डेली संवाद, लुधियाना। Punjab News: पंजाब के बहुचर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर कंचन कुमारी उर्फ कमल कौर भाभी (Kamal Kaur Bhabhi) हत्याकांड में बड़ा अपडेट सामने आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी अमृतपाल सिंह मेहरों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाकर पंजाब पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बठिंडा पुलिस की टीम आरोपी को UAE की अथॉरिटीज से लेकर भारत पहुंची है।
आरोपी को इसी साल जनवरी में शारजाह पुलिस ने वीजा से जुड़े एक मामले में पूछताछ के दौरान हिरासत में लिया था, जिसके बाद उसे भारत लाने की प्रक्रिया पूरी की गई। यह मामला जून 2025 में सामने आया था, जब कंचन कुमारी उर्फ कमल कौर भाभी की लाश बठिंडा के आदेश अस्पताल की पार्किंग में एक ईऑन कार से बरामद हुई थी। कार से तेज बदबू आने पर लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ।
3 महीने से चल रही थी हत्या की साजिश
बठिंडा (Bathinda) के एसएसपी अमनीत कौंडल के अनुसार, मामले में गिरफ्तार आरोपियों निमरतजीत सिंह और जसप्रीत सिंह से पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। दोनों आरोपियों ने बताया कि इस पूरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड अमृतपाल सिंह मेहरों ही है, जो पिछले तीन महीनों से कंचन की हत्या की साजिश रच रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि तीनों आरोपियों ने मिलकर पहले लुधियाना में कंचन की रेकी की। वे उसकी दिनचर्या, मिलने-जुलने वाले लोगों और रोजमर्रा की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। इतना ही नहीं, आरोपी कंचन के घर के आसपास के होटलों में भी कई दिनों तक ठहरे रहे, ताकि उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सके।

घर तक पहुंचा आरोपी, पहली कोशिश नाकाम
जांच के मुताबिक, 7 जून 2025 को अमृतपाल और जसप्रीत लुधियाना पहुंचे। जसप्रीत घर के बाहर रुका रहा, जबकि अमृतपाल अंदर गया, लेकिन उस दिन कंचन घर पर नहीं थी। इसके बाद 8 जून को अमृतपाल दोबारा कंचन के घर पहुंचा, जहां उसकी मुलाकात कंचन और उसकी मां गिरजा देवी से हुई।
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इस दौरान अमृतपाल ने कंचन को बठिंडा में एक कार शोरूम के प्रमोशन का ऑफर दिया। कंचन ने शुरुआत में मना कर दिया, क्योंकि उसकी मां की तबीयत ठीक नहीं थी। लेकिन बाद में अमृतपाल ने उसे फोन कर कार की मरम्मत और अन्य सुविधाओं का लालच दिया, जिससे वह इस प्रस्ताव के लिए तैयार हो गई।
9 जून: हत्या के दिन की पूरी प्लानिंग
9 जून को आरोपी अपनी स्कॉर्पियो गाड़ी में मोगा से लुधियाना पहुंचे। अमृतपाल ने कंचन को व्हाट्सऐप कॉल कर अपोलो अस्पताल के पास बुलाया। वहां से वह कंचन की ईऑन कार में बैठ गया, जबकि बाकी आरोपी स्कॉर्पियो में आगे-आगे चलने लगे। बठिंडा पहुंचने पर प्लान के अनुसार अमृतपाल अपनी स्कॉर्पियो में वापस चला गया और निमरत कंचन के साथ उसकी कार में बैठ गया। इसके बाद कंचन की कार को एक गैरेज में ले जाया गया, जहां उसकी गाड़ी का काम शाम 5 बजे से लेकर रात करीब साढ़े 12 बजे तक चलता रहा।
काम पूरा होने के बाद सभी आरोपी कंचन को शहर के अलग-अलग इलाकों में घुमाते रहे। भुच्चो के आसपास कई आउटलेट्स पर वे देर रात तक घूमते रहे। इसी दौरान जसप्रीत ने अपनी स्कॉर्पियो एक पेट्रोल पंप पर पार्क कर दी। इसके बाद सभी आरोपी कंचन की ईऑन कार में सवार हो गए। अमृतपाल खुद गाड़ी चला रहा था, जबकि निमरत आगे की सीट पर बैठा था और पीछे कंचन व जसप्रीत बैठे थे। कुछ देर बाद आरोपी गाड़ी को एक सुनसान स्थान पर ले गए। सुनसान जगह पर आरोपियों ने कंचन से उसके दोनों मोबाइल फोन के पासवर्ड मांगे। जब उसने विरोध किया तो जसप्रीत और निमरत ने उसे थप्पड़ मारे। इसके बाद अमृतपाल ने दोनों फोन अपने कब्जे में ले लिए।

