डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: राज्य में औद्योगिक श्रमिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने और उनकी भलाई के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए पंजाब श्रम कल्याण बोर्ड ने पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान विभिन्न कल्याण योजनाओं के तहत 7831 लाभार्थियों को 17.11 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की।
बोर्ड की चल रही गतिविधियों और प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए पंजाब के श्रम मंत्री तरुनप्रीत सिंह सौंद ने इन प्रयासों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को जागरूकता अभियानों में तेजी लाने के निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक पात्र श्रमिक इन कल्याण योजनाओं का लाभ उठा सकें।
यह भी पढ़ें: Japnoor Travels के सतनाम सिंह पर 45 लाख रुपए ठगी का आरोप, किसानों ने दफ्तर घेरा
योजनाओं के दायरे के बारे में जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि पंजाब श्रम कल्याण फंड अधिनियम, 1965 के तहत आने वाले संस्थानों में कार्यरत औद्योगिक श्रमिक बोर्ड द्वारा दिए जाने वाले लाभ प्राप्त करने के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि ये पहल स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं में श्रमिकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए चलायी गई हैं।
बोर्ड द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में चिकित्सा उपचार और सामान्य सर्जरी के लिए वित्तीय सहायता, एक्स-ग्रेशिया अनुदान, अंतिम संस्कार खर्च, एलटीसी, मातृत्व लाभ तथा मानसिक या शारीरिक दिव्यांगता वाले श्रमिकों के लिए सहायता शामिल है। इसके अलावा श्रमिक अन्य योजनाओं का लाभ भी ले सकते हैं, जिनमें शगुन योजना, चश्मा लगवाने संबंधी सहायता, दंत चिकित्सा देखभाल, श्रवण यंत्रों के लिए सहायता, तथा शिक्षा और दिव्यांगता मुआवजे हेतु छात्रवृत्ति योजनाएं शामिल हैं।
जरूरत के समय सुरक्षा प्रदान
मंत्री ने सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र श्रमिक तक कल्याण योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित की जाए ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार हो और जरूरत के समय सुरक्षा प्रदान की जा सके। उन्होंने अधिकारियों से जागरूकता शिविर और सरल आवेदन प्रक्रियाओं सहित सक्रिय उपाय अपनाने की अपील की ताकि इन योजनाओं के दायरे और प्रभाव को और बढ़ाया जा सके।
पंजाब सरकार अपने विकास एजेंडे के एक अहम हिस्से के रूप में श्रम कल्याण को प्राथमिकता दे रही है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि औद्योगिक श्रमिकों को आवश्यक सहायता और उनका उचित सम्मान मिल सके।










