Punjab News: Hospital का बिल नहीं चुकाने पर शव को बंधक नहीं बना सकते अस्पताल: सांसद अरोड़ा

Daily Samvad
4 Min Read
WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

डेली संवाद, लुधियाना। Punjab News: आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद (राज्यसभा) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर पार्लियामेंट्री एडहॉक कमेटी सदस्य संजीव अरोड़ा ने जनता के बीच जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया है कि मरीजों के अधिकारों के चार्टर के अनुसार, लोगों को यह अधिकार है कि अगर किसी मृतक का अस्पताल का बिल नहीं चुकाया जाता है, तो भी अस्पताल द्वारा शव को बंधक नहीं बनाया जा सकता है।

आज यहां एक बयान में अरोड़ा ने कहा कि देश में यह अधिकार होने के बावजूद भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं सभी जिलों के प्रशासन को सलाह देता हूं कि नागरिकों को इस अधिकार के बारे में पता होना चाहिए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।”अरोड़ा ने कहा कि इस संबंध में एक प्रश्न हाल ही में हरियाणा के उनके सहयोगी कार्तिकेय शर्मा, सांसद (राज्यसभा) द्वारा हाल ही में हुए राज्यसभा सत्र में उठाया गया था।

ये भी पढ़ें: पंजाब के CM भगवंत मान को मार देंगे! पढ़ें आतंकी की बड़ी धमकी

जवाब में, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार ने जवाब दिया था कि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट, 2010 के अंतर्गत एक वैधानिक संस्था नेशनल कौंसिल फॉर क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स, द्वारा स्वीकृत द पेशेंट्स राइट्स चार्टर सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है। उक्त चार्टर के दिशा-निर्देशों के अनुसार, अस्पतालों द्वारा किसी भी कारण से किसी रोगी के मृत शरीर को देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

उपरोक्त चार्टर को अपनाने और लागू करने के लिए सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया है, ताकि क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स में सुचारू और सौहार्दपूर्ण वातावरण सुनिश्चित करते हुए रोगियों की शिकायतों और चिंताओं को दूर किया जा सके। राज्य/यूनियन टेरिटरी (यूटी) सरकारें अस्पतालों द्वारा शोषण की घटनाओं से मृतक के परिवार को बचाने के लिए उचित कदम उठाती है।

ये भी पढ़ें: जालंधर के ATP ने अवैध बेसमेंट का काम रुकवाया

अरोड़ा ने कहा कि वह सभी जिलों के प्रशासन से यह सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे कि चार्टर ऑफ़ पेशेंट्स राइट्स एंड रेस्पॉन्सिबिलिटीज़ (जैसा कि नेशनल कौंसिल फॉर क्लीनिकल एस्टाब्लिशमेंट्स द्वारा अप्रूव और 23 अगस्त 2021 को अपडेट किया गया है) सभी अस्पतालों में ठीक से प्रदर्शित किया जाए ताकि राज्य भर के अस्पतालों द्वारा मरीजों के अधिकार का कोई उल्लंघन न हो।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस संबंध में जन जागरूकता पैदा करने में हर तरह की मदद करने के लिए तैयार हैं। अरोड़ा ने कहा, “मरीज के शव को रोक लेना मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है।” पूछे जाने पर, लुधियाना के वकील और पंजाब के पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल, हरप्रीत संधू ने कहा कि एक अस्पताल में एक मृत शरीर को रोक कर रखना भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 340 के तहत गलत तरीके से बंधक बनाना परिभाषित होगा।

















Share This Article
Follow:
Daily Samvad एक विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट है, जहां हम देश-दुनिया, राजनीतिक विश्लेषण, प्रदेश, शिक्षा, बिज़नेस, मनोरंजन, खेल, स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र की ख़बरें सरल भाषा में आप तक पहुंचाते हैं। हमारा उद्देश्य है—जनता की आवाज़ बनकर निष्पक्ष पत्रकारिता को आगे बढ़ाना। डेली संवाद ऑनलाइन के महाबीर जायसवाल फाउंडर चीफ एडिटर हैं। वे राजनीति, अपराध, देश-दुनिया की खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीति की खबरों से की, जबकि उनके पास, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग से लेकर एडिटर तक 25 साल से अधिक पत्रकारिता का अनुभव है। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र शेखावत के Media Consultant भी रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद की यूनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन, बीए और एमए की डिग्री हासिल की है। संपर्क नंबर: +91-98881-90945 ईमेल: mmmmediahouse@gmail.com
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *