डेली संवाद, गुरदासपुर। Punjab PCS Officer Anupreet Kaur Randhawa Arrested: पंजाब से बड़ी खबर सामने आ रही है। खबर है कि पीसीएस (PCS) अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा (Anupreet Kaur Randhawa) को शुक्रवार सुबह गुरदासपुर स्थित उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी पट्टी (तरनतारन) पुलिस द्वारा की गई।

पंजाब (Punjab) की पीसीएस अधिकारी अनुप्रीत कौर रंधावा पर जम्मू-कश्मीर-राजस्थान नेशनल हाईवे परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में कथित गबन और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है। पुलिस के अनुसार, यह मामला करीब 1 करोड़ 63 लाख रुपए के कथित घोटाले से जुड़ा हुआ है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

SDM के पद पर तैनात

जानकारी के मुताबिक, यह मामला उस समय का है जब अनुप्रीत कौर रंधावा तरनतारन में SDM के पद पर तैनात थीं। आरोप है कि नेशनल हाईवे-54 के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के दौरान उन्होंने ऐसे लोगों को मुआवजा राशि जारी करवाई, जिनके नाम भूमि रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं थे और जिनकी जमीन अधिग्रहण में शामिल नहीं थी।

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मामले की शुरुआत तत्कालीन पट्टी SDM नवराज सिंह बराड़ (Navraj Singh Brar) की शिकायत से हुई थी। उन्होंने 5 सितंबर 2018 को तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर प्रदीप सभ्रवाल (Pradeep Sabharwal) को इस कथित गड़बड़ी की जानकारी दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 9 जनवरी 2018 से 11 फरवरी 2019 के बीच सरकार की ओर से जारी 1.63 करोड़ रुपए की राशि पांच अपात्र लोगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई।

इन लोगों ने किया फ्राड

जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए उनमें जसबीर कौर, राजविंदर कौर, सरताज सिंह, बिक्रमजीत सिंह और गुरजीत कौर शामिल हैं। पुलिस जांच और माल विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, इन लोगों की कोई जमीन नेशनल हाईवे-54 के लिए अधिग्रहित नहीं की गई थी। इतना ही नहीं, भूमि अधिग्रहण से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन में भी इनके नाम शामिल नहीं थे।

FIR में उल्लेख किया गया है कि केंद्र सरकार ने 5 जुलाई 2013 को गजट नोटिफिकेशन जारी कर पट्टी सब-डिवीजन के छह गांवों — ततला, हरिके, नत्थूपुर, बूह, मरहाना और जौनेके — की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। जांच में पाया गया कि जिन पांच लोगों को मुआवजा राशि दी गई, उनके नाम इस सूची में नहीं थे।

सरकारी खजाने को भारी नुकसान

पुलिस के अनुसार, बैंक खातों की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित भुगतान तत्कालीन SDM अनुप्रीत कौर रंधावा के हस्ताक्षरों के बाद जारी किए गए थे। आरोप है कि बिना उचित सत्यापन और माल विभाग के रिकॉर्ड की पुष्टि किए सरकारी धन जारी किया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा।

इस मामले में थाना सिटी पट्टी में 5 सितंबर 2019 को IPC की धारा 419, 420, 409 और 120B के तहत FIR दर्ज की गई थी। बाद में जिला प्रशासन ने DC की अध्यक्षता में एक विशेष जांच कमेटी बनाई। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी गई, जिसके बाद तत्कालीन पंजाब चीफ सेक्रेटरी Karan Avtar Singh ने अनुप्रीत कौर को निलंबित करने के आदेश दिए थे।

कई खुलासे होंगे

अब पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।

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