तरनतारन बम ब्लास्ट की जांच अब NIA के हवाले, पढ़े ब्लास्ट से जुड़ी अब तक की पुलिसिया कहानी; अमेरिका, आस्ट्रिया और पाकिस्तान से जुड़े हैं आतंकियों के तार

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  • तरनतारन धमाके का मामला एन.आई.ऐ. के हवाले करने की कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार की विनती केंद्र द्वारा स्वीकार
  • दोषियों के संपर्क पाकिस्तान और एस.एफ.जे. के साथ होने और इसका राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय घेरा होने के कारण केंद्र ने सिफारिश स्वीकार की
डेली संवाद, चंडीगढ़
तरनतारन में 5 सितम्बर को हुए धमाके का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन.आई.ए.) के हवाले करने की कैप्टन अमरिन्दर सिंह सरकार की सिफारिश को केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया है। इस मामले का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्बन्ध होने और पाकिस्तान आधारित सिख फॉर जस्टिस (एस.एफ.जे) के दोषियों के साथ संदिग्ध सम्बन्ध होने के मद्देनजऱ ऐसा किया गया है।
एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार इस सम्बन्धी आधिकारिक सूचना मुख्य सचिव और डी.जी.पी. पंजाब को प्राप्त हो गई है। तरनतारन जिले के गाँव पंडोरी गोला के बाहरी खाली प्लाट में हुए शक्तिशाली बम धमाके से सम्बन्धित एक केस एफ.आई.आर. नंबर 0280, धारा 304 आई.पी.सी. और एक्सप्लोसिव सब्स्टांसिस एक्ट की विभिन्न धाराओं के अधीन केस दर्ज किया गया था। इस धमाके में 2 व्यक्ति मारे गए थे और एक अन्य ज़ख्मी हो गया था। यह धमाका उस समय हुआ था जब मारे गए व्यक्ति बारूद की खेप को निकालने के लिए एक गड्ढा खोद रहे थे।
पंजाब पुलिस ने पाकिस्तान आधारित गिरोह के 8 सदस्यों को गिरफ़्तार किया है जिनकी पूछ-ताछ के बाद जटिल शाजिश और इस गिरोह के हमलों की बात सामने आई है जिनमें 2016 में किया गया हमला भी शामिल है।
मुख्य साजिशकर्ता बिक्रमजीत सिंह उर्फ ग्रंथी और इस गिरोह के 7 अन्य मैंबर अभी भी भगौड़े हैं। ग्रंथी बारे माना जा रहा है कि वह आस्ट्रिया में है। पेशे के तौर पर ग्रंथी और दमदमी टकसाल का पैरोकार बिक्रम पाठक के तौर पर काम करता है। वह अत्यंत कट्टर सोच वाला व्यक्ति है। उसने मशहूर राजनैतिक शख्सियतों और सामाजिक – धार्मिक संस्थाओं, स्थानीय विरोधी राजनीतिज्ञों, हिंदु नेताओं और सिख प्रचारकों को देसी बमों की मदद से निशाना बनाने की योजना बनाई थी। आई.ई.डी. के इस माहिर ने स्थानीय तौर पर बने बहुउद्देश्यीय बमों के साथ पुलिस मुलाजिमों पर हमला करने की भी योजना बनाई।
भगौड़े दूसरे व्यक्तियों की पहचान गुरप्रीत सिंह (कैलिफोर्निया, अमरीका आधारित), गुरविन्दर सिंह प्रिंस (कैलिफोर्निया, अमरीका आधारित), सोढी सिंह (इस समय अर्मीनिया में रह रहा), अरविन्दर सिंह हनी, कुलदीप सिंह और रणजीत सिंह बब्बू 3 जून, 2016 को अमृतसर के एक शराब के ठेके पर हमला करने के बाद अमरीका फऱार हो गए थे।
