Punjab: ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट होकर पंजाब लौटे 11 लोग ‘डंकी रूट’ का करेंगे पर्दाफाश, पूछताछ में जुटी पुलिस, बड़े ट्रैवल एजैंट रडार पर

यह मामले जालंधर, तरनतारन, मोगा और संगरूर समेत कई जिलों में दर्ज हुए हैं। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अमृतसर और जालंधर में 40 से अधिक ट्रैवल एजेंटों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए हैं।

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Highlights
  • अवैध ट्रैवल नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी
  • ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट होकर लौटे युवाओं से पूछताछ
  • बड़े एजेंट गिरोहों तक पहुंचने की कोशिश
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डेली संवाद, जालंधर/चंडीगढ़/मेलबर्न। Punjab Illegal Immigration Australia Deportees News: पंजाब में अवैध ट्रैवल नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी तेज हो गई है। ऑस्ट्रेलिया से डिपोर्ट होकर लौटे युवाओं से पूछताछ के जरिए पुलिस अब बड़े एजेंट गिरोहों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया से लौटे 15 भारतीयों में से 11 पंजाब के बताए जा रहे हैं, जिनसे गहन पूछताछ जारी है।

पंजाब (Punjab) की जांच एजेंसियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि ये युवक किन ट्रैवल एजेंटों के संपर्क में आए, किस रूट के जरिए विदेश पहुंचे और इस पूरे नेटवर्क में किन-किन राज्यों व देशों की भूमिका रही। पुलिस सभी डिपोर्टेड लोगों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है ताकि उनके बयानों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ी जा सकें।

deported-from-australia
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डंकी रूट की जांच

सूत्रों के अनुसार, जांच में खास ध्यान डंकी रूट पर है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इन युवाओं ने फर्जी दस्तावेज, नकली वीजा या मल्टी-कंट्री ट्रांजिट का सहारा लिया था। कई मामलों में एक ही नेटवर्क अलग-अलग नामों से काम करता है, जिससे जांच और जटिल हो जाती है।

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पुलिस को शक है कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह हो सकता है, जो युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये वसूलता है। जांच में पेमेंट मोड, एजेंटों की पहचान और यात्रा के हर चरण की जानकारी जुटाई जा रही है।

अमेरिका से भी किए थे डिपोर्ट

इससे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी पिछले साल 300 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया था, जिनमें 126 से अधिक पंजाब के निवासी थे। इनमें से अधिकांश ने भी इसी अवैध “डंकी रूट” का इस्तेमाल किया था। इसमें जालंधर के कुछ बड़े ट्रैवल एजैंट शामिल थे। यही नहीं, कई एजैंटों के खिलाफ कार्ऱवाई हुई। यहां तक की ED की भी छापेमारी हुई थी।

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अवैध ट्रैवल एजेंटों पर कार्रवाई के लिए पंजाब पुलिस (Punjab Police) पहले ही सक्रिय है। पुलिस ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया था, जिसका नेतृत्व प्रवीण सिन्हा कर रहे थे। डिपोर्टेड लोगों के बयानों के आधार पर 15 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

जालंधर में सबसे ज्यादा एजैंट

यह मामले जालंधर, तरनतारन, मोगा और संगरूर समेत कई जिलों में दर्ज हुए हैं। प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए अमृतसर और जालंधर में 40 से अधिक ट्रैवल एजेंटों के लाइसेंस भी रद्द कर दिए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में पंजाब में ट्रैवल एजेंटों के खिलाफ 3200 से ज्यादा एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।

सरकार ने साफ किया है कि डिपोर्टेड युवाओं से मिली जानकारी के आधार पर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा। इस कार्रवाई का मकसद युवाओं को ठगी और अवैध प्रवासन के जाल से बचाना और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना है।





















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