डेली संवाद, मोहाली। Punjab News: पंजाब में फर्जी पत्रकार और फर्जी RTI एक्टिविस्ट व एक ठेकेदार के खिलाफ पुलिस ने ब्लैकमेलिंग का केस दर्ज किया है। आरोप है कि एक ठेकेदार के साथ मिलकर फर्जी पत्रकार एक कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक से 1.20 करोड़ रुपए मांग रहे थे। पुलिस ने शिकायत के बाद कई दिनों तक जांच की, इसके बाद फर्जी पत्रकार और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआऱ दर्ज कर लिया।
जानकारी के मुताबिक पंजाब (Punjab) के मोहाली (Mohali) के आईटी सिटी चौक (IT City) से कुराली बाईपास रिंग रोड निर्माण परियोजना से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक निर्माण कंपनी से कथित तौर पर 1.20 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की मांग की गई। यह आरोप आरटीआई और शिकायतों की आड़ में ब्लैकमेलिंग करने से जुड़ा है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद इस मामले में साजिश के संकेत मिलने पर दो आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिक से मांगा रूपया
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बठिंडा (Bathinda) निवासी अशोक कुमार बंसल ने डीआईजी रूपनगर (DIG Rupnagar) रेंज को शिकायत दी थी। उन्होंने बताया कि उनकी फर्म ‘प्रेम कुमार बंसल प्रोजेक्ट्स एलएलपी’ को आईटी सिटी चौक से कुराली बाईपास रिंग रोड निर्माण का ठेका मिला हुआ है। इस परियोजना का कैंप ऑफिस खरड़ में स्थित है।
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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि रूपनगर के गांधी नगर निवासी कमलजीत सिंह, जो खुद को पत्रकार बताता है, परियोजना से संबंधित जानकारी आरटीआई के माध्यम से जुटा रहा था। इसके बाद वह विभिन्न सरकारी विभागों में शिकायतें भेजकर दबाव बनाने का प्रयास कर रहा था। बंसल के अनुसार, 9 दिसंबर 2025 को रूपनगर के एक होटल में हुई मुलाकात के दौरान कमलजीत सिंह ने शिकायतें वापस लेने के बदले पैसों की मांग की। साथ ही, पैसे न देने की स्थिति में मामले को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की धमकी भी दी गई।

ठेकेदार के खिलाफ भी केस
इसके अगले दिन एक और घटनाक्रम सामने आया, जिसमें सड़क निर्माण में मिट्टी डालने का काम कर रहे ठेकेदार सुमित सिंगला ने एक अन्य व्यक्ति के मोबाइल से व्हाट्सएप कॉल कर लगभग 1.20 करोड़ रुपये की कथित बकाया राशि का हिसाब भेजा। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह दावा पूरी तरह से गलत और निराधार था, क्योंकि सिंगला के साथ किए गए कार्य का भुगतान पहले ही किया जा चुका था।
मामले की जांच डीएसपी खरड़-1 द्वारा की गई। जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों से यह सामने आया कि दोनों आरोपियों के बीच लगातार संपर्क था। पुलिस के अनुसार, सुमित सिंगला परियोजना से जुड़ी आंतरिक जानकारी कमलजीत सिंह को उपलब्ध कराता था, जिसका उपयोग कथित रूप से दबाव बनाने और पैसे की मांग करने के लिए किया गया।
पुलिस जांच में खुलासा
लंबी जांच के बाद पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त करना कानूनी है, लेकिन उसका दुरुपयोग कर ब्लैकमेल करना अपराध की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर कमलजीत सिंह और सुमित सिंगला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे और खुलासे हो सकते हैं।








