम किया गया। इसे लेकर पूरे देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस के राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने जहां भाजपा (BJP) को वोट चोर बताया वहीं चुनाव आयोग को वोट चोर का साथ देने का आरोप लगाया।

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बिहार (Bihar) में SIR के बाद अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर 2025 को जारी कर दी गई है। यह सूची बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस सूची के अनुसार अंतिम मतदाता सूची में 17 लाख 86 हजार 601 मतदाता ड्राफ्ट सूची से अधिक बढ़े हैं जबकि एसआईआर शुरू होने के ठीक पहले 24 जून को जारी मतदाता सूची से 47 लाख 77 487 मतदाता कम हुए हैं। अभी आधिकारिक डेटा का इंतजार किया जा रहा है।

Bihar News
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बिहार में मतदाता

  • 24 जून 2025 को मतदाता संख्या: 7.89 करोड़
  • ड्राफ्ट सूची से हटाए गए मतदाता: 65 लाख
  • अयोग्य मतदाता हटाए गए: 4 लाख
  • ड्राफ्ट सूची में मतदाता: 7.24 करोड़
  • फॉर्म 6 के माध्यम से जोड़े गए योग्य मतदाता: 21 लाख
  • 30 सितंबर 2025 को अंतिम सूची में मतदाता: 7.41 करोड़

बिहार में चुनाव की संभावित तिथियां

बिहार में फिलहाल चुनावी शंघनाद अभी नहीं हुआ। चुनाव आयोग 4-5 अक्टूबर 2025 को पटना का दौरा करेगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अगले हफ्ते होने की संभावना है। माना जा रहा है कि पहला चरण छठ पूजा के बाद, अक्टूबर अंत या नवंबर पहले हफ्ते में संभावित है। बिहार विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है।

Bihar Bandh News Update Live
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वोटर लिस्ट में गड़बड़ी से लाखों लोग परेशान

आपको बता दें कि एक ही परिवार के लोगों को अलग-अलग बूथ पर कर दिया गया है जिससे लोग परेशान है। अगर एक ही परिवार में चार लोग है तो पति का किसी और बूथ पर तो पत्नी का किसी और बूथ पर कर दिया गया है जिससे आम जनता बहुत ही परेशान है।

क्या है SIR

SIR का मतलब विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) होता है, जैसा कि भारत के मुख्य चुनाव अधिकारी और भारतीय चुनाव आयोग द्वारा प्रयोग किया गया है। इस प्रक्रिया का उपयोग मतदाता सूचियों को अपडेट करने के लिए किया जाता है। इसमें मौजूदा मतदाताओं के दस्तावेज़ों का पुन: सत्यापन किया जाता है और नए पात्र मतदाताओं का नाम दर्ज किया जाता है।



















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