डेली संवाद, नई दिल्ली। SIR 2026: देश में मतदाता सूचियों को अपडेट और शुद्ध करने के लिए चुनाव आयोग ने बड़ा कदम उठाया है। Election Commission of India ने गुरुवार को देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) कराने की घोषणा की है। इस संबंध में आयोग के सचिव पवन दीवान ने 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को पत्र लिखकर सभी तैयारियां जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग (Election Commission of India) की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि दिल्ली और कर्नाटक सहित शेष 22 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अप्रैल से शुरू होने की संभावना है। इससे पहले आयोग ने 24 जून 2025 को आदेश जारी कर पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) कराने का निर्णय लिया था।

क्या है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR मतदाता सूची को व्यापक स्तर पर अपडेट करने की प्रक्रिया है। इसके तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं, मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और किसी भी प्रकार की त्रुटियों को सुधारा जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य वार्षिक पुनरीक्षण से अधिक व्यापक और गहन होती है।
चुनाव आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन हो। लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।
राज्यों को दिए गए निर्देश
आयोग के सचिव पवन दीवान द्वारा भेजे गए पत्र में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से कहा गया है कि वे बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की तैनाती, प्रशिक्षण, दस्तावेजों की उपलब्धता और तकनीकी व्यवस्थाओं को समय पर पूरा करें। इसके अलावा राजनीतिक दलों के साथ समन्वय और जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में भाग लें।
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इस पत्र में स्पष्ट किया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया तय समय-सीमा के भीतर पूरी की जानी चाहिए। आयोग चाहता है कि किसी भी राज्य में तैयारी के स्तर पर देरी न हो, जिससे मतदाता सूची के प्रकाशन में बाधा न आए।

क्यों जरूरी है SIR?
पिछले कुछ वर्षों में शहरीकरण, आंतरिक पलायन और जनसंख्या में बदलाव के कारण कई क्षेत्रों में मतदाता सूचियों में विसंगतियां सामने आई हैं। कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम सूची में बने रहने या एक ही व्यक्ति के नाम दो अलग-अलग स्थानों पर दर्ज होने जैसी शिकायतें मिली हैं।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए इन त्रुटियों को दूर कर एक स्वच्छ और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि सटीक मतदाता सूची निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव की बुनियाद होती है।
अप्रैल से शुरू होगी प्रक्रिया
चुनाव आयोग के अनुसार, पंजाब, चंडीगढ़, दिल्ली, कर्नाटक और अन्य 22 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से SIR प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। इस दौरान मतदाताओं को अपने नाम की जांच, संशोधन या नए पंजीकरण के लिए निर्धारित फॉर्म भरने होंगे। आयोग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराएगा।
संभावना है कि इस प्रक्रिया के तहत घर-घर सत्यापन अभियान भी चलाया जाएगा। बूथ लेवल अधिकारी मतदाताओं से संपर्क कर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे और दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे। Election Commission of India द्वारा घोषित Special Intensive Revision (SIR) देशभर में चरणबद्ध तरीके से कराया जाएगा।
आयोग के पत्र के अनुसार, दिल्ली और कर्नाटक को छोड़कर शेष 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अप्रैल से SIR प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि आयोग ने आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से अलग से जारी नहीं की है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार जिन प्रमुख राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रस्तावित है।

इन राज्यों में होगा SIR
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- मध्य प्रदेश
- राजस्थान
- छत्तीसगढ़
- झारखंड
- पंजाब
- हरियाणा
- हिमाचल प्रदेश
- उत्तराखंड
- गुजरात
- महाराष्ट्र
- ओडिशा
- पश्चिम बंगाल
- तमिलनाडु
- केरल
- तेलंगाना
- आंध्र प्रदेश
केंद्र शासित प्रदेश
- जम्मू-कश्मीर
- लद्दाख
- चंडीगढ़
- पुदुचेरी
- अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
- दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव

राजनीतिक महत्व भी
चूंकि आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, ऐसे में SIR को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल जहां मतदाता सूची की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, वहीं आयोग का यह कदम चुनावी प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में देखा जा रहा है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि SIR एक नियमित और प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य केवल मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इसका किसी विशेष चुनाव या राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है।
देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए सटीक और त्रुटिरहित मतदाता सूची अनिवार्य है। ऐसे में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की घोषणा को एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि राज्य स्तर पर तैयारियां कितनी तेजी से पूरी होती हैं और अप्रैल से शुरू होने वाली प्रक्रिया कितनी प्रभावी साबित होती है।









