डेली संवाद, जालंधर/नई दिल्ली। GST Scam in Punjab: पंजाब में ईडी, सीबीआई के बाद अब सैंट्रल जीएसटी (GST) भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। सैंट्रल जीएसटी ने पंजाब में 3000 करोड़ रुपए की जीसटी (GST) घोटाले का पर्दाफाश किया है। इसमें स्टेट जीएसटी के कुछ अफसर, कई शहरों के सीए और स्क्रैप कारोबारियों का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। इस घोटाले में मीडिया से जुड़े कुछ लोगों के नाम भी सामने आ रहे हैं। फिलहाल इस मामले में ईडी की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।
सैेट्रल जीएसटी (GST) से जुड़े अफसर बता रहे हैं कि इस मामले में 500 से ज्यादा फर्मों के नाम पर बिलिंग की गई है। ये फर्मे स्क्रैप या कबाड़ियों के थे। कई फर्में फर्जी निकली, जबकि कई कुछ महीने में बंद हो गई। इसमें जालंधर, लुधियाना, पटियाला, अमृतसर, मंडी गोबिंदगढ के कुछ कारोबारी और चार्टड एकाउंटेंट शामिल हैं।
ईडी से दर्ज करवाई शिकायत
सूत्रों के मुताबिक इस मामले में ईडी के दिल्ली मुख्यालय में तैनात डिप्टी डायरेक्टर सूरज कुमार यादव की शिकायत पर लुधियाना के थाना जमालपुर में एफआईआर भी दर्ज की गई है। इसमें अमित कुमार, मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल, गुरदीप सिंह और बलवंत सिंह नामजद हैं। कई अज्ञात व्यक्तियों के साथ बैंक अधिकारियों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के नाम भी शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक फर्जी कंपनियों के जरिये कागजी लेन-देन दिखाकर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट लिया गया और बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर अवैध धन को वैध बनाया गया। मंडी गोबिंदगढ़ में फर्जी कंपनियों के जरिये जीएसटी चोरी का खेल लंबे समय से चल रहा था। इससे पहले भी जीएसटी विभाग, सीजीएसटी, सीबीआई जैसी एजेंसियां कार्रवाई कर चुकी हैं, लेकिन इस बार का नेटवर्क कहीं अधिक व्यापक और संगठित बताया जा रहा है।
स्क्रैप कारोबारियों का गैंग
जांच में सामने आया कि विभिन्न फर्जी कंपनियां केवल कागजों पर लेन-देन दिखाकर करोड़ों के बिल जारी कर रही थीं। वास्तविक रूप से कोई माल खरीदा या बेचा नहीं जा रहा था, लेकिन दस्तावेजों में बड़े स्तर पर व्यापार दर्शाकर बोगस आईटीसी का लाभ लिया जा रहा था। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ।
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केंद्र सरकार के बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स और जीएसटी इंटेलिजेंस के एडवांस डेटा टूल्स ने संदिग्ध लेन-देन का पैटर्न पकड़ा। करोड़ों रिकॉर्ड्स के विश्लेषण में सामने आया कि पंजाब की कई कंपनियां आपस में असामान्य मात्रा में लेन-देन कर रही हैं। अधिकतर मामलों में केवल बिलिंग हो रही थी, वास्तविक व्यापार का कोई प्रमाण नहीं था।
जांच में चौंकाने वाले तथ्य
जीएसटी रजिस्ट्रेशन, पैन और आधार से जुड़े दस्तावेजों की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। अलग-अलग नामों से चल रही कई कंपनियों में एक ही मोबाइल नंबर, एक ही ईमेल आईडी और एक ही दफ्तर का पता दर्ज मिला। इससे एजेंसियों को यकीन हो गया कि यह सुनियोजित फर्जीवाड़ा है।
ईडी की जांच में एक प्राइवेट बैंक के एपीएमसी खातों में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का ट्रांसफर मिला। आरोप है कि रकम जमा होने के बाद उसे कई खातों में घुमाया गया और फिर बड़ी नकदी निकालकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई। एपीएमसी खातों का इस्तेमाल इसलिए किया गया ताकि भारी लेन-देन सामान्य कृषि व्यापार जैसा लगे और तुरंत संदेह न हो।
ईडी की शिकायत पर पुलिस की जांच
ईडी के सहायक निदेशक सूरज कुमार यादव ने 19 जून 2026 को पंजाब पुलिस को विस्तृत शिकायत भेजी थी। शिकायत में इसे देश की वित्तीय प्रणाली पर हमला बताते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की गई। इसके बाद अभी तक बैंक अधिकारियों, सीए और अन्य लोगों की भूमिका की जांच हो रही है।
ईडी की जांच में लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, खन्ना, जालंधर, अमृतसर और पटियाला के कुछ कारोबारियों के नाम सामने आए हैं। खाते खंगाले जा रहे हैं और आने वाले दिनों में और खुलासे व गिरफ्तारियां संभव हैं।
जालंधर में 70 लाख लूट में भी हो सकती है जांच
जानकारी के मुताबिक जालंधर में पिछले महीने एक बड़े कारोबारी से 70 लाख रुपए की लूट हुई थी। पुलिस ने मामले को त्वरित एक्शन लेते हुए लुटेरे को पकड़ा और 70 लाख रुपए रिकवर कर कारोबारी के हवाले कर दिया। अब जीएसटी इसे अपने एंगल से जांच कर रही है। क्योंकि जिस कारोबारी से लूट हुई थी, उसका भी लोहे का बड़ा कोराबार है।
नोट - 3000 करोड़ के इस GST घोटाले में कौन-कौन से कारोबारी जांच के घेरे में हैं? जालंधर से क्या है इसका कनेक्शन और किन फर्मों के जरिए हुआ करोड़ों का लेन-देन? अगली खबर में सामने आएंगे इस पूरे नेटवर्क से जुड़े बड़े नाम और चौंकाने वाले तथ्य। )