डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar News: जालंधर के काला सिंघिया रोड इलाके में कबाड़ के गोदाम में लगी आग ने टैक्स चोरी के बड़े खेल का पर्दाफाश कर दिया है। इस इलाके में खाली प्लाट को महंगे दाम पर किराए पर लेकर अवैध रूप से प्लास्टिक, रद्दी और स्क्रैप के बड़े बड़े गोदाम बनाए गए, जिससे आगजनी के घटना से पूरा इलाका राख हो सकता है। इसे लेकर इलाके के लोगों में काफी गुस्सा है। वहीं, कहा जा रहा है कि 120 फुटी रोड के एक बड़े कारोबारी का करीब 10 करोड़ रुपए का माल जलकर स्वाहा हो गया।
जानकारी के मुताबिक जालंधर (Jalandhar) के काला संघिया रोड पर कबाड़ के नाम पर करोड़ों रुपए का कारोबार किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि बस्तियात के एक बड़े कारोबारी के ये गोदाम हैं। जिन्होंने खाली प्लाट को महंगे दाम पर किराए पर लेकर गोदाम बना दिए। यहां प्लास्टिक, रद्दी और स्क्रैप के करोड़ों रुपए का माल स्टोर किया गया। आशंका है कि बिना बिल और बिल्टी के करोड़ों रुपए का कारोबार किया जा रहा है, अगर जीसएटी डिपार्टमेंट जांच करे तो सच सामने आ सकता है।

आग लगने से इलाके में दहशत
जालंधर के काला संघिया रोड के निवासियों के अनुसार अगर आग लगने से इलाके में दहशत है। लोगों को डर है कि अगर फिर से आग लगी तो इलाका खाक हो सकता है। इलाके के लोगों को जानमाल का नुकसान हो सकता है। लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से सवाल किया है कि खाली प्लाट को गोदाम क्यों बनने दिया गया? ऐसे में तो इलाके के लोगों के साथ कभी भी जानमाल का बड़ा नुकसान हो सकता है।
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इलाके के लोगों ने बताया कि यहां कबाड़ का करोड़ों रुपए का काम है। यहां प्लाट की किराया 70 से 80 हजार रुपए महीने वसूल किया जाता है। हैरानी की बात तो यह है कि करोड़ों रुपए के इस कबाड़ के कारोबार पर न तो जिला प्रशासन की कोई चैकिंग है और न टैक्स महकमे की। जिससे जहां आसपास के लोग मौत के मुहाने पर बैठे हैं। सूत्र बताते हैं कि टैक्स चोरी भी खूब हो रही है। इलाके के लोगों के मुताबिक गौरव नामक व्यक्ति यहां करोड़ों का कारोबार करता है और लोगों को जिंदगी दांव पर लगा दी है।

प्लास्टिक और कचरे का कारोबा
स्थानीय लोगों के मुताबित खाली प्लाटों को किराए पर लोगों पर तिरपाल तानकर झुग्गियां बनाई जाती है, फिर बड़े स्तर पर प्लास्टिक और कचरे का कारोबार किया जाता है। यहां आसपास बड़े पैमाने पर प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील कबाड़ जमा किया गया था, जिसने आग को तेजी से फैलने में मदद की। यहां रहने वाले लोग कूड़ा इकट्ठा कर अपना जीवन यापन करते हैं, लेकिन अनजाने में वे बेहद खतरनाक परिस्थितियों में रह रहे थे। बताया जा रहा है कि एक ही प्लॉट में 50 से 60 लोगों के रहने की व्यवस्था की गई थी, जहां सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं थे।









