डेली संवाद, लखनऊ।
Lucknow News: लखनऊ (Lucknow) रेल मंडल में एक लोको पायलट को पाइल्स सर्जरी के बाद भी पर्याप्त आराम की छुट्टी न मिलने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) और रेलवे कर्मचारियों के व्हाट्सएप (WhatsApp) समूहों में वायरल होने के बाद कर्मचारी संगठनों ने इसे अमानवीय व्यवहार करार देते हुए संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, लोको पायलट राजेश मीना ने 22 फरवरी को लखनऊ
(Lucknow)
में पाइल्स की सर्जरी कराई थी। उन्हें 22 से 28 फरवरी तक चिकित्सीय अवकाश दिया गया था। लेकिन घाव पूरी तरह से ठीक न होने के कारण उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत रेलवे हेल्थ यूनिट से अवकाश बढ़ाने का अनुरोध किया। यूनियन के अनुसार, जांच के बाद डॉक्टर ने छुट्टी बढ़ाने की आवश्यकता मानी और वरिष्ठ अधिकारियों से ‘सिक मेमो’ लाने को कहा।
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छुट्टी देने से इनकार कर दिया
राजेश मीना (Rajesh Meena) ने पहले क्रू कंट्रोलर और बाद में चीफ क्रू कंट्रोलर (CCC) रतन कुमार से संपर्क किया। आरोप है कि उन्होंने अपने मेडिकल दस्तावेज, लैब रिपोर्ट और ड्रेसिंग भी अधिकारियों को दिखाए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अतिरिक्त छुट्टी देने से इनकार कर दिया गया।
यूनियन नेताओं का कहना है कि जब बार-बार अनुरोध के बावजूद राहत नहीं मिली तो मानसिक रूप से आहत और परेशान राजेश मीना ने अपने ऑपरेशन के घाव दिखाने के लिए वरिष्ठ अधिकारी के सामने कपड़े उतार दिए, ताकि वह अपनी वास्तविक स्थिति साबित कर सकें। इस दौरान किसी ने घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया।
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रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश
इस घटना के सामने आने के बाद रेलवे कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। All India Loco Running Staff Association (AILRSA) ने इसे कर्मचारियों की गरिमा के खिलाफ बताया है। संगठन के महासचिव के. सी. जेम्स ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि एक लोको पायलट को मेडिकल लीव के लिए इस हद तक जाना पड़ा। उन्होंने मांग की कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
यूनियन का यह भी कहना है कि राजेश मीना अनुसूचित जनजाति समुदाय से आते हैं और उन्हें संवेदनशीलता के साथ राहत दी जानी चाहिए थी। बाद में एक यूनियन नेता के हस्तक्षेप के बाद उन्हें आराम के लिए अवकाश स्वीकृत किया गया।
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विभागीय स्तर पर चर्चा शुरू
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि Northern Railway के लखनऊ मंडल के डिविजनल रेलवे मैनेजर से संपर्क करने पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।
कर्मचारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। उनका कहना है कि रेलवे जैसे संवेदनशील विभाग में कार्यरत कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सम्मान की अनदेखी गंभीर चिंता का विषय है।
संवेदनशीलता पर सवाल
यह घटना न केवल प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए किस हद तक संघर्ष करना पड़ रहा है। फिलहाल रेलवे प्रशासन पर जवाबदेही तय करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने का दबाव बढ़ता जा रहा है।