Nagar Nigam Tender Scam: नगर निगम में टेंडर घोटाला, अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरी गाज, वेतन भी रोका, पढ़ें सरकार का बड़ा फैसला

देहरादून नगर निगम (Nagar Nigam Dehradun) में विकास कार्यों की निविदाओं को लेकर उठे सवालों के बाद जांच पूरी हो गई है। जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Muskaan Dogra
4 Min Read
Nagar Nigam Tender Scam
Punjab Government
Highlights
  • सामने आई टेंडर प्रक्रिया की गड़बड़ियां
  • 9 विकास कार्यों को किया गया रद्द
  • लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई
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डेली संवाद, देहरादून। Nagar Nigam Tender Scam: नगर निगम में बड़ा टेंडर घोटाला सामने आया है जिसकी गाज अधिकारियों और कर्मचारियों पर गिरी है दरअसल नगर निगम में विकास कार्यों की निविदाओं को लेकर उठे सवालों के बाद जांच पूरी हो गई है।

मिली जानकारी के मुताबिक देहरादून नगर निगम (Nagar Nigam Dehradun) में विकास कार्यों की निविदाओं को लेकर उठे सवालों के बाद जांच पूरी हो गई है। जांच समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Nagar Nigam Dehradun
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विकास कार्यों को रद्द करने की सिफारिश

जांच में गड़बड़ी पाए जाने पर 9 विकास कार्यों को रद्द करने की सिफारिश की गई है। साथ ही लापरवाही और गलतियों के लिए कई अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इससे पहले शुरुआती जांच में ही 7 कार्यों में गड़बड़ी सामने आ गई थी, जिसके बाद निगम प्रशासन सख्त हो गया था।

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नगर निगम के इंजीनियरिंग विभाग द्वारा अलग-अलग वार्डों में सड़क, नाली और अन्य विकास कार्यों के लिए टेंडर निकाले गए थे। इन टेंडरों को लेकर शिकायतें मिलने पर 26 दिसंबर को जांच समिति बनाई गई। समिति ने अपनी रिपोर्ट 12 जनवरी को नगर आयुक्त नमामी बंसल को सौंपी।

Scam
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जांच के दौरान पांच टीमों ने मौके पर जाकर कामों की जांच की। कुल 261 प्रस्तावित कार्यों में से 252 सही पाए गए, जबकि 9 कार्यों में गंभीर खामियां मिलीं, जिन्हें रद्द करने की सिफारिश की गई।

कर्मचारियों को चेतावनी

नगर आयुक्त ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि वे ईमानदारी और पारदर्शिता से काम करें। भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

रद्द किए गए कार्यों में अमन विहार, ग्रीन व्यू रेजिडेंसी, चंद्रबनी, इंद्रा कॉलोनी, त्यागी रोड समेत कई इलाकों में सीसी सड़क, नाली, पुलिया और पुस्ता निर्माण के काम शामिल हैं।

जांच में पकड़ी गई त्रुटियां

  • क्रम संख्या एक से पांच तक के कार्य औचित्यपूर्ण नहीं पाए गए।
  • क्रम संख्या छह व सात में निविदा सूची में पुनरावृत्ति (डुप्लीकेसी) सामने आई।
  • क्रम संख्या आठ व नौ ऐसे कार्य थे, जिन्हें पहले ही अन्य विभागों की ओर से कराया जा चुका था, फिर भी उन्हें निगम की निविदा सूची में शामिल कर दिया गया।

अधिकारियों पर कार्रवाई

जांच के बाद कुछ इंजीनियरों को चेतावनी दी गई और उनके रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज की गई। दो इंजीनियरों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया गया। वहीं, लिपिक गौरी गुप्ता को लापरवाही के चलते उनके पद से हटाकर उप नगर आयुक्त कार्यालय से जोड़ दिया गया।

नगर निगम ने अब यह फैसला लिया है कि आगे से हर विकास कार्य के लिए इंजीनियरों को यह प्रमाण देना होगा कि वह काम जरूरी है और पहले किसी अन्य विभाग द्वारा नहीं किया गया है।

महापौर कोटे को लेकर विवाद

महापौर कोटे से होने वाले विकास कार्यों को लेकर पार्षदों ने भेदभाव का आरोप लगाया है। पार्षदों का कहना है कि कुछ वार्डों में 20–22 लाख रुपये के काम दिए गए हैं, जबकि कुछ में 70–80 लाख रुपये तक के कार्य शामिल हैं। वहीं शिकायतों के बाद नगर आयुक्त ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं और अधिशासी अभियंता को हटाया जा चुका है।

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मुस्कान डोगरा, डेली संवाद ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे क्राइम, राजनीति और लोकल खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। वह 4 सालों से अधिक समय से Daily Samvad (Digital) में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत डेली संवाद से की। उन्होंने हरियाणा के महर्षि दयानंद युनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन की डिग्री हासिल की है।
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