डेली संवाद, जालंधर। Jalandhar Sarvodya Fraud Case: सर्वोदय (Sarvodya) हॉस्पिटल जालंधर की बैलेंस शीट, अकाउंट्स की किताबों में हेराफेरी कर करोड़ों की धोखाधड़ी करने के आरोपी डॉक्टर राजेश अग्रवाल, डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. अनवर खान और नोएडा के CA संदीप कुमार सिंह आदि पर कोर्ट का शिकंजा कभी भी कस सकता है।
जालंधर (Jalandhar) के सर्वोदय अस्ताल फ्राड केस में मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद फ्रॉड की FIR नंबर 233 / 23.12.25 नवी बारादरी थाने में रजिस्टर की गई थी। आरोपियों पर IPC की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 477-A और 120-B लगाई गई है। इन धाराओं के तहत ये Non-Bailable अपराध के आरोपी हैं। इस केस में कोर्ट को पुलिस की SIT का इंतज़ार है।
Prima Facie दोषी पाए
सूत्रों के अनुसार, CA संदीप कुमार सिंह की शिकायत ICAI (इंस्टीट्यूट ऑफ़ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया) को की गई। ICAI के अनुसार, संदीप कुमार सिंह सर्वोदय हॉस्पिटल (असेसमेंट ईयर 2019-2020) की जाली और मनगढ़ंत बैलेंस शीट और UDIN – 20511685AAAAAZ7230 बनाने के Prima Facie दोषी पाए गए।
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डॉ. पंकज त्रिवेदी के मुताबिक CA संदीप के खिलाफ ICAI, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ़ इंडिया, एपेक्स गवर्निंग बॉडी में शिकायत दर्ज कराई थी। इंस्टीट्यूट ने पाया कि CA संदीप को डॉ. राजेश अग्रवाल और डॉ. कपिल गुप्ता ने दूसरे पार्टनर्स की जानकारी के बिना, सर्वोदय हॉस्पिटल की बैलेंस शीट में अकाउंट्स की किताबों में हेराफेरी के लिए चुपके से हायर किया था।
दो लोगों के हस्ताक्षर पर मान गया संदीप
CA संदीप कुमार सिंह नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। ICAI ने केस की सुनवाई शुरू की और सारे भेद खुलते गए। जांच में सामने आया कि जब 10 लोगों की फर्म थी तो कैसे संदीप दो लोगों के हस्ताक्षर पर मान गया।
डॉ. राजेश अग्रवाल और डॉ. कपिल गुप्ता ने उससे जैसे कागज़ात बनवाने थे, बनवाए और उन्हें अपलोड करवा दिया। CA संदीप कुमार सिंह को एक टूल की तरह इस्तेमाल किया गया। यह डॉक्यूमेंट HIGH COURT की फाइल में भी लगा है।
HIRING को माना गलत
सुनवाई में ICAI ने CA संदीप कुमार सिंह की HIRING को गलत माना और उसकी लापरवाही का नोटिस लिया है। अभी हाल ही में 13 अप्रैल 2026 को ICAI की चौथी हियरिंग थी। यहां ध्यान देने वाली बात है कि ICAI एक क्वासी-ज्यूडिशियल बॉडी है। इसके आर्डर को न तो HIGH COURT और न ही सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है।
कैसे खुला मामला
कंपनी में 10 लोग पार्टनर्स थे। इसका अकाउंट Punjab National Bank रेलवे रोड की बैंक में था। सर्वोदय अस्पताल की बैलेंसशीट जब बैंक पहुंची तो उसमें तीन लोगों के सिग्नेचर थे। बैंक को शक हुआ तो उसने सभी पार्टनर्स को पत्र लिखा और वो कागज मांगे जिसपर सभी के हस्ताक्षर थे। इस तरह बाकी पार्टनर्स को पता चल गया कि एक फर्जी बैलेंसशीट सबमिट की गई है।









