डेली संवाद, नई दिल्ली/लखनऊ/झांसी। GST Scam: सैंट्रल जीएसटी (GST) के अफसरों द्वारा 70 लाख रुपये की रिश्वतखोरी के बड़े मामले में सरकार ने बड़ी कार्ऱवाई की है। सरकार ने सेंट्रल जीएसटी (GST) विभाग की डिप्टी कमिश्नर (आईआरएस अधिकारी) प्रभा भंडारी समेत तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के खिलाफ कार्रवाई की है, जबकि कानपुर कमिश्नरेट के आयुक्त रोशन लाल ने जीएसटी सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा को सस्पेंड कर दिया है। तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।

GST टीम का छापा
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के झांसी (Jhansi) के झोकनबाग इलाके में स्थित जय दुर्गा हार्डवेयर और जय अंबे प्लाईवुड फर्म से जुड़ा है। इन दोनों फर्मों पर सेंट्रल जीएसटी (GST) टीम ने छापा मारा था, जिसमें करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी सामने आई थी।
जीएसटी (GST) की जांच में 13 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई थी, जिस पर नियमों के अनुसार 50 प्रतिशत पेनाल्टी और पांच साल का ब्याज जोड़ने के बाद कुल 23 करोड़ रुपये की वसूली बनती थी।
23 करोड़ के टैक्स चोरी, 50 लाख में निपटाने की डील
आरोप है कि डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा ने फर्म मालिकों के साथ मिलकर 23 करोड़ रुपये की देनदारी को घटाकर मात्र 50 लाख रुपये करने की साजिश रची। इसके बदले अधिकारियों ने 1.50 करोड़ रुपये की रिश्वत तय की थी।

शुरुआती बातचीत में रिश्वत की रकम दो करोड़ रुपये तय हुई थी, जिसे बाद में घटाकर डेढ़ करोड़ कर दिया गया। फर्म मालिकों की ओर से इस सौदे को आगे बढ़ाने के लिए वकील नरेश कुमार गुप्ता को मध्यस्थ बनाया गया। नरेश ने जीएसटी (GST) सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा से संपर्क किया और रिश्वत के बदले केस निपटाने की बात तय हुई।
सीबीआई ने 70 लाख लेते रंगे हाथ पकड़ा
इस पूरे लेनदेन की जानकारी सीबीआई तक पहुंच गई। सीबीआई ने मामले की गोपनीय जांच शुरू की और सभी गतिविधियों पर नजर रखी। 30 दिसंबर को सीबीआई (CBI) ने ट्रैप बिछाकर सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा को 70 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। उनके साथ जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगनानी और वकील नरेश कुमार गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया।
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गिरफ्तारी के बाद की पूछताछ में सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पूरी रिश्वतखोरी डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के इशारे पर हो रही थी और वह इस पूरे खेल की मास्टरमाइंड थीं। अनिल ने बताया कि प्रभा भंडारी को यह जानकारी थी कि 30 दिसंबर को पहली किस्त के रूप में 70 लाख रुपये दिए जाने हैं।

डिप्टी कमिश्नर की गिरफ्तारी
GST सुपरिटेंडेंट के बयान के बाद सीबीआई (CBI) ने दिल्ली से डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को गिरफ्तार किया। उनके आवास और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की गई।
जहां से करीब 90 लाख रुपये नकद, भारी मात्रा में आभूषण और कई संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गए। गिरफ्तारी के बाद प्रभा भंडारी को गाजियाबाद कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया गया और आगे की पूछताछ के लिए लखनऊ लाया गया।
विभाग में बड़ा फेरबदल
घूसकांड सामने आने के बाद सेंट्रल जीएसटी (GST) विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। झांसी डिवीजन के निवारक दस्ते में तैनात निरीक्षक प्रशांत विश्वकर्मा को हटाकर कानपुर की रिव्यू ब्रांच में भेज दिया गया है, जिसे साइड पोस्टिंग माना जा रहा है। वहीं निरीक्षक नरेंद्र कुमार को भी हटाकर कानपुर मंडल भेजा गया है। इन तबादलों के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
CBI की FIR में सात नामजद
सीबीआई (CBI) ने लखनऊ (Lucknow) में दर्ज एफआईआर में कुल सात लोगों को नामजद किया है। इनमें डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा, वकील नरेश कुमार गुप्ता और जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगनानी शामिल हैं, जिन्हें गिरफ्तार किया जा चुका है।
इसके अलावा राजू मंगनानी के भाई तेजपाल मंगनानी और जय अंबे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई की इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। इसी तरह सीबीआई ने पंजाब में एक पुलिस अफसर को भी गिरफ्तार किया था।

चार बिंदुओं में पूरा मामला समझें
- 18 दिसंबर को डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के नेतृत्व में जीएसटी टीम ने जय दुर्गा हार्डवेयर और जय अंबे प्लाईवुड पर छापा मारा, जहां बड़ी टैक्स चोरी पकड़ी गई।
- केस निपटाने के लिए फर्म मालिकों ने वकील के जरिए अफसरों से संपर्क किया और रिश्वत की डील तय हुई।
- 30 दिसंबर को सीबीआई ने 70 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए दो सुपरिटेंडेंट, एक वकील और फर्म मालिक को गिरफ्तार किया।
- पूछताछ में डिप्टी कमिश्नर का नाम सामने आने के बाद उन्हें भी गिरफ्तार किया गया।
संपत्तियों की जांच
सीबीआई अब डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी और दोनों सुपरिटेंडेंट की आय से अधिक संपत्तियों की जांच कर रही है। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने सेंट्रल जीएसटी (GST) विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं और आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा बढ़ सकता है।






