डेली संवाद, नई दिल्ली। Mahadev Betting App Case: देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन सट्टेबाजी मामलों में शामिल महादेव सट्टा एप केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ा एक्शन लिया है। ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत करीब 1700 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है। यह कार्रवाई भारत के साथ-साथ विदेशों तक फैली हुई है, जिसमें दुबई की 18 और नई दिल्ली की 2 प्रॉपर्टी शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर यह मामला सुर्खियों में आ गया है।
ईडी (ED) की जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने सट्टेबाजी से कमाए गए अवैध धन को लग्जरी प्रॉपर्टी में निवेश किया। दुबई (Dubai) के पॉश इलाकों में खरीदी गई इन संपत्तियों में दुबई हिल्स एस्टेट (Dubai Hills Estate) के आलीशान विला और अपार्टमेंट, बिजनेस बे और एसएलएस होटल एंड रेसिडेंस में हाई-एंड फ्लैट्स के अलावा दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा (Burj Khalifa) में स्थित अपार्टमेंट भी शामिल हैं। ये सभी प्रॉपर्टी प्राइम लोकेशन पर स्थित हैं और इनकी कीमत करोड़ों रुपये में आंकी गई है।
सौरभ चंद्राकर के नाम प्रापर्टी
जांच एजेंसी के अनुसार, ये संपत्तियां महादेव ऑनलाइन बुक (Mahadev Betting App) के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगियों के नाम पर खरीदी गई थीं। इन सहयोगियों में विकास छापरिया, रोहित गुलाटी, अतुल अरोड़ा, नितिन तिबरेवाल और सुरेंद्र बागड़ी जैसे नाम शामिल हैं। ईडी का कहना है कि ये सभी लोग इस पूरे सट्टा नेटवर्क का हिस्सा थे और अवैध कमाई को छिपाने तथा निवेश करने में अहम भूमिका निभा रहे थे।
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ईडी ने अपनी जांच में यह भी खुलासा किया है कि महादेव ऑनलाइन बुक (Mahadev Betting App) कोई साधारण ऐप नहीं, बल्कि एक बड़ा इंटरनेशनल बेटिंग सिंडिकेट है। यह नेटवर्क टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड 365 और लेजर 247 जैसे कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए संचालित होता था। देशभर में इसके पैनल और ब्रांच बनाए गए थे, जिनके जरिए सट्टेबाजी का नेटवर्क फैलाया गया। इस पूरे सिंडिकेट का संचालन दुबई से सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल द्वारा किया जा रहा था।
काले धन को सफेद बनाया
इस नेटवर्क के काम करने का तरीका भी बेहद संगठित और योजनाबद्ध था। जांच में सामने आया है कि कुल कमाई का लगभग 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा प्रमोटर्स अपने पास रखते थे, जबकि बाकी रकम नीचे काम करने वाले एजेंट्स और ऑपरेटर्स में बांट दी जाती थी। काले धन को सफेद बनाने के लिए हवाला, शेल कंपनियों और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
ईडी के अनुसार, इस पूरे घोटाले में हजारों फर्जी बैंक खातों का उपयोग किया गया। इन खातों के लिए आम लोगों के केवाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। इसके बाद हवाला नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे को विदेश भेजा गया और फिर उसी पैसे से भारत और दुबई में महंगी संपत्तियां खरीदी गईं।
175 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी
इस मामले में ईडी अब तक 175 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है। जांच के दौरान 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 74 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा एजेंसी ने पांच चार्जशीट स्पेशल कोर्ट में दाखिल की हैं। ईडी ने सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सहित कई आरोपियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
अब तक इस पूरे मामले में ईडी करीब 4336 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच या फ्रीज कर चुकी है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और विदेश में छिपे आरोपियों को पकड़ने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
