Suagr Craving: डिनर के बाद मीठा खाने से क्या ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है, जाने

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डेली संवाद, नई दिल्ली। Suagr Craving: रात को खाने के बाद अक्सर हम कुछ मीठा खाना पसंद करते हैं। डिजर्ट में आईसक्रीम, मीठाई, चॉकलेट जैसी हम खूब से चाव से खाते हैं और यह प्रैक्टिस कई लोग फॉलो करते हैं। मीठा खाने की वजह से आपका मूड बेहतर होता है और आपको संतोष का अनुभव भी होता है।

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इसलिए खाने के बाद कई लोग मीठा खाना हेल्दी मानते हैं। हालांकि, कभी-कभी डिनर के बाद मीठा खाने से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन अगर यह आपकी रोज की आदत है, तो आपको इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ सकता है। लेकिन मीठा खाने से आपकी सेहत को क्या नुकसान हो सकते हैं। आइए जानते हैं रोज-रोज मीठा खाने की आदत आपके लिए क्यों हानिकारक हो सकता है।

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दरअसल, रात को डिनर के बाद मीठा खाना आपके ब्लड शुगर लेवल को बिगाड़ सकता है। इस वजह से, आपके मेटाबॉलिज्म से लेकर आपकी स्लीप साइकिल तक सब कुछ प्रभावित हो सकता है।

इस आदत की वजह से कई खतरनाक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है, जिनमें डायबिटीज और दिल की बीमारियां भी शामिल हैं। इसलिए यह डिनर के बाद रोज मीठा खाना हानिकारक हो सकता है।

डायबिटीज का खतरा

डिनर के बाद नियमित तौर से मीठा खाने की वजह से इंसुलिन रेजिस्टिविटी बढ़ सकती है। इस कारण से आपका ब्लड शुगर लेवल रेगुलेट नहीं हो पाता और डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज काफी खतरनाक बीमारी है, जिसकी वजह से आपके शरीर के कई अंग, जैसे दिल, आंखें, ब्लड वेसल्स, लिवर आदि प्रभावित हो सकते हैं।

दिल की बीमारियों का खतरा

मीठा खाने की वजह से आपके शरीर में ट्राई ग्लीसराइड लेवल बढ़ सकता है, जो आपके दिल की सेहत के लिए काफी हानिकारक हो सकता है। दरअसल, ट्राई-ग्लीसराइड एक प्रकार का फैट होता है, जो हमारे ब्लड में पाया जाता है। इसकी मात्रा बढ़ने की वजह से आपके ब्लड वेसल्स ब्लॉक होने का खतरा बढ़ जाता है, जो स्ट्रोक और हार्ट अटैक के रिस्क को बढ़ा सकता है।

स्लीप साइकिल बिगड़ना

मीठा खाने की वजह से आपके शरीर में एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। इस कारण से आपका ब्रेन काफी एक्टिव हो जाता है, जो आपकी स्लीप साइकिल को डिस्टर्ब कर सकता है। साथ ही, आप डीप स्लीप भी नहीं ले पाते हैं, जिस वजह से स्ट्रेस हार्मोन अधिक रिलीज हो सकता है। यह आगे चल कर कई बीमारियों की वजह बन सकता है।

एजिंग की प्रकिया तेज

शुगर की मात्रा ज्यादा होने की वजह से आपके शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन का रिस्क बढ़ जाता है। ये दोनों फैक्टर्स प्री मेच्योर एजिंग की वजह बन सकते हैं। इस कारण से फाइन लाइन्स, हार्मोनल इंबैलेंस जैसे नुकसान हो सकते हैं।



















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