हत्या के तुरंत बाद UAE फरार
इसके बाद हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया। जसप्रीत और निमरत पीछे की सीट पर आ गए और अमृतपाल के कहने पर कंचन के गले में फंदा डाल दिया। दोनों ने फंदे को खींचा, जबकि अमृतपाल ने उसका गला दबाया। करीब 15 मिनट तक कंचन तड़पती रही और अंततः उसकी मौत हो गई। हत्या के बाद आरोपी पेट्रोल पंप पहुंचे, जहां उनकी स्कॉर्पियो खड़ी थी। वहां उनके अन्य साथी रणजीत सिंह और एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद थे। इसके बाद योजना के तहत जसप्रीत और निमरत को कंचन की कार आदेश अस्पताल की पार्किंग में खड़ी करने के लिए कहा गया।
रात करीब 2 बजे कार पार्क कर दी गई। लेकिन कुछ समय बाद जसप्रीत को याद आया कि हत्या में इस्तेमाल किया गया फंदा कार में ही रह गया है। यह सुनकर अमृतपाल ने उसे तुरंत वापस जाकर फंदा निकालने को कहा। इसके बाद आरोपी फिर से पार्किंग में पहुंचे, कार निकाली और फंदा निकालकर सुबह करीब साढ़े 5 बजे दोबारा कार पार्क कर दी। पुलिस जांच में सामने आया कि अमृतपाल हत्या के अगले ही दिन यानी 9 जून की सुबह करीब 9:15 बजे अमृतसर एयरपोर्ट से UAE फरार हो गया था। बाद में पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया और उसकी ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली, जिससे यह खुलासा हुआ।
कौन है अमृतपाल सिंह मेहरों
जांच में यह भी सामने आया कि अमृतपाल सिंह मेहरों मूल रूप से मोगा का रहने वाला है और उसका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। बाद में वह सिख धर्म से प्रभावित होकर निहंग बन गया। उसने 12वीं तक पढ़ाई की और 2014 में आईटीआई मोगा से डीजल मैकेनिक्स में डिप्लोमा किया।
वर्ष 2022 में उसने शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) की टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन उसे केवल 6,363 वोट मिले और उसकी जमानत जब्त हो गई। उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उसके पिता बलजिंदर सिंह ने अमृत ग्रहण किया था और ग्रंथी के रूप में सेवा की थी, जबकि उसके अन्य रिश्तेदार मुस्लिम नामों से जुड़े हुए हैं।

पुलिस की आगे की कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी सहित कुल पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। फिलहाल अमृतपाल सिंह मेहरों से गहन पूछताछ की जा रही है, जिससे इस हत्याकांड के पीछे की पूरी साजिश, मकसद और अन्य संभावित कड़ियों का खुलासा हो सके।
पंजाब पुलिस का कहना है कि इस केस में हर पहलू की गहराई से जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के तहत सख्त सजा दिलाई जाएगी। यह मामला न केवल एक सुनियोजित हत्या का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह सोशल मीडिया से जुड़ी पहचान भी कभी-कभी अपराधियों के निशाने पर आ सकती है।









