Sunday, 11 October 2026
पंजाब
Punjab News: पंजाब में गर्भवती महिला की दर्दनाक मौत, डॉक्टर की उपलब्धता पर उठे सवाल
डेली संवाद, खन्ना/लुधियाना। Punjab News: पंजाब के खन्ना में सिविल अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां 7 महीने की गर्भवती 22 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका। परिजनों के अनुसार, शनिवार देर रात महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे सिविल अस्पताल खन्ना ले जाया गया था, जहां से गंभीर हालत में उसे पटियाला रेफर कर दिया गया।
हालांकि, रास्ते में या अस्पताल पहुंचने के दौरान महिला की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पर्याप्त पैसे नहीं थे। ऐसे में खन्ना की सामाजिक संस्थाओं ने आगे आकर परिवार की मदद की। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है।
गाजीपुर की रहने वाली थी 22 वर्षीय बेवी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका बेवी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की रहने वाली थी और अपने परिवार के साथ खन्ना के मिलिट्री ग्राउंड के पास झुग्गियों में रहती थी। वह सात महीने की गर्भवती थी।
बताया गया है कि शनिवार देर रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे तुरंत सिविल अस्पताल खन्ना लेकर पहुंचे। परिवार के मुताबिक, उस समय अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं थीं। महिला की गंभीर हालत को देखते हुए उसे पटियाला रेफर कर दिया गया।
समय पर विशेषज्ञ इलाज नहीं मिलने के आरोप
इस घटना के बाद अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों की ओर से सामने आई जानकारी के अनुसार, महिला को अस्पताल पहुंचाने के बाद विशेषज्ञ इलाज नहीं मिल सका और उसे दूसरे अस्पताल में रेफर करना पड़ा।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता या इलाज में किसी देरी का महिला की मौत से सीधा संबंध था या नहीं। इसकी पुष्टि के लिए मेडिकल रिकॉर्ड और मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी होगी।
मां के साथ गर्भ में पल रहे बच्चे की भी मौत
महिला की हालत गंभीर होने के कारण उसे पटियाला भेजा गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। उसके गर्भ में सात महीने का बच्चा भी था, जिसकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिवार गहरे सदमे में है। साथ ही, मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम नहीं कराए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पोस्टमार्टम नहीं होने की स्थिति में मौत के चिकित्सकीय कारणों की पुष्टि करना कठिन हो सकता है।
अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थे पैसे
बेवी का परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा है। महिला की मौत के बाद परिवार के सामने अंतिम संस्कार की व्यवस्था करना भी मुश्किल हो गया था। घटना की जानकारी मिलने पर खन्ना की सामाजिक संस्थाएं भाई कन्हैया सेवा सोसाइटी और नर सेवा नारायण सेवा मदद के लिए आगे आईं।
समाजसेवियों के सहयोग से रविवार सुबह खन्ना के श्मशान घाट में महिला का अंतिम संस्कार किया गया। इस दुखद घटना के बीच सामाजिक संस्थाओं की मदद से परिवार को अंतिम संस्कार की व्यवस्था करने में सहायता मिली।
अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही से किया इनकार
मामले में खन्ना के एसएमओ डॉ. मनिंदर सिंह भसीन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।वहीं, ड्यूटी पर तैनात इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) डॉ. चिराग ने बताया कि जब महिला को अस्पताल लाया गया था, तब उसका ऑक्सीजन लेवल काफी कम था।
डॉक्टर के मुताबिक, महिला को प्राथमिक उपचार दिया गया और एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। ऑन-कॉल गायनी डॉक्टर को भी सूचना दी गई थी। डॉ. चिराग के अनुसार, गायनी डॉक्टर के अस्पताल पहुंचने से पहले ही परिजन मरीज को लेकर एम्बुलेंस से निकल चुके थे। उन्होंने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही होने से इनकार किया।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी मौत की वजह
खन्ना में गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ बच्चे की मौत ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है।
मौत के कारणों और इलाज के दौरान हुई घटनाओं की स्पष्ट जानकारी मेडिकल रिकॉर्ड, संबंधित अधिकारियों की जांच और अन्य तथ्यों के सामने आने के बाद ही मिल सकेगी।