डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar Kidney Racket: जालंधर के चर्चित Kidney Racket की कड़ियां जिस तरह से खुल रही हैं, वैसे वैसे इसमें शामिल और इसके दोषियों को बचाने वाले लोग हाथ पीछे खींच रहे हैं, चाहे वो पुलिस वाले हों, या फिर नेता। कारण साफ़ है -पंजाब सरकार चुनाव के चलते कोई रिस्क नहीं ले रही। करप्शन में लिप्त लोगों को, अफसरों को सिस्टम से बाहर किया जा रहा।
अब इस केस की सुनवाई 1 मई को तय की गई है। इसमें पब्लिक प्रॉसिक्यूशन ने अर्जी दे रखी है कि गवाही फिर से शुरू करवाई जाये। 2015 में किडनी रैकेट के खुलने पर डॉक्टर राजेश अग्रवाल, संजय मित्तल, सुमन मित्तल समेत कई अन्य अन्य डॉक्टर/ प्रबंधक पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट की कई धाराओं के तहत केस दर्ज हुआ था। जांच में पता चला था कि बिना मंजूरी लोगों की किडनियां निकालीं गईं और ट्रांसप्लांट की गईं।
गवाही के लिए नहीं बुलाया
पंजाब सरकार (Punjab Govt) के DRME विभाग के सुपरिंटेंडेंट सौदागर चंद ने लिखित बयान भी दिया था कि कौन- कौन दोषी है और जब भी जरुरत होगी वो कोर्ट आकर सब कुछ बताने को तैयार है। लेकिन सिस्टम की लापरवाही देखिए आज 11 साल बीत जाने के बाद भी वो व्यक्ति गवाही के लिए नहीं बुलाया गया। आरोपी डॉ राजेश अग्रवाल किस कागज या आर्डर के आधार पर ‘रेगुलर बेल’ का ढिंढोरा पीट रहा उसके बारे सरकारी वकील भी जानना चाहता है।
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अब आरोपी डॉक्टर को रेगुलर बेल पर भी विवाद है। हैरानी की बात यह है कि आरोपी डॉक्टर राजेश अग्रवाल को वकील कपिल सिब्बल की जिरह पर ‘रेगुलर बेल’ मिल जाती है। जबकि 10.8.2016 के आर्डर में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है।




राजेश अग्रवाल को ज़मानत नहीं दी
इस केस की पीडि़तों के वकील के मुताबिक अहलमद ने ट्रायल कोर्ट में 15.2.2021 को लिखित बयान दिया कि 10.8.2016 को ट्रायल कोर्ट ने डॉ. राजेश अग्रवाल को कोई रेगुलर बेल नहीं दी। ऑर्डर में साफ-साफ लिखा कि हाज़री के आदेश को, या जो भी बांड भराये गए हैं, का मतलब ये बिलकुल न समझा जाये कि इस अदालत ने डॉ राजेश अग्रवाल को कोई बेल दी है।
बल्कि किडनी कांड में जमानत का अंतिम आदेश वही माना जायेगा जो हाई कोर्ट में चल रही एप्लीकेशन (CRM-M-40893 , 2025) में आएगा। हाई कोर्ट ने जमानत की अर्जी को ‘जनहित को सर्वोपरि’ रखते हुए 16-08-2016 को ख़ारिज कर दिया। इस फैसले का सीधा अर्थ है कि इस डिस्मिसल के बाद इससे पहले किसी भी तरह की अंतरिम या हाज़री का फैसला खुद-ब-खुद खत्म हो जाते हैं। इसमें 10.8.2016 का आर्डर भी था।
राजेश अग्रवाल को रेगुलर बेल दे दी थी
इसके बाद आरोपी डॉक्टर राजेश अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 10.8.2016 को ट्रायल कोर्ट ने राजेश अग्रवाल को रेगुलर बेल दे दी थी तो हाईकोर्ट में (CRM-M-40893 , 2025) में ख़ारिज की गई जमानत का कोई अर्थ नहीं रह जाता।











