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Sunday, 18 October 2026

Punjab News: पंजाब में बड़ा हादसा, तेज रफ्तार कार ने कईयों को कुचला, 8 लोगों की मौत, इलाके में मचा कोहराम

Punjab News: पंजाब में बड़ा हादसा, तेज रफ्तार कार ने कईयों को कुचला, 8 लोगों की मौत, इलाके में मचा कोहराम

डेली संवाद, संगरूर। Punjab News: पंजाब के संगरूर जिले में लहरागागा-जाखल रोड पर रविवार दोपहर मनरेगा मजदूरों के साथ हुए भीषण सड़क हादसे ने प्रशासनिक व्यवस्था और मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क किनारे काम कर रहे वीबी जीरामजी (मनरेगा) मजदूरों को एक कार ने टक्कर मार दी।

हादसे में 8 मजदूरों की मौत होने का दावा किया गया है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, मृतकों और घायलों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। हादसे के बाद मजदूर संगठनों और ग्रामीणों में भारी रोष फैल गया।

उन्होंने घटनास्थल के पास जाखल रोड पर धरना देकर सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मजदूरों से मुख्य सड़क के किनारे काम तो करवाया जा रहा था, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए थे।

सुरक्षा में लापरवाही के आरोप

मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान सड़क किनारे बैरिकेडिंग नहीं की गई थी। मजदूरों को रिफ्लेक्टिव जैकेट जैसे सुरक्षा उपकरण भी उपलब्ध नहीं करवाए गए थे। इसके अलावा, काम चलने की जानकारी देने वाला चेतावनी बोर्ड और यातायात को सावधान करने वाले जरूरी संकेत भी मौके पर नहीं लगाए गए थे।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, काम की निगरानी के लिए पंचायत विभाग, श्रम विभाग या सिविल प्रशासन का कोई अधिकारी अथवा कर्मचारी भी मौके पर मौजूद नहीं था। उनका कहना है कि यदि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए होते, तो हादसे को रोका जा सकता था।

जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के प्रतिनिधि बिक्कर सिंह हथोआ, मजदूर मुक्ति मोर्चा के नेता गोबिंद सिंह छाजली और गांव अलीशेर के ग्रामीणों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

एंबुलेंस पहुंचने में देरी का आरोप

हादसे के प्रत्यक्षदर्शी फैक्ट्री कर्मचारी हरविंदर सिंह उर्फ लवी ने बताया कि दुर्घटना की आवाज सुनकर वह सबसे पहले मौके पर पहुंचा। उसके अनुसार, कई महिला मजदूर घायल अवस्था में सड़क पर पड़ी थीं और दर्द से कराह रही थीं।

प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद ग्रामीणों और राहगीरों ने एंबुलेंस तथा पुलिस को फोन किया, लेकिन सहायता पहुंचने में काफी देरी हुई। उनके मुताबिक, एंबुलेंस करीब एक घंटे बाद घटनास्थल पर पहुंची।

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गांव अलीशेर के पंच अमृतपाल सिंह और हरप्रीत सिंह ने भी एंबुलेंस तथा चौकी पुलिस को सूचना देने के बावजूद समय पर सहायता नहीं मिलने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता मिलती, तो कुछ लोगों की जान बच सकती थी। हालांकि, समय पर उपचार मिलने से जान बच सकती थी या नहीं, इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बिना नहीं की जा सकती।

मौके से फरार हुआ कार चालक

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मजदूरों को टक्कर मारने वाली कार का चालक हादसे के बाद करीब 15 मिनट तक मौके पर रुका रहा। आरोप है कि पुलिस के पहुंचने पर वह वहां से फरार हो गया।

ग्रामीणों और मजदूर संगठनों ने कार चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। हादसे के कारणों और चालक की भूमिका की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

राहुल इंद्र सिद्धू ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात

हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्ठल के पुत्र राहुल इंद्र सिद्धू सिविल अस्पताल लहरागागा पहुंचे। उन्होंने घायलों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना।

राहुल इंद्र सिद्धू ने हादसे के लिए जिम्मेदार कार चालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग भी उठाई। उन्होंने मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं होने पर सवाल खड़े किए।

पहले हुए हादसे की भी दिलाई याद

मजदूर संगठनों ने इस दुर्घटना की तुलना सितंबर 2024 में सुनाम-पटियाला रोड पर गांव बिशनपुरा के पास हुए सड़क हादसे से की। उस घटना में भी सड़क किनारे काम कर रहे मनरेगा मजदूरों को एक बेकाबू ट्रक ने कुचल दिया था। संगठनों के मुताबिक, उस हादसे में चार से पांच मजदूर प्रभावित हुए थे।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पहले हुए हादसों के बावजूद सड़क किनारे काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए। उन्होंने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्पष्ट सुरक्षा नियम लागू करने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की।

डीसी ने दिए जांच और कार्रवाई के संकेत

संगरूर की डीसी पूनमदीप कौर ने कहा कि वीबी जीरामजी (मनरेगा) के तहत काम करवाने वाले संबंधित विभागों से रिपोर्ट मांगी जाएगी। उन्होंने कहा कि काम के दौरान निगरानी और सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अब इस मामले में संबंधित विभागों की रिपोर्ट, पुलिस जांच और हादसे से जुड़े अन्य तथ्यों पर नजर रहेगी। मजदूर संगठनों ने मांग की है कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए और भविष्य में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।