डेली संवाद, नई दिल्ली। US Israel Attack Iran Khamenei Death Claim: अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर सामने आई है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसियों तसनीम न्यूज एजेंसी और फार्स न्यूज एजेंसी ने उनकी मौत की पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में खामेनेई (Khamenei) के परिवार के कई सदस्य भी मारे गए, जिनमें उनकी बेटी, दामाद, पोती और बहू शामिल हैं।
ईरान (Iran) सरकार ने इस घटना के बाद देशभर में 40 दिनों के राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की है। राजधानी तेहरान (Tehran) समेत कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सरकारी भवनों पर झंडे झुका दिए गए हैं और मस्जिदों में विशेष प्रार्थनाएं आयोजित की जा रही हैं।
महान नेता खो दिया
खामेनेई (Khamenei) की मौत के बाद इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने गहरा दुख व्यक्त किया है। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, IRGC ने अपने बयान में कहा, “हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश उनके शोक में डूबा है। उनका मार्गदर्शन और नेतृत्व हमेशा राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।” संगठन ने यह भी कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।

ईरानी सेना ने इस हमले के जवाब में एक बड़े और खतरनाक अभियान की शुरुआत की घोषणा की है। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि जवाबी कार्रवाई “कुछ ही देर में” शुरू होगी और क्षेत्र में मौजूद कब्जे वाले इलाकों तथा अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है।
ट्रम्प ने खामेनेई की मौत का दावा किया
इससे पहले अमेरिका (US) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donad Trump) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर खामेनेई (Khamenei) की मौत का दावा किया था। ट्रम्प ने अपने पोस्ट में लिखा कि “इतिहास के सबसे क्रूर व्यक्तियों में से एक खामेनेई मारा गया। यह ईरान (Iran) की जनता, अमेरिका (US) और दुनिया भर के देशों के लिए न्याय है।” ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया।
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विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई (Khamenei) की मौत का असर न केवल ईरान की आंतरिक राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की रणनीतिक स्थिति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। खामेनेई (Khamenei) 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और देश की विदेश नीति, रक्षा रणनीति और परमाणु कार्यक्रम जैसे अहम मुद्दों पर अंतिम निर्णय उन्हीं का होता था।

पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर
घटना के बाद वैश्विक बाजारों में भी हलचल देखी जा रही है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि ईरान क्षेत्र का एक प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश है। संयुक्त राष्ट्र (US) और कई अन्य देशों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने और संयम बरतने की अपील की है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ता है और इसका वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ता है।
कौन थे अयातुल्ला अली खामेनेई
अयातुल्ला अली खामेनेई (Khamenei) का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के धार्मिक शहर मशहद में एक मौलवी परिवार में हुआ था। वे खोमैनी शाह की नीतियों के खिलाफ थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे। 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार भी किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का बड़ा चेहरा बन गए और खोमैनी के भरोसेमंद सहयोगी माने जाने लगे।

1979 में ईरान में इस्लामी क्रांति हुई और शाह की सरकार गिर गई। खोमैनी देश लौटे और नई इस्लामी सरकार बनाई। खामेनेई (Khamenei) को क्रांतिकारी परिषद में जगह मिली और बाद में उप रक्षामंत्री बनाया गया। 1981 में तेहरान की एक मस्जिद में भाषण के दौरान खामेनेई पर बम हमला हुआ। उसी साल एक और बम धमाके में तत्कालीन राष्ट्रपति की मौत हो गई।
इसके बाद हुए चुनाव में खामेनेई भारी बहुमत से जीतकर ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी (Khamenei) के निधन के बाद खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता यानी ‘रहबर’ बनाया गया। इसके लिए संविधान में बदलाव भी किया गया। समर्थक उन्हें इस्लामी व्यवस्था का मजबूत रक्षक मानते हैं, जबकि आलोचक उन पर सख्त और कट्टर शासन चलाने का आरोप लगाते हैं।







