डेली संवाद, नई दिल्ली। Narendra Modi West Asia Conflic Lok Sabha Speech: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध जैसे हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने पहली बार संसद में विस्तार से देश का रुख स्पष्ट किया। लोकसभा में करीब 25 मिनट के अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इस संघर्ष का असर केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है। ऐसे में भारत को सतर्क, तैयार और एकजुट रहने की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि दुनिया इस समय अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है और युद्ध के कारण सप्लाई चेन, ऊर्जा संसाधनों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। उन्होंने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि जैसे भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान धैर्य और एकजुटता के साथ चुनौतियों का सामना किया था, वैसे ही इस संकट से निपटने के लिए भी संयम और एकता की जरूरत है।

गैस की कोई कमी न हो
ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि सरकार ने समय रहते कदम उठाए हैं ताकि देश में तेल और गैस की कोई कमी न हो। उन्होंने बताया कि पहले भारत 27 देशों से तेल आयात करता था, जिसे बढ़ाकर अब 41 देशों तक कर दिया गया है। इसके साथ ही भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार मौजूद है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने की दिशा में काम चल रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार हर स्तर पर निगरानी कर रही है ताकि ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो।
यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीयों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इनमें से करीब एक हजार लोग ईरान से लौटे हैं, जिनमें 700 से अधिक मेडिकल छात्र शामिल हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि संकट की इस घड़ी में सरकार हर भारतीय तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत शांति का पक्षधर
विदेश नीति और कूटनीति पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री (Narendra Modi) ने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है और सभी देशों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील करता रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिकों और महत्वपूर्ण ढांचों जैसे पावर प्लांट पर हमले स्वीकार्य नहीं हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों को बाधित करना भी अस्वीकार्य है, क्योंकि इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी (Narendra Modi) ने कहा कि भारत ने इस संकट के दौरान सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभाई है। उन्होंने पश्चिम एशिया के कई प्रमुख नेताओं से बातचीत कर तनाव कम करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

पर्याप्त अन्न भंडार उपलब्ध
खाद्य सुरक्षा पर बोलते हुए प्रधानमंत्री (Narendra Modi) ने भरोसा दिलाया कि देश में पर्याप्त अन्न भंडार उपलब्ध है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां पूरी हैं। उन्होंने बताया कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत ने किसानों को सस्ती दरों पर उर्वरक उपलब्ध कराए और सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साथ लगातार संवाद किया।
बिजली आपूर्ति को लेकर उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए देश में बिजली की मांग बढ़ने वाली है, लेकिन पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला भंडार मौजूद है। उन्होंने कहा कि उत्पादन से लेकर वितरण तक हर स्तर पर निगरानी की जा रही है ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
सतर्क और संगठित
अंत में प्रधानमंत्री (Narendra Modi) ने कहा कि यह समय घबराने का नहीं, बल्कि सतर्क और संगठित रहने का है। भारत की ताकत उसकी एकता, धैर्य और सामूहिक संकल्प में है। उन्होंने विश्वास जताया कि देश इन चुनौतियों का मजबूती से सामना करेगा और वैश्विक स्तर पर अपनी जिम्मेदार भूमिका निभाता रहेगा।







