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Tuesday, 13 October 2026

Punjab News: पंजाब में ₹500 करोड़ की गड़बड़ी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, पहले से बनी सड़कों के दोबारा टेंडर पर सवाल

Punjab News: पंजाब में ₹500 करोड़ की गड़बड़ी का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, पहले से बनी सड़कों के दोबारा टेंडर पर सवाल

डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब में पहले से बनी सड़कों के दोबारा निर्माण के नाम पर करीब 500 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) जिन सड़कों का निर्माण पहले ही कर चुका था, उन्हीं सड़कों के लिए पंजाब मंडी बोर्ड ने दोबारा टेंडर जारी किए और कथित तौर पर भुगतान भी किया।

गुरदासपुर निवासी रणजीत सिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार सहित अन्य प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों की अभी न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में संबंधित पक्षों का जवाब और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

1. 10 मार्केट कमेटियों के काम मंडी बोर्ड को सौंपने पर सवाल

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद 10 मार्केट कमेटियों के तहत आने वाले सड़क निर्माण कार्य पंजाब मंडी बोर्ड को सौंप दिए गए।

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याचिकाकर्ता ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब संबंधित सड़कों का निर्माण पहले ही हो चुका था, तो उन्हीं कार्यों के लिए दोबारा टेंडर जारी करने और भुगतान करने की जरूरत क्यों पड़ी। याचिका के अनुसार, इस बदलाव के कारण सड़क निर्माण कार्यों और सरकारी धन के इस्तेमाल की जांच जरूरी है।

2. 2018 में तय व्यवस्था सितंबर 2026 में बदली गई

याचिका में 15 मार्च 2018 को तत्कालीन मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई शीर्ष समिति की बैठक का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता के मुताबिक, उस बैठक में लोक निर्माण विभाग और पंजाब मंडी बोर्ड के बीच ग्रामीण संपर्क सड़कों के निर्माण कार्यों के बंटवारे पर चर्चा हुई थी।

याचिका में दावा किया गया है कि उस समय मार्केट कमेटियों के आधार पर पहले से चली आ रही व्यवस्था जारी रखने की सिफारिश की गई थी। कई वर्षों तक इसी व्यवस्था के तहत काम होता रहा। इसके बाद सितंबर 2026 में 10 मार्केट कमेटियों के कार्य मंडी बोर्ड को सौंपने का निर्णय लिया गया। याचिकाकर्ता ने इस बदलाव की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए हैं।

3. मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद जारी हुए कार्यालय आदेश

याचिका के मुताबिक, 9 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद कार्यों के बंटवारे में बदलाव किया गया। इसके बाद 16 और 21 सितंबर को जारी कार्यालय आदेशों के माध्यम से काहनूवान और कलानौर समेत 10 मार्केट कमेटियों के काम पंजाब मंडी बोर्ड को सौंपे गए।

याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यह जांच की जाए कि बदलाव से पहले जरूरी प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियां ली गई थीं या नहीं। साथ ही, सड़क निर्माण कार्यों की आवश्यकता, लागत और पहले से किए गए निर्माण की स्थिति का भी परीक्षण किया जाए।

4. इंजीनियर इन चीफ की भूमिका की जांच की मांग

जनहित याचिका में पंजाब मंडी बोर्ड के इंजीनियर इन चीफ जतिंदर भंगू की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की गई है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि स्वतंत्र जांच के माध्यम से यह पता लगाया जाना चाहिए कि सड़क निर्माण से जुड़े टेंडर किस आधार पर जारी किए गए, भुगतान की प्रक्रिया कैसे पूरी हुई और कथित अनियमितताओं के लिए कौन जिम्मेदार है।

यह आरोपों का हिस्सा है और संबंधित अधिकारी की भूमिका को लेकर कोई निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।

5. जांच पूरी होने तक टेंडर और भुगतान रोकने की मांग

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की है कि मामले की जांच पूरी होने तक विवादित सड़क निर्माण कार्यों से जुड़े नए टेंडर जारी करने और भुगतान करने पर रोक लगाई जाए।

याचिका में आशंका जताई गई है कि यदि जांच के दौरान भी संबंधित कार्यों पर भुगतान जारी रहा, तो सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग को रोकना मुश्किल हो सकता है।

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और अन्य प्रतिवादी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब संबंधित पक्षों के जवाब और अदालत में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय होगी।

करीब 500 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े इस मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सड़क निर्माण कार्यों, टेंडर प्रक्रिया और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड में क्या तथ्य सामने आते हैं।