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Punjab News: नौकरी और टेंडर के घोटाले में नया मोड़, CBI रेड के बाद खुलेंगी कई परतें; अफसर भी जांच के घेरे में

चंडीगढ़ प्रशासन में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, सरकारी टेंडर और वेतन भुगतान के नाम पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। CBIकी छापेमारी के बाद मामले में कई अहम पहलुओं की जांच की जा रही है।

Punjab News:  नौकरी और टेंडर के घोटाले में नया मोड़, CBI रेड के बाद खुलेंगी कई परतें; अफसर भी जांच के घेरे में
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: चंडीगढ़ प्रशासन में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, सरकारी टेंडर और वेतन भुगतान के नाम पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शुक्रवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की छापेमारी के बाद मामले में कई अहम पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोप है कि नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये लिए गए और कुछ नियुक्तियों में कथित तौर पर जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में चंडीगढ़ विजिलेंस के पास भी जांच पहुंची थी। विजिलेंस ने 7 मई 2026 को संदीप बंसल समेत अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद संबंधित फाइल प्रशासन के अधिकारियों के पास भेजी गई, लेकिन आरोप है कि उस पर आगे कार्रवाई नहीं हुई।

नौकरी के नाम पर 2 से 2.5 लाख रुपये लेने का आरोप

अब CBI की जांच में यह पहलू भी महत्वपूर्ण हो सकता है कि विजिलेंस की सिफारिश पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और संबंधित अधिकारियों ने क्या कदम उठाए। हालांकि, अभी तक जांच एजेंसी ने कथित घोटाले की पुष्टि नहीं की है और किसी भी आरोपी की भूमिका अंतिम रूप से स्थापित नहीं हुई है। सूत्रों के मुताबिक, आउटसोर्स के जरिए नौकरी पाने वाले युवाओं और अन्य लोगों से कथित तौर पर 2 लाख से 2.5 लाख रुपये तक लिए जाते थे।

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वहीं, इन कर्मचारियों का मासिक वेतन करीब 20 हजार से 25 हजार रुपये बताया जा रहा है। मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों को कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पर रखा गया। जांच एजेंसी के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि नियुक्तियों के दौरान दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया और संबंधित कंपनियों तथा अधिकारियों की क्या भूमिका रही।

चार एजेंसियों के दफ्तरों में CBI ने खंगाले रिकॉर्ड

कार्रवाई के दौरान जिन चार एजेंसियों से जुड़े ठिकानों पर रिकॉर्ड की जांच की गई, उनमें शामिल हैं:

  • जाहरवीर मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज

  • ए टू जेड मैनपावर एंड सिक्योरिटी सर्विसेज

  • नेशनल ग्रुप ऑफ सर्विसेज

  • किम्सी एंटरप्राइजेज

ये एजेंसियां चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों और संस्थानों में तृतीय तथा चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों सहित आउटसोर्स मैनपावर उपलब्ध कराती हैं। बताया जा रहा है कि इन चारों समूहों से जुड़े करीब 30 हजार कर्मचारी काम कर रहे हैं।

जांच में सरकारी टेंडर, भर्ती से संबंधित दस्तावेज, वेतन भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं।CBI यह पता लगाने में जुटी है कि मैनपावर उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को सरकारी टेंडर किस प्रक्रिया के तहत दिए गए और भर्ती तथा भुगतान के दौरान निर्धारित नियमों का पालन हुआ या नहीं।

70 प्रतिशत टेंडर देने में पक्षपात का आरोप

चंडीगढ़ प्रशासन में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती करने वाली फर्मों के खिलाफ शिक्षा विभाग की ग्रुप-डी कर्मचारी यूनियन ने CBI की एंटी करप्शन ब्रांच में शिकायत दी थी।

शिकायत में संदीप मलिक, उनके भाई विकास मलिक और बहन रेखा से जुड़ी फर्मों का उल्लेख किया गया है। यूनियन ने आरोप लगाया है कि चंडीगढ़ प्रशासन में मैनपावर उपलब्ध कराने से संबंधित करीब 70 प्रतिशत टेंडर कुछ फर्मों को दिए जा रहे हैं।

शिकायत में सरकारी विभागों और शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों की भर्ती, टेंडर आवंटन तथा वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। यूनियन का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद GeM पोर्टल की प्रक्रिया का हवाला देकर शिकायतों को दबाने की कोशिश की जाती है।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। CBI की जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि टेंडर आवंटन में प्रतिस्पर्धा के नियमों का पालन किया गया या नहीं और क्या किसी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

किन सरकारी संस्थानों के टेंडर जांच के दायरे में?

यूनियन ने शिकायत में कई सरकारी विभागों और संस्थानों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जारी टेंडरों की विस्तृत जांच की मांग की है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • गवर्नमेंट कॉलेज फॉर मेन, सेक्टर-11

  • पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज, सेक्टर-46

  • बुड़ैल जेल

  • चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी

  • पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (PEC)

  • चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड

  • खेल विभाग

जांच के दौरान इन संस्थानों में मैनपावर उपलब्ध कराने वाली कंपनियों, टेंडर की शर्तों, कर्मचारियों की नियुक्ति और वेतन भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है।

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच का विषय

आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए प्रशासन की ओर से निजी कंपनियों को जिम्मेदारी दी जाती है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि नियुक्त कर्मचारियों के दस्तावेजों की जांच और सत्यापन की जिम्मेदारी किसकी थी। यदि किसी कर्मचारी को जाली दस्तावेजों के आधार पर नियुक्त किया गया, तो संबंधित एजेंसी के साथ-साथ सत्यापन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

इसके अलावा, विजिलेंस की ओर से कार्रवाई की सिफारिश किए जाने के बावजूद फाइल पर आगे कार्रवाई नहीं होने के आरोपों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। CBI यह पता लगा सकती है कि फाइल किन अधिकारियों के पास गई थी और उस पर क्या निर्णय लिया गया।

प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी उठा चुके हैं सवाल

चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया नगर निगम की हाउस मीटिंग में सफाई कर्मचारियों की संख्या और शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठा चुके हैं। बैठक में उन्होंने कहा था कि जब शहर में सफाई कर्मचारियों की संख्या करीब 250 थी, तब भी सफाई व्यवस्था की स्थिति ऐसी ही थी। अब कर्मचारियों की संख्या 800 से अधिक होने के बावजूद व्यवस्था में खास सुधार दिखाई नहीं दे रहा।

उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बावजूद सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा, तो इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों को रखने का क्या लाभ है? यह बयान आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या, उनकी तैनाती और सरकारी खर्च के उपयोग को लेकर उठ रहे सवालों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

CBI जांच में क्या-क्या होगा अहम?

मामले में जांच एजेंसी के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। इनमें सरकारी टेंडरों के आवंटन की प्रक्रिया, कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा, कर्मचारियों के दस्तावेजों का सत्यापन, वेतन भुगतान के रिकॉर्ड और विजिलेंस की सिफारिश पर हुई कार्रवाई शामिल हैं।

फिलहाल, 200 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच जारी है। अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित वित्तीय गड़बड़ी की कुल राशि कितनी है, किन लोगों की इसमें भूमिका रही और क्या किसी नियम का उल्लंघन हुआ।