डेली संवाद, जालंधर/लुधियाना। Punjab ED Raid in Cabinet Minister Sanjeev Arora: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की सक्रियता खासी बढ़ गई है। जालंधर (Jalandhar) में एलपीयू के चांसलर अशोक मित्तल (Ashok Mittal LPU)के बाद अब ईडी ने पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के ठिकानों पर छापा मारा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा के आवास पर छापेमारी की। यह कार्रवाई शुक्रवार सुबह अचानक शुरू हुई, जिससे न सिर्फ स्थानीय प्रशासन बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई।
जानकारी के अनुसार, पंजाब (Punjab) में कई ठिकानों पर ईडी की टीम छापेमारी कर रही है। ईडी (ED) की टीम सुबह-सुबह ही मंत्री के निवास स्थान पर पहुंच गई और वहां मौजूद दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी। छापेमारी के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल को तैनात कर बाहरी लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई, ताकि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए।
वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन
सूत्रों के मुताबिक, यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और संदिग्ध लेन-देन से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है। बताया जा रहा है कि ईडी अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे लैपटॉप, मोबाइल फोन और हार्ड डिस्क की भी जांच की। हालांकि, एजेंसी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे जांच के दायरे और प्रकृति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।
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यहीं नहीं, जालंधर में भी ED की टीम ने आज सुबह पॉश इलाके जीटीबी नगर में भी छापेमारी की है। यह कार्रवाई कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़ा बताया जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने शुक्रवार सुबह जालंधर के जीटीबी नगर में दस्तक दी। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा पहले से ही इस मामले में जांच का सामना कर रहे हैं। इससे पहले भी उनके ठिकानों पर तलाशी ली जा चुकी है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
छापेमारी की खबर फैलते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। आम आदमी पार्टी ने इस कार्रवाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। उनका आरोप है कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है। AAP नेताओं का कहना है कि इस तरह की कार्रवाइयों का समय और तरीका कई बार संदेह पैदा करता है।
वहीं, भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रवर्तन निदेशालय जैसी जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और उनका उद्देश्य केवल कानून के दायरे में रहकर जांच करना है। यदि किसी के खिलाफ ठोस सबूत हैं, तो जांच होना स्वाभाविक है और इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप का कोई सवाल नहीं उठता।
खुलासे होने की संभावना
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संजीव अरोड़ा या उनके कार्यालय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इससे अटकलों का बाजार और भी गर्म हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में कोई ठोस तथ्य सामने आते हैं, तो इसका असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल, ईडी की टीम द्वारा की जा रही यह कार्रवाई जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या इससे जुड़े कोई बड़े तथ्य सामने आते हैं या नहीं।









