डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: पंजाब के जालंधर में विदेश भेजने के नाम पर ठगी का नया मामला सामने आया है। जालंधर बस स्टैंड के पास स्थित टूर एंड ट्रैवल दफ्तर के बाहर शुक्रवार को पीड़ितों ने जमकर हंगामा किया। लोगों ने ट्रैवल एजेंट पर लाखों रुपए लेने के बावजूद विदेश न भेजने और पैसे वापस मांगने पर धमकियां देने के गंभीर आरोप लगाए।
मामले की सूचना मिलते ही जालंधर (Jalandhar) बस अड्डा पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। जानकारी के अनुसार मनवीर बावा, सपना और शालिनी नामक पीड़ितों ने आरोप लगाया कि ट्रैवल एजेंट ने विदेश भेजने और वर्क परमिट दिलाने के नाम पर उनसे करीब 7 लाख रुपए लिए थे।
एजैंट ने दी धमकी
आरोप है कि लंबे समय तक उन्हें झूठे आश्वासन दिए जाते रहे, लेकिन न तो विदेश भेजा गया और न ही पैसे वापस किए गए। पीड़ितों का कहना है कि जब उन्होंने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए तो एजेंट द्वारा उन्हें धमकियां दी जाने लगीं। हंगामे की सूचना मिलते ही बस स्टैंड पुलिस चौकी इंचार्ज गुरविंदर सिंह पुलिस टीम सहित मौके पर पहुंचे।
यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
हालांकि पुलिस के पहुंचने से पहले ही ट्रैवल एजेंट दफ्तर से फरार हो गए। इसके बाद पुलिस ने दफ्तर को ताला लगाकर दोनों पक्षों को जांच के लिए थाने बुलाया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और यदि ठगी की पुष्टि होती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
5 लाख रुपए दिए
पीड़ित मनवीर बावा ने बताया कि उन्होंने नीदरलैंड भेजने के नाम पर करीब 5 लाख रुपए दिए थे। उनका आरोप है कि पहले एजेंट ने छह महीने तक काम जल्द होने का भरोसा दिलाकर समय निकाला और बाद में मामला लक्जमबर्ग का बताने लगी। इस दौरान एजेंट ने उन्हें एक ऑफर लेटर भी दिया, लेकिन जांच करवाने पर वह फर्जी निकला। मनवीर ने बताया कि उन्होंने पैसे नकद और चेक दोनों माध्यमों से दिए थे।
वहीं सपना नामक पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे विदेश भेजने के लिए फर्जी वर्क परमिट और फर्जी वीएफएस अपॉइंटमेंट दी गई। सपना ने बताया कि उसने इस काम के लिए करीब 2 लाख रुपए दिए थे, जिसमें से 1 लाख रुपए एजेंट पहले ही ले चुकी थी। एजेंट ने उसे चंडीगढ़ स्थित वीजा फैसिलिटेशन सर्विसेज (VFS) की अपॉइंटमेंट भी दिलवाई थी।
अपॉइंटमेंट फर्जी
सपना ने बताया कि बाद में मैसेज और ईमेल भेजकर कहा गया कि युद्ध की वजह से अपॉइंटमेंट रद्द हो गई है। जब वह खुद VFS सेंटर पहुंची तो वहां अधिकारियों ने बताया कि उसके दस्तावेज और अपॉइंटमेंट दोनों फर्जी हैं।
पीड़ितों का कहना है कि एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद एजेंट न तो पैसे लौटा रही है और न ही कोई स्पष्ट जवाब दे रही है। आरोप है कि अब एजेंट बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल की तस्वीरें भेजती है और कानूनी कार्रवाई की धमकियां देती है।
कमिश्नर से शिकायत
पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने पहले भी पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायत दी थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण मजबूर होकर उन्हें ट्रैवल दफ्तर के बाहर धरना देना पड़ा। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।










