Wednesday, 04 March 2026
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Lucknow News: पैंट उतारकर लोको पायलट ने दिया पाइल्स सर्जरी का सबूत, फिर भी नहीं मिली छुट्टी, नग्न होने की Video वायरल
डेली संवाद, लखनऊ।
Lucknow News: लखनऊ (Lucknow) रेल मंडल में एक लोको पायलट को पाइल्स सर्जरी के बाद भी पर्याप्त आराम की छुट्टी न मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) और रेलवे कर्मचारियों के व्हाट्सएप (WhatsApp) समूहों में वायरल होने के बाद कर्मचारी संगठनों ने इसे अमानवीय व्यवहार करार देते हुए संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, लोको पायलट राजेश मीना ने 22 फरवरी को लखनऊ
(Lucknow)
में पाइल्स की सर्जरी कराई थी। उन्हें 22 से 28 फरवरी तक चिकित्सीय अवकाश दिया गया था। लेकिन घाव पूरी तरह से ठीक न होने के कारण उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत रेलवे हेल्थ यूनिट से अवकाश बढ़ाने का अनुरोध किया। यूनियन के अनुसार, जांच के बाद डॉक्टर ने छुट्टी बढ़ाने की आवश्यकता मानी और वरिष्ठ अधिकारियों से ‘सिक मेमो’ लाने को कहा।
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Indian Railway[/caption]
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छुट्टी देने से इनकार कर दिया
राजेश मीना (Rajesh Meena) ने पहले क्रू कंट्रोलर और बाद में चीफ क्रू कंट्रोलर (CCC) रतन कुमार से संपर्क किया। आरोप है कि उन्होंने अपने मेडिकल दस्तावेज, लैब रिपोर्ट और ड्रेसिंग भी अधिकारियों को दिखाए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अतिरिक्त छुट्टी देने से इनकार कर दिया गया।यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
यूनियन नेताओं का कहना है कि जब बार-बार अनुरोध के बावजूद राहत नहीं मिली तो मानसिक रूप से आहत और परेशान राजेश मीना ने अपने ऑपरेशन के घाव दिखाने के लिए वरिष्ठ अधिकारी के सामने कपड़े उतार दिए, ताकि वह अपनी वास्तविक स्थिति साबित कर सकें। इस दौरान किसी ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया।दफ्तर में उतार दी पैंट-चड्ढी, देखें VIDEO
रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश
इस घटना के सामने आने के बाद रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। All India Loco Running Staff Association (AILRSA) ने इसे कर्मचारियों की गरिमा के खिलाफ बताया है। संगठन के महासचिव के. सी. जेम्स ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक लोको पायलट को मेडिकल लीव के लिए इस हद तक जाना पड़ा। उन्होंने मांग की कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए। यूनियन का यह भी कहना है कि राजेश मीना अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं और उन्हें संवेदनशीलता के साथ राहत दी जानी चाहिए थी। बाद में एक यूनियन नेता के हस्तक्षेप के बाद उन्हें आराम के लिए अवकाश स्वीकृत किया गया। [caption id="attachment_73967" align="aligncenter" width="1200"]
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