डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar: जालंधर (Jalandhar) स्थित आरटीओ ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक पर उस समय हंगामे की स्थिति बन गई, जब किन्नर समुदाय की एक सदस्य ने टेस्ट लेने वाले कर्मचारियों पर पक्षपात और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए। आरोपों के बाद मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जिसके चलते ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुई।
ट्रैक की हालत बेहद खराब
किन्नर समुदाय की सदस्य का आरोप है कि ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक की हालत बेहद खराब है। ट्रैक पर कई जगहों पर घास उगी हुई है, लेकिन इसके बावजूद अभ्यर्थियों को उसी ट्रैक पर टेस्ट देने के लिए मजबूर किया जाता है। जब वाहन चलाते समय गाड़ी अनजाने में घास वाले हिस्से में चली जाती है, तो कर्मचारियों द्वारा यह कहकर अभ्यर्थियों को फेल कर दिया जाता है कि गाड़ी ट्रैक से बाहर निकल गई है।
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उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल उनके साथ नहीं, बल्कि रोजाना कई अभ्यर्थियों के साथ हो रही है। हालांकि अधिकतर लोग डर, समय और पैसों की वजह से आवाज नहीं उठा पाते और चुपचाप दोबारा टेस्ट फीस जमा कर देते हैं। किन्नर ने बताया कि वह अपने एक दोस्त के साथ ड्राइविंग टेस्ट देने के लिए आरटीओ ट्रैक पर आई थीं। पहले प्रयास में उनके दोस्त को यह कहकर फेल कर दिया गया कि गाड़ी ट्रैक की सीमा से बाहर चली गई है।
वीडियो फुटेज दिखाने की मांग की
जब उन्होंने कर्मचारियों से इस संबंध में वीडियो फुटेज दिखाने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गलती वास्तव में कहां हुई, तो कर्मचारियों ने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना है कि यदि ट्रैक पर कैमरे लगे हैं और रिकॉर्डिंग होती है, तो अभ्यर्थियों को अपनी गलती देखने का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन कर्मचारियों का रवैया पूरी तरह से टालमटोल वाला रहा।
किन्नर समुदाय की सदस्य ने आगे आरोप लगाया कि जब वे दोबारा टेस्ट देने आईं, तो इस बार उन्हें पार्किंग सही तरीके से न होने का हवाला देकर फेल कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हर बार अलग-अलग बहाने बनाकर अभ्यर्थियों को असफल कर दिया जाता है, ताकि उन्हें बार-बार टेस्ट फीस भरनी पड़े। उनका कहना है कि हर किसी के लिए बार-बार फीस देना संभव नहीं होता, खासकर उन लोगों के लिए जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं।
ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया रोकनी पड़ी
जब उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर मौके पर मौजूद कर्मचारियों से बातचीत करने और अपनी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो कर्मचारियों ने बात करने से ही मना कर दिया। इसी बात से नाराज होकर वहां हंगामा शुरू हो गया। कुछ देर के लिए ड्राइविंग टेस्ट की प्रक्रिया भी रोकनी पड़ी, जिससे अन्य अभ्यर्थियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
किन्नर ने यह भी कहा कि ड्राइविंग टेस्ट देने आने वाले सभी लोग पढ़े-लिखे या तकनीकी रूप से दक्ष नहीं होते। ऐसे में कर्मचारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अभ्यर्थियों को टेस्ट प्रक्रिया और गलतियों के बारे में सही तरीके से समझाएं। लेकिन इसके बजाय कर्मचारियों का व्यवहार रूखा और दबाव बनाने वाला रहता है।
जांच कराने की मांग
उन्होंने आरटीओ प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही ड्राइविंग टेस्ट प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, ट्रैक की हालत सुधारने और वीडियो फुटेज दिखाने की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। इस घटना के बाद वहां मौजूद अन्य अभ्यर्थियों में भी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो भविष्य में ऐसे विवाद और बढ़ सकते हैं।








