डेली संवाद, गुरदासपुर। Punjab News: पंजाब की राजनीति में डेरा बाबा नानक विधानसभा हलके को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। गैंगस्टर जगदीप सिंह उर्फ जग्गू भगवानