डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब सरकार ने पंजाब इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (पी.आई.एल.बी.एस.), एस.ए.एस. नगर में प्रदेश में पहला सफल लिवर ट्रांसप्लांट करवाकर एक निर्णायक प्रशासनिक मील का पत्थर स्थापित किया है। आजादी के बाद पहली बार, पंजाब सरकार द्वारा सबसे जटिल और महंगी जीवन-रक्षक चिकित्सा प्रक्रियाओं में से एक प्रक्रिया को प्रदेश की सरकारी संस्था में उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया गया है जो पहले महानगरों के निजी अस्पतालों तक ही सीमित थी।
यह उपलब्धि कोई अकेली चिकित्सा उपलब्धि नहीं है। यह दृढ़ इरादे को बयान करती है। यह उपलब्धि दशकों की उपेक्षा से स्पष्ट राहत प्रदान करती है, जिस तहत पिछली प्रदेश सरकारों ने महत्वपूर्ण तृतीय स्तर की स्वास्थ्य देखभाल को दिल्ली, मुंबई या चेन्नई तक सीमित रखा और जिससे पंजाब के मरीजों को भारी वित्तीय और भावनात्मक खर्च झेलने पड़े। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में प्रदेश निर्भरता से क्षमता की ओर बढ़ा है।
जनता स्वास्थ्य देखभाल प्रदेश की जिम्मेदारी
पी.आई.एल.बी.एस. में लिवर ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करना स्वास्थ्य देखभाल प्रति मान सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाता है। जिसमें नागरिकों को निजी अस्पतालों की ओर जाने के लिए मजबूर करने की बजाय मजबूत सरकारी संस्थाओं का निर्माण करना शामिल है। उन्नत देखभाल सेवाओं को अब अमीरों के लिए विशेष अधिकार के रूप में नहीं, बल्कि सभी नागरिकों प्रति प्रदेश की जिम्मेदारी माना जाता है।

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स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Mann) की दूरदर्शी अगुवाई के तहत, पंजाब सरकार द्वारा इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस का निर्माण किया जा रहा है जो विश्व स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल तक आम नागरिक की आसान पहुंच को सुनिश्चित करती हैं। पी.आई.एल.बी.एस. में सफल लिवर ट्रांसप्लांट एक ऐतिहासिक कदम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि पंजाब के लोगों को अब उन्नत लिवर देखभाल के लिए प्रदेश से बाहर जाने की जरूरत नहीं है।”
पंजाब की जरूरतों की ओर सरकार की प्राथमिकता
देश भर में लिवर की बीमारियों से पीड़ित सबसे अधिक पंजाब में हैं। पंजाब में हेपेटाइटिस सी की दर 0.56 प्रतिशत से लेकर 3.6 प्रतिशत तक है, जबकि राष्ट्रीय औसत लगभग 0.3 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि अनुमानित 1.5 से 10 लाख व्यक्ति इससे पीड़ित हैं। हेपेटाइटिस बी की दर लगभग 1 से 1.5 प्रतिशत है। देश भर में सिरोसिस के 40 प्रतिशत से अधिक मामले शराब से संबंधित लिवर की बीमारी के कारण होते हैं और पंजाब में शराब की अधिक खपत इस जोखिम को और बढ़ाती है।
सालों से, इस जन स्वास्थ्य संकट को अनदेखा किया गया है। मरीजों को इलाज के लिए प्रदेश से बाहर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा, परिवार कर्ज के बोझ तले दब गए और सरकारी अस्पताल ढांचागत रूप से असमर्थ रहे। मान सरकार ने उस क्षेत्र की ओर ध्यान देने को चुना जिसे पिछली सरकारों द्वारा लगातार अनदेखा किया गया।
इलाज के लिए अन्य प्रदेशों पर निर्भरता का अंत
इस पहलकदमी से पहले, पंजाब के लिवर ट्रांसप्लांट मरीजों के पास दूर-दराज महानगरों में इलाज करवाने के अलावा कोई वास्तविक विकल्प नहीं था। इससे जेब पर भारी बोझ, लंबी प्रतीक्षा, रोजी-रोटी का नुकसान और पारिवारिक सहायता की कमी का सामना करना पड़ता था। इसका अर्थ है कि लिवर ट्रांसप्लांट मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों की पहुंच से दूर रहा।
पी.आई.एल.बी.एस. में लिवर ट्रांसप्लांट को सक्षम बनाकर, पंजाब सरकार ने लिवर देखभाल संबंधी लंबे समय से चले आ रहे पहुंच के अंतर को भर दिया है और उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण पैदा की है जो इलाज का खर्च न उठा पाने के कारण जीने की उम्मीद छोड़ चुके थे।
पी.आई.एल.बी.एस. एक सरकारी संस्था के रूप में
पी.आई.एल.बी.एस. को लिवर और पिशाब संबंधी बीमारियों के लिए एक विशेष केंद्र के रूप में विकसित किया गया है जो एक छत के नीचे उन्नत हेपेटोलॉजी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, डायग्नोस्टिक्स, क्रिटिकल केयर, हेपेटो-बिलियरी सर्जरी, ट्रांसप्लांट सेवाएं और ट्रांसप्लांट के बाद फॉलो-अप की पेशकश करता है। यहां किया गया सफल ट्रांसप्लांट यह साबित करता है कि ये प्रणालियां प्रतिक्रियात्मक नहीं बल्कि पूरी तरह कार्यशील और क्लिनिकल रूप से एकीकृत हैं।
यह सरकार द्वारा दी गई प्राथमिकता का सीधा नतीजा है। जटिल तृतीय स्तर की देखभाल के लिए निरंतर फंडिंग, प्रशासनिक समर्थन और सरकारी संस्थाओं को खोखला करने की बजाय उन्हें मजबूत करने के संकल्प की जरूरत होती है।
सर्जरी के अलावा अन्य सेवाएं
यह पहला लिवर ट्रांसप्लांट पंजाब के आधुनिक अंग ट्रांसप्लांट देखभाल सेवाओं में औपचारिक प्रवेश को दर्शाता है। यह प्रदेश से बाहर के अस्पतालों पर निर्भरता को घटाता है, जन प्रणाली में तृतीय स्तर की स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करता है और अधिक से अधिक ट्रांसप्लांट करने, प्रदेश में चिकित्सा प्रशिक्षण और जिलों में एक ढांचागत रेफरल नेटवर्क का रास्ता प्रशस्त करता है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से हेपेटाइटिस बी और सी के उन्मूलन के चल रहे प्रयासों को मजबूती देने, लिवर की बीमारी का पहले पता लगाने को सक्षम बनाने और लिवर की बीमारियों से होने वाली मौतों को काफी हद तक कमी लाने की संभावना है।
सरकार की प्राथमिकता के सार्थक नतीजे
इस उपलब्धि से, पंजाब ने साबित किया है कि जब सरकार द्वारा दृढ़ता से प्राथमिकता दी जाती है तो जनता स्वास्थ्य देखभाल संस्थाएं भी आम तौर पर उच्च स्तरीय निजी अस्पतालों जैसे नतीजे प्रदान कर सकती हैं। मान सरकार ने साबित किया है कि प्रदेश की क्षमता को मजबूत करना खोखली बयानबाजी पर नहीं बल्कि ठोस अमल पर आधारित है।
सरकारी अस्पताल में लिवर ट्रांसप्लांटेशन सेवाएं पेश करके, पंजाब ने न केवल कीमती जानें बचाई हैं बल्कि यह भी बताया है कि नागरिक अपनी सरकार से क्या उम्मीद कर सकते हैं।








