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Punjab News: अज्ञात और लावारिस शवों की पहचान के लिए राज्य स्तरीय डिजिटल पोर्टल 'पहचान' शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना पंजाब

एक ऐतिहासिक मानवीय और तकनीकी पहल के तहत पंजाब, राज्य भर के सरकारी शवगृहों में लाई जाने वाली अज्ञात और लावारिस लाशों की डिजिटल पहचान के लिए राज्य स्तरीय सार्वजनिक पोर्टल "पहचान" शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

Punjab News: अज्ञात और लावारिस शवों की पहचान के लिए राज्य स्तरीय डिजिटल पोर्टल 'पहचान' शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना पंजाब
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: एक ऐतिहासिक मानवीय और तकनीकी पहल के तहत पंजाब, राज्य भर के सरकारी शवगृहों में लाई जाने वाली अज्ञात और लावारिस लाशों की डिजिटल पहचान के लिए राज्य स्तरीय सार्वजनिक पोर्टल "पहचान" शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इस राज्य स्तरीय पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ आज यहां पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने किया।

उन्होंने बताया कि 'पहचान' पहल के तहत पंजाब के किसी भी सरकारी शवगृह में पोस्टमार्टम के 48 घंटों के भीतर-भीतर प्रत्येक अज्ञात, लावारिस मृत व्यक्ति के चेहरे की तस्वीरें, स्थायी पहचान चिह्न जैसे कि टैटू, जन्म से कोई निशान, किसी विशेष शारीरिक दोष की तस्वीरें और विस्तृत शारीरिक विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।

वेबसाइटों के माध्यम से बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध

यह पोर्टल स्वास्थ्य विभाग की सभी आधिकारिक वेबसाइटों के माध्यम से बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध है और भारत या विदेश में किसी भी स्थान से परिवारों द्वारा इस पोर्टल के माध्यम से खोज की जा सकती है। इस पोर्टल के माध्यम से जैसे ही कोई दावेदार ऑनलाइन दावा दर्ज करेगा, संबंधित जांच अधिकारी को स्वतः सूचित कर दिया जाएगा, ताकि परिवारों को शवगृहों या पुलिस थानों के चक्कर लगाए बिना सक्षम कानूनी अधिकार के तहत औपचारिक पहचान के लिए आगे की कार्रवाई हेतु निर्देशित किया जा सके।

इस पहल को एक नैतिक और सामाजिक प्रतिबद्धता बताते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, "अकेले पंजाब में ही हर साल लगभग 5,000 से 6,000 व्यक्ति अज्ञात और लावारिस हालत में दम तोड़ देते हैं। वे किसी के बेटे, बेटी, जीवन साथी या माता-पिता हो सकते हैं और कहीं न कहीं कोई परिवार उनकी प्रतीक्षा कर रहा हो सकता है। हमारी परंपरा में हर इंसान बराबर है और किसी के सम्मान के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी गरीब या प्रवासी क्यों न हो, उसे इस तरह लावारिस या अज्ञात नहीं छोड़ा जा सकता। जीवित व्यक्तियों की स्वास्थ्य देखभाल की तरह मृतकों का सम्मान भी हमारी ही जिम्मेदारी है और 'पहचान' पोर्टल हर परिवार के लिए इस अधिकार को सुनिश्चित करेगा।"

6,600 से अधिक मेडिकल अधिकारी पंजीकृत

स्वास्थ्य मंत्री ने उल्लेख किया कि यह पोर्टल पंजाब के डिजिटल मेडिको-लीगल सॉफ्टवेयर 'मेडिकोलीगल एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट' (मेडलीपर), जो पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद एन.आई.सी. द्वारा विकसित प्रणाली है, के मजबूत आधार पर तैयार किया गया है। वर्तमान समय में राज्य के सभी 23 जिलों और 346 सरकारी अस्पतालों में कार्यशील 'मेडलीपर', जिस पर 6,600 से अधिक मेडिकल अधिकारी पंजीकृत हैं, पर 12 लाख से अधिक मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें समय पर रिपोर्ट फ्रीजिंग अनुपालन दर 99.6 प्रतिशत रही है।

डॉ. बलबीर सिंह ने आगे कहा कि 'मेडलीपर' पुलिस, अदालतों, स्वास्थ्य संस्थानों और एम्स बठिंडा सहित नौ फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं को आपस में जोड़ता है और साथ ही लापता व्यक्तियों के रिकॉर्ड के मिलान के लिए 'क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स' (सी.सी.टी.एन.एस.) से सक्रिय समन्वय भी रखता है। पंजाब के इस अग्रणी मेडिको-लीगल दस्तावेज़ीकरण मॉडल ने एक राष्ट्रीय मानदंड स्थापित किया है, जिसका देश भर के लगभग 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अध्ययन करके इसे अपनाया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री ने पुष्टि की कि 'पहचान' पोर्टल डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम 2023 के नियमों का पूरी तरह से पालन करता है। उन्होंने समस्त सिविल सर्जनों, मेडिकल अधिकारियों और शवगृहों के स्टाफ को ताकीद की कि उनके द्वारा समय पर दी गई रिपोर्ट बिछड़ी आत्माओं को उनके परिवारों से पुनः मिलाने के लिए नैतिकता के पुल के रूप में काम करती है।