पुलिस की तरफ से अब तक पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान हरजीत सिंह, मनप्रीत सिंह मान, चन्नदीप सिंह खालसा उर्फ गब्बर सिंह, मलकीत सिंह उर्फ शेर सिंह उर्फ शेरा, मनदीप सिंह उर्फ मस्सा सिंह, अमृतपाल सिंह उर्फ अमृत, अमरजीत सिंह उर्फ अमर और हस्पताल में उपचाराधीन गुरजंट सिंह के तौर पर की गई है।
पुलिस के प्रवक्ता के मुताबिक जांच से यह पता लगता है कि उक्त गिरोह के सदस्यों के पाकिस्तान और एस.एफ.जे. के साथ गहरे रिश्ते थे। चन्नदीप सिंह उर्फ गब्बर सिंह पाकिस्तान के उस्मान के लगातार संपर्क में बताया जाता है जिसको वह साल 2018 में फेसबुक के द्वारा मिला था। उस्मान चन्नदीप को खालिस्तान और भारत सरकार की तरफ से कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने सम्बन्धी संदेश भेजता रहता था और चन्नदीप सिंह को कश्मीरी जिहादियों के साथ मिलकर एक अलग मुल्क खालिस्तान स्थापित करने के लिए प्रेरित करता था। चन्नदीप की संपर्क सूची में से कई पाकिस्तानी नंबर भी मिले हैं।
इस सम्बन्धी और जानकारी देते हुए पुलिस के प्रवक्ता ने बताया कि बिक्रमजीत सिंह विस्फोटक तैयार करने के लिए पुराने अमृतसर में पड़ते हकीमा गेट के पास से और लोहगढ़ के इलाके से खऱीदता था। उसने घल्लूघारा के दिनों (जो कि जून, 2016 के पहला हफ़्ता बताया जाता है) में गिरोह के कई सदस्यों को एक धार्मिक स्थान पर कट्टर सोच इख्तियार कराने में सफलता भी हासिल कर ली थी। इसके बाद उसने गिरोह के सदस्यों को गाँव पंजवाड़ में स्थित अपने घर और गुरजंट सिंह के गाँव बचेड़े (तरन तारन) वाले घर आईईडी तैयार करने सम्बन्धी प्रशिक्षण भी दिया था। गिरोह के सदस्यों को प्रेरित करने, आईईडी तैयार करने का प्रशिक्षण देने पर और छोटे विस्फोटकों की स्पलाई देने के बाद वह साल 2018 में वह अर्मीनिया के रास्ते आस्ट्रिया के लिए फऱार हो गया था।
इस गिरोह ने एसएफजे के साथ सम्बन्धित गिरोह की मुख्य कड़ी के तौर पर जाने जाते अर्मीनिया के सोढी सिंह खालसा के इशारे पर तरन तारन के एक डेरे को मिटाने की योजना बनाई थी। वह हिंदु शिव सेना नेता को भी निशाना बनाना चाहते थे।
रणजीत सिंह बब्बू पुत्र बलबीर सिंह शराब के ठेके पर हमला करने से सबंधित है जबकि हरमनजीत सिंह कैप्टन ने अमृतसर के चाटी गाँव के समीप एक देसी बम के साथ शराब के ठेके को निशाना बनाया था। उसे गिरफ़्तार किया गया था अब वह ज़मानत पर है।
गुरजंट सिंह और बिक्रमजीत सिंह विक्की गिल ने नवंबर /दिसंबर, 2016 के दौरान तरनतारन में 2 देसी बम फेंके थे। यह बम फटे नहीं और इस घटना में कोई भी ज़ख्मी नहीं हुआ।
गुरजंट सिंह, हरजीत सिंह और विक्की गिल ने 3 जनवरी, 2019 को तरनतारन के गाँव बचेड़े में नये चुने गए सरपंच गुरजंट सिंह के घर पर चार देसी बम फेंके जिसके नतीजे के तौर पर 3 व्यक्ति ज़ख्मी हो गए। बिक्रम सिंह विक्की गिल और गुरजंट सिंह ने 25 मई, 2016 को रईया-ब्यास के नज़दीक एक सुनसान संपर्क सडक़ पर भी देसी बम चलाया।


















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