डेली संवाद, जालंधर/मोहाली। Punjab News: पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) में किताबों की खरीद-फरोख्त से जुड़ा एक बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है, जिसने विभाग की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड के जालंधर और कपूरथला स्थित क्षेत्रीय बुक डिपो में वर्ष 2018 से 2022 के बीच करोड़ों रुपये की गड़बड़ियां पाई गईं। प्रारंभिक शिकायत, आंतरिक जांच और विस्तृत ऑडिट के बाद बोर्ड ने तीन कर्मचारियों को चार्जशीट जारी कर दी है।
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब पंजाब (Punjab) स्कूल शिक्षा बोर्ड के मैनेजर तजिंदर शर्मा ने किताबों की बिक्री और स्टॉक से संबंधित कई अनियमितताओं की शिकायत उच्च अधिकारियों को सौंपी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड ने मामले की प्रारंभिक जांच करवाई और फिर विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट के लिए बोर्ड ऑडिटर युद्धवीर सिंह चौहान को जिम्मेदारी सौंपी गई।

ऑडिट में करोड़ों की गड़बड़ी का खुलासा
ऑडिट रिपोर्ट ने विभागीय व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। रिपोर्ट में यह पाया गया कि बड़ी संख्या में पुस्तकों को ‘बेचा हुआ’ दिखाया गया था, लेकिन उनके बिल, रसीदें या भुगतान का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। कई मामलों में खातों में की गई लेजर प्रविष्टियां गलत पाई गईं, जिसके चलते स्टॉक की स्थिति वास्तविकता से बिल्कुल अलग दर्शाई गई।
ऑडिट के अनुसार— कई जगहों पर स्टॉक में माइनस बैलेंस दर्ज था, जो स्पष्ट रूप से अनियमितता का संकेत है। पुस्तकों की खरीद और बिक्री से जुड़े लेजर अकाउंट अपूर्ण मिले। चार वर्ष के रिकॉर्ड में बिलों, रसीदों और स्टॉक रजिस्टर में भारी अंतर पाया गया।
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कई प्रविष्टियाँ ऐसे थीं, जिन्हें बाद में ‘एडजस्ट’ करने की कोशिश की गई, लेकिन दस्तावेजों के अभाव ने इन्हें संदिग्ध बना दिया। रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया कि यदि इन अनियमितताओं को समय पर नहीं पकड़ा जाता, तो बोर्ड को करोड़ों का नुकसान हो सकता था।

रिटायर्ड जज ने की स्वतंत्र जांच
ऑडिट के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए बोर्ड ने इसकी जांच रिटायर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश परमिंदर पाल सिंह को सौंपी। उन्होंने दस्तावेजों, स्टॉक रिकॉर्ड, कर्मचारियों के बयान और वित्तीय लेनदेन की गहन समीक्षा की।
जांच में यह साबित हुआ कि डिपो में मौजूद तीन कर्मचारियों ने नियमों का पालन नहीं किया और कई अवसरों पर जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज की। इस आधार पर उन्होंने इन कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की अनुशंसा की।
तीन कर्मचारियों को चार्जशीट जारी
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद बोर्ड ने स्थानीय ऑडिट पूरा कर संबंधित कर्मचारियों को चार्जशीट जारी कर दी है। इन कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, जिसके बाद अंतिम कार्रवाई तय की जाएगी। बोर्ड चेयरमैन डॉ. अमर पाल सिंह ने पुष्टि की कि मामला अत्यंत गंभीर है और किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि “जांच में शामिल कर्मचारियों से जवाब मांगा गया है। उनके स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। बोर्ड में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता है।”

विभाग में उठे सवाल
इस वित्तीय घोटाले ने न सिर्फ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे कमजोर निगरानी और ढीली व्यवस्था भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
शिक्षा बोर्ड जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में किताबों की खरीद-फरोख्त में की गई यह अनियमितता सीधे तौर पर छात्रों और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल गड़बड़ी नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का संकेत है। यदि समय रहते सही ऑडिट और निगरानी की जाती, तो इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान को रोका जा सकता था।
भविष्य में क्या होगा?
शिक्षा विभाग और बोर्ड प्रशासन अब इस बात पर विचार कर रहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किस प्रकार की निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। सूत्रों के अनुसार, बोर्ड स्टॉक मैनेजमेंट और बुक डिपो मॉनिटरिंग के लिए नए डिजिटल सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिससे हर लेनदेन का रिकॉर्ड पारदर्शी और रियल-टाइम में उपलब्ध हो सके।
पीएसईबी में किताबों की खरीद-फरोख्त घोटाले का उजागर होना एक बड़ा प्रशासनिक झटका माना जा रहा है। विस्तृत जांच में सामने आई करोड़ों की गड़बड़ियों ने न सिर्फ विभागीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी साबित किया है कि शिक्षा प्रणाली की रीढ़ माने जाने वाले बोर्ड में सख्त और भरोसेमंद व्यवस्था की जरूरत है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि बोर्ड तीनों कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए कितनी सख्ती अपनाई जाती है।








