डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Singh Mann) ने ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ सदन में पेश किया। इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, खासकर मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के बीच।
पंजाब (Punjab) विधानसभा में विधेयक पेश होने के बाद तीन तख्तों से जुड़े क्षेत्रों के विधायकों को अपने विचार रखने का अवसर दिया गया। चर्चा के दौरान प्रताप सिंह बाजवा (Partap Singh Bajwa) ने कहा कि उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करती है, लेकिन उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर गठित कमेटी की रिपोर्ट सदन में पेश की जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि रिपोर्ट को सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

नकोदर कांड की जांच भी
इस पर विधानसभा के स्पीकर ने स्पष्ट किया कि कमेटी अपनी रिपोर्ट समय पर सदन में पेश करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि नकोदर कांड की जांच भी यही कमेटी करेगी। हालांकि, बाजवा ने सरकार को घेरते हुए कहा कि पहले भी बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले कहा था कि 48 घंटे में दोषियों को जेल भेजा जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
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बहस के दौरान प्रताप सिंह बाजवा ने यह भी कहा कि पहले के मामलों में कई केस शहर से बाहर ट्रांसफर कर दिए गए और सरकार ने इसका विरोध नहीं किया। उन्होंने पूर्व अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह (Kunwar Vijay Pratap Singh) का जिक्र करते हुए कहा कि वह कभी सरकार के पोस्टर बॉय थे, लेकिन अब पार्टी से बाहर हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह बड़े दिल का परिचय देते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करें।
विपक्ष पर पलटवार
इस पर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) ने कड़ा जवाब देते हुए विपक्ष पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि किसे मंत्री बनाना है या नहीं, यह सरकार का आंतरिक मामला है। उन्होंने बाजवा पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें राजनीतिक शिष्टाचार का ध्यान रखना चाहिए। मान ने यह भी कहा कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि सख्त कानून बनाने का है।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) ने आगे कहा कि उनकी सरकार इस तरह के कानून को पांचवीं बार लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि इस बार विधेयक को मजबूत बनाने के लिए कानूनी विशेषज्ञों से सलाह ली गई है, ताकि पहले की तरह कोई तकनीकी कमी न रह जाए।
कांग्रेस-SAD सरकार में कोई कार्रवाई नहीं हुई
वित्तमंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि1986 में नकोदर में चार सिख नौजवान शहीद हुए थे। उन्हें पुलिस ने गोलियां मारी थी। पांच पावन स्वरूपों को अग्नि भेंट किया गया। इस मामले में जस्टिस गुरनाम सिंह कमीशन गठित किया गया। लेकिन रिपोर्ट के एक हिस्से की रिपोर्ट तो मिल गई। जबकि दूसरे के हिस्से की रिपोर्ट नहीं मिली है। हमारे सामने साथी बैठे हैं, उनके पिता भी सरकार में मंत्री थे।

1997 से लेकर 2002 तक शिरोमणि अकाली दल की सरकार रही। लेकिन कुछ नहीं किया। लेकिन उस समय की सरकार ने कुछ नहीं गया। 2007 तक कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया। 2007 से 2017 तक शिरोमणि अकाली दल में कुछ नहीं हुआ। आज उनका एक मेंबर नहीं मौजूद हुआ। उन्हें आना चाहिए था। 2015 में बेअदबी की घटनाएं हुई। हमारी सरकार ने कितने लोगों के चालान पेश किए।
बादल-सैनी बेल पर हैं – स्पीकर
विधानसभा स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने कहा कि सुखबीर बादल, पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी, अमर सिंह चहल, चरणजीत सिंह शर्मा, सुखमिंदर सिंह मान यह सारे बेअदबी कांड के आरोपी हैं। मान सरकार ने इनके खिलाफ चालान पेश किया। यह सारे बेल पर हैं। स्वर्गीय मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल इस दुनिया में नहीं है। लेकिन वह भी बेल पर थे।
उम्रकैद की सजा और 25 लाख का जुर्माना
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति बेअदबी का दोषी पाया जाता है, तो उसे अधिकतम उम्रकैद की सजा और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। विधेयक पास होने के बाद इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
गौरतलब है कि पंजाब (Punjab) में पिछले कुछ वर्षों से बेअदबी की घटनाओं को लेकर लगातार विवाद रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पहले भी अप्रैल 2025 में ‘पंजाब पवित्र ग्रंथों के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम विधेयक’ पेश किया था, जिसे बाद में सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया था। अब संशोधित विधेयक के जरिए सरकार इस मुद्दे पर सख्त कानूनी ढांचा लागू करने की कोशिश कर रही है।









