डेली संवाद, चंडीगढ़। WPI Inflation: देश में महंगाई का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश की थोक महंगाई दर (WPI) मार्च 2026 में 3.88 प्रतिशत थी, जो अप्रैल में बढ़कर 8.30 प्रतिशत तक पहुंच गई।

यह पिछले 42 महीनों या लगभग तीन साल के सर्वोच्च स्तर को दर्शाता है और भविष्य में आम वस्तुओं की कीमतों पर और असर डाल सकता है। विशेष रूप से ईंधन और बिजली की कीमतों में भारी बढ़ोतरी इस महंगाई वृद्धि का मुख्य कारण रही है।

महंगाई दर 24.71 प्रतिशत तक पहुंची

अप्रैल में ईंधन और बिजली की महंगाई दर 24.71 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि थोक कच्चे तेल की कीमतों में 88 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई। पेट्रोल और डीजल की कीमतें क्रमशः 32.40 प्रतिशत और 25.19 प्रतिशत बढ़ीं। एलपीजी की कीमतों में भी 10.92 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि ऊर्जा क्षेत्र में वृद्धि ने सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर दबाव डाला है।विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई में तेजी का मुख्य कारण ईरान संकट और खाड़ी देशों में राजनीतिक तनाव के चलते कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं।

प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई मार्च में 6.36 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में 9.17 प्रतिशत हो गई, जबकि विनिर्मित वस्तुओं की महंगाई 3.39 प्रतिशत से बढ़कर 4.62 प्रतिशत दर्ज की गई। हालांकि, खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि अपेक्षाकृत नियंत्रित रही, जो मार्च में 1.85 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल में केवल 2.31 प्रतिशत रही।

पिछले 43 महीनों में उच्चतम स्तर

मुद्रास्फीति के कोर आंकड़े, जिसमें खाद्य और ईंधन को शामिल नहीं किया गया है, अप्रैल में 5 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं, जो पिछले 43 महीनों में उच्चतम स्तर है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ऊर्जा और प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई ने देश में समग्र मुद्रास्फीति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।

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मुस्कान डोगरा, डेली संवाद ऑनलाइन में डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर हैं। वे क्राइम, राजनीति और लोकल खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। वह 4 सालों से अधिक समय से Daily Samvad (Digital) में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत डेली संवाद से की। उन्होंने हरियाणा के महर्षि दयानंद युनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन की डिग्री हासिल की है।

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