Mohammed Rafi: अखंड भारत में जन्म लेने वाले मोहम्मद रफी को पाकिस्तान मानता है अपना

Daily Samvad
5 Min Read
Punjab Government
WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

डेली संवाद, अमृतसर (रमेश शुक्ला ‘सफर’)। Mohammed Rafi: 1970 में आई फिल्म पगला कहीं का में मोहम्मद रफी साहब के गाए गीत “तुम मुझे यू भुला न पाओगे , जब कभी भी सुनोगे गीत मेरे , संग-संग तुम भी गुनगुनाओगे” भले ही आज दुनिया गा रही है लेकिन असलियत यह है कि आज की पीढ़ी उन्हें भूल रही है। भूल तो सरकारें भी गई। कितनी आई कितनी गई लेकिन उनकी यादगार स्थापित शहर में नहीं कर सकी। जहां रोजाना लाखों पर्यटक दुनिया से आते हैं।

यह भी पढ़ें: पत्नी संग कम खर्च में बाली घूमने का शानदार मौका, जानें कितना खर्च होगा

सुर सम्राट मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) को उनके पैतृक गांव को छोड़ जिले में सियासत ने अब तक छह फुट की जगह नहीं दी। भला हो मोहम्मद रफी के दीवाने संगीतकार हरिंदर सोहल का जिन्होंने अपनी जेब से पीतल की प्रतिमा बनाकर उन्हें विरसा विहार के मुख्य गेट पर स्थान दिया। पिछले एक सप्ताह से हरिंदर सोहल ने जहां मोहम्मद रफी के पुण्य तिथि को लेकर विरसा विहार में सुर उत्सव का आयोजन किया।

मोहम्मद रफी की विरसा विहार में लगी प्रतिमा
मोहम्मद रफी की विरसा विहार में लगी प्रतिमा

छह संतानों में रफी दूसरे नंबर पर थे

पंजाब के अमृतसर जिले के गांव कोटला सुल्तान में मोहम्मद रफी ने 24 दिसंबर 1924 को हाजी अली मोहम्मद के परिवार में जन्म लिया। हाजी अली के छह संतानों में रफी दूसरे नंबर पर थे। घर में रफी को फीको नाम से बुलाया करते थे।

मोहम्मद रफी को लेकर वैसे तो बहुत किस्से कहानियां हैं लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि मोहम्मद रफी ने अपने गीतों से चीन से युद्ध भी लड़ा था। रफी ने चीन के युद्ध के समय 14 हजार फुट ऊंचाई पर स्थित सांगला गए थे जहां उन्होंने भारतीय सैनिकों के हौसला बढ़ाने के लिए गीत गाया था।

Mohammed Rafi
Mohammed Rafi

सात साल की उम्र में वो लाहौर चले गए

मोहम्मद रफी की याद में हरेक साल सुर से उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले हरिंदर सोहल कहते हैं कि भारत -पाकिस्तान दोनों देश मोहम्मद रफी के गीतों पर जहां फिदा है वहीं दुनिया उनके गीतों पर झूमती है। मोहम्मद रफी की गायकी पर बचपन से ही गांव वाले फिदा थे। करीब सात साल की उम्र में वो लाहौर चले गए।

इसके पहले गांव में आने वाले फकीर का गीत सुनकर रफी उनके पीछे-पीछे सारा दिन लगे रहते थे। खास बात है कि रफी के परिवार का संगीत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। लाहौर में अपने भाई की नाई की दुकान पर अक्सर वो काम सीखने जाते थे , काम करते समय वो गुनगुनाते रहते।

पंजाबी फिल्म गुल बलोच

मोहम्मद रफी जब 13 साल के थे तभी लाहौर में कुन्दन लाल सहगल का शो था। शो के दौरान लाइट चली गई। लाइट जाने के बाद कुन्दन लाल सहगल ने शो करने से मना किया तो रफी के बड़े भाई ने आयोजकों से विनय करके उन्हें मौका दिलाया। रफी की आवाज सुन हर कोई दंग रह गया।

श्रोताओं के बीच प्रसिद्ध संगीतकार श्याम सुंदर भी थे जिन्होंने रफी को सुना तो बड़े प्रभावित हुए। यही वजह रही कि पहला गीत 1944 में रफी ने पंजाबी फिल्म गुल बलोच के लिए गया और उस फिल्म का निर्देशन श्याम सुंदर ने किया था।

Mohammed Rafi
Mohammed Rafi

लाहौर में चौक का नाम भी रखा

मोहम्मद रफी को लेकर राष्ट्रपति से रंगमंच का सम्मान पाने वाले केवल धालीवाल कहते हैं कि मैं रंगमंच के लिए कई बार पाकिस्तान गया। पाकिस्तान की आवाम रफी साहिब को अपना मानती है। यही वजह है कि उनके नाम से लाहौर में चौक का नाम भी रखा है।

बात करें भारत की तो उनके पैतृक गांव को छोड़ मोहम्मद रफी के नाम से शहर में कोई बुत (विरसा विहार) को छोड़कर नहीं स्थापित किया गया है और न ही किसी चौक चौराहे का नाम उनके नाम पर रखा गया है। मोहम्मद रफी के दीवाने कहे जाने वाले हरिंदर सोहल भी कहते हैं कि मोहम्मद रफी का यादगार में शहर में किसी चौक चौराहे का नाम रखा जाना चाहिए।

भले ही आज मोहम्मद रफी दुनिया में नहीं है लेकिन उनके गीत आज भी दुनिया में सुर प्रेमियों के दिलों में बजते हैं। बता दें, मोहम्मद रफी ने आज के दिन 31 जुलाई 1980 को भारतीय जमीं मुंबई में आखिरी सांस ली।

जालंधर में अवैध कालोनियों पर एक्शन, देखें



















Share This Article
Follow:
Daily Samvad एक विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट है, जहां हम देश-दुनिया, राजनीतिक विश्लेषण, प्रदेश, शिक्षा, बिज़नेस, मनोरंजन, खेल, स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र की ख़बरें सरल भाषा में आप तक पहुंचाते हैं। हमारा उद्देश्य है—जनता की आवाज़ बनकर निष्पक्ष पत्रकारिता को आगे बढ़ाना। डेली संवाद ऑनलाइन के महाबीर जायसवाल फाउंडर चीफ एडिटर हैं। वे राजनीति, अपराध, देश-दुनिया की खबरों पर दमदार पकड़ रखते हैं। उन्होंने पत्रकारिता करियर की शुरुआत राजनीति की खबरों से की, जबकि उनके पास, अमर उजाला, दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग से लेकर एडिटर तक 25 साल से अधिक पत्रकारिता का अनुभव है। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र शेखावत के Media Consultant भी रहे हैं। उन्होंने इलाहाबाद की यूनिवर्सिटी से मास कॉम्यूनिकेशन, बीए और एमए की डिग्री हासिल की है। संपर्क नंबर: +91-98881-90945 ईमेल: mmmmediahouse@gmail.com
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *