
डेली संवाद, संगरूर
शिरोमणी अकाली दल आज जेलमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा की तत्काल बर्खास्तगी की मांग करते हुए कहा है कि अमृतसर जेल तोड़ने की घटना की जांच उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान जज से करवाई जाए।
यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब की जेलों में हुई विभिन्न घटनाओं के बाद अमृतसर जेल तोड़ने की घटना ने लोगों का सरकार से विश्वास हिला दिया है।
[ads1]
उन्होने कहा कि इस घटना की एक स्वतंत्र जांच का आदेश देने के अलावा सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इसने जेलों में हुई बाकी ऐसी घटनाओं के मामले में क्या कार्रवाई की थी तथा जेल प्रशासन का बेड़ा क्यों गर्क हो चुका है?
पंजाब के संगरूर की एक जनसभा में जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को सुनने को हुजूम उमड़ा है, उसे देखकर लगता है कि मुख्यमंत्री @capt_amarinder के राज में सबकुछ ठीक नहीं है। @Akali_Dal_ @officeofssbadal @bsmajithia @gurpreetsbhasin @BJPPunjab @officialYAD #akalibjp pic.twitter.com/XQ3ApIFefo
— Mahabir Jaiswal (@mahabirjaiswal) February 2, 2020
जेलों की सुरक्षा जेलमंत्री की प्राथमिक जिम्मेदारी है
मुख्यमंत्री को सबसे उपर वाली कुर्सी की जवाबदेही तय करने के लिए कहते हुए डॉ. चीमा ने कहा कि इस घटना की जांच पूर्ण होने तक जेलमंत्री को तत्काल अपना इस्तीफा सौंपने के लिए कहा जाना चाहिए। उन्होने कहा कि जेलों की सुरक्षा जेलमंत्री की प्राथमिक जिम्मेदारी है। वह अपनी इस जिम्मेवारी से भाग नही सकता, खासतौर उस समय जब उसकी अपनी भूमिका के लिए पहले ही शक के दायरे में है।
[ads2]
मुख्यमंत्री द्वारा दिए इस घटना की न्यायिक जांच के आदेशों को रद्द करते हुए डॉ. चीमा ने कहा कि एक मजिस्ट्रेट इस मामले में न्याय नही कर सकेगा। उन्होने कहा कि मजिस्ट्रेट जेल की सुरक्षा कमजोर करने में जेल मंत्री की भूमिका के बारे जांच नही कर पाएगा।
उन्होने कहा कि इस घटना ने जेलों की सुरक्षा की पोल खोल दी है। इससे पहले लुधियाना केंद्रीय जेल में कैदियों की बगावत की घटना घटित हो चुकी है। इसके अलावा जेलों में कैदियों से मोबाईल फोन पकड़े जाना आम बात बन चुकी है, इसीलिए पंजाब की जेलों के कामकाज की स्वतंत्र जांच करवाई जाना आवश्यक है।










