डेली संवाद, मुरादाबाद। GST Bogus Billing Scam News Uudate: करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने नफीस अहमद को गिरफ्तार किया है, जो उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के जसपुर का रहने वाला है। अब तक जांच में सामने आया है कि फर्जी कंपनी बनाकर करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी की जा रही है।

जीएसटी (GST) टीम की जांच में सामने आया है कि उत्तराखंड (Uttarakhand) का नफीस फर्जी कंपनियों के जरिए जीएसटी (GST) चोरी करता रहा है। वह मजदूरों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर बोगस फर्में तैयार कराता था और फर्जीवाड़े के जरिए सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

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‘एसएम इंटरप्राइजेज’ के नाम पर फर्जीवाड़ा

इस मामले की शुरुआत 14 जुलाई 2025 को हुई थी, जब जीएसटी (GST) प्रधान सहायक कार्यालय के सहायक अरविंद कुमार ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि ‘एसएम इंटरप्राइजेज’ नाम से लकड़ी के कारोबार की आड़ में बोगस फर्में संचालित की जा रही हैं।

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प्रारंभिक जांच में कर चोरी के बड़े नेटवर्क का संकेत मिला, जिसके बाद एसपी क्राइम एंड ट्रैफिक सुभाष चंद्र गंगवार के निर्देशन में एसआईटी गठित की गई। एसआईटी की जांच में पहले ही जसपुर निवासी अरशद अली को गिरफ्तार किया जा चुका है। उसी कड़ी में निरीक्षक शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने शनिवार को नफीस अहमद को दबोच लिया।

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कई चौंकाने वाले खुलासे

पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। नफीस ने बताया कि उसके मोहल्ले में बिजनौर जिले के नगीना का एक मजदूर काम करता था। उसने मजदूर को कुछ पैसे देकर उसका आधार कार्ड ले लिया और उसमें अपना मोबाइल नंबर अपडेट करा दिया। इसके बाद उसी मजदूर के नाम पर जसपुर में पैन कार्ड बनवाया गया।

आगे की साजिश के तहत मजदूर के नाम से एक्सिस बैंक में खाता खुलवाया गया। यहीं नहीं, आरोपी ने अपने सगे भाई यामीन के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक ऑफ बड़ौदा की जसपुर शाखा में एक और खाता खुलवाया। उस खाते से अपनी आईडी पर जारी सिम को लिंक कर लिया।

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फर्जी कंपनियों का पंजीकरण

इसके अलावा अपनी साली की आईडी पर भी एक सिम कार्ड निकलवाया गया। इन सभी खातों और सिम कार्डों का इस्तेमाल फर्जी कंपनियों के पंजीकरण और लेन-देन के लिए किया जाता था। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह सभी दस्तावेज और बैंक खातों की जानकारी अपने साथियों अमान और आदिल को सौंप देता था।

दोनों कागजातों के आधार पर बोगस फर्मों का पंजीकरण कराते थे और जीएसटी (GST) नंबर हासिल कर लेते थे। इन फर्मों के जरिए फर्जी बिलिंग कर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी की गई। पूछताछ में नफीस ने यह भी बताया कि एहतेशाम और पहले गिरफ्तार हो चुका अरशद अली भी इस गिरोह का हिस्सा थे।

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20 बोगस फर्में पंजीकृत कराई

उसे प्रत्येक ‘किट’ उपलब्ध कराने के बदले 25 हजार रुपये मिलते थे। उसने अमान और आदिल को पांच से छह लोगों के दस्तावेज मुहैया कराए, जिनके आधार पर करीब 20 बोगस फर्में पंजीकृत कराई गईं। इन फर्मों के जरिए बड़े पैमाने पर फर्जी कारोबार दिखाकर टैक्स चोरी को अंजाम दिया गया।

एसआईटी का कहना है कि मामले में अभी कई अहम कड़ियां जुड़नी बाकी हैं। गिरफ्तार आरोपी को पूछताछ के बाद अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस अब फरार आरोपियों एहतेशाम, आदिल और अमान की तलाश में दबिश दे रही है।

जीएसटी चोरी नेटवर्क

अधिकारियों के मुताबिक, जीएसटी (GST) चोरी के इस नेटवर्क की परतें खुलने से और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियां बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और पंजीकृत फर्मों के लेन-देन का बारीकी से विश्लेषण कर रही हैं। माना जा रहा है कि इस गिरोह ने योजनाबद्ध तरीके से फर्जी दस्तावेजों के सहारे कर व्यवस्था को चूना लगाया।

पुलिस का कहना है कि जल्द ही बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी कर पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जाएगा। वहीं, विभागीय स्तर पर भी फर्जी फर्मों की पहचान कर उनके जीएसटी (GST) पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

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