डेली संवाद, लखनऊ। ED Raid News Update: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लखनऊ ज़ोनल कार्यालय ने 23 फरवरी 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत माननीय विशेष न्यायाधीश, सीबीआई/ईडी, न्यायालय संख्या–2, लखनऊ के समक्ष एक महत्वपूर्ण अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह शिकायत पूर्व विधायक आरिफ अनवर हाशमी (उतरौला, बलरामपुर) और उनकी पत्नी रोज़ी सलमा के विरुद्ध अवैध अतिक्रमण, जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश से जुड़े गंभीर आरोपों के संबंध में दायर की गई है।
ईडी (ED) द्वारा दायर अभियोजन शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपितों ने कथित रूप से अवैध तरीकों से संपत्तियों पर कब्जा किया और दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी व निजी भूमि पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास किया। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के तत्व भी पाए गए हैं, जिसके आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत कार्रवाई की गई।

एफआईआर के बाद जांच शुरू
सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई राज्य पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) के आधार पर शुरू की गई थी। मूल मामले में जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल थे। ईडी (ED) ने इन्हीं आरोपों को आधार बनाते हुए धन शोधन के पहलुओं की जांच प्रारंभ की। जांच के दौरान बैंक खातों, संपत्तियों के दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की गहन पड़ताल की गई।
यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
ईडी (ED) का कहना है कि जांच में यह सामने आया कि कथित अवैध गतिविधियों से अर्जित धन को वैध दिखाने के लिए विभिन्न माध्यमों का उपयोग किया गया। आरोप है कि संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और निवेश के जरिए धन को सफेद करने का प्रयास किया गया। एजेंसी ने इस मामले में संबंधित संपत्तियों और बैंक खातों का विवरण भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है।

उतरौला से विधायक रह चुके हैं
आरिफ अनवर हाशमी (Arif Anwar Hashmi), जो उत्तर प्रदेश के बलरामपुर (Balrampur) जिले के उतरौला विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं, पर पहले भी विवादों में रहने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इस मामले में अभी तक न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध नहीं किया गया है और अभियुक्तों को कानून के तहत अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।
विशेष न्यायाधीश, सीबीआई/ईडी, न्यायालय संख्या–2, लखनऊ ने अभियोजन शिकायत पर संज्ञान लेने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। न्यायालय अब उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों की समीक्षा के बाद आगे की कार्यवाही तय करेगा। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो पीएमएलए के तहत कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें कारावास और जुर्माना शामिल हो सकता है।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि इसमें एक पूर्व जनप्रतिनिधि का नाम शामिल है। वहीं, ईडी की इस कार्रवाई को राज्य में अवैध अतिक्रमण और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।
इस बीच, आरिफ अनवर हाशमी और उनकी पत्नी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। माना जा रहा है कि वे अदालत में अपने बचाव में विस्तृत पक्ष रख सकते हैं।
यह मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आगामी सुनवाई में कई महत्वपूर्ण तथ्यों के सामने आने की संभावना है। ईडी की यह कार्रवाई प्रदेश में वित्तीय अपराधों पर नकेल कसने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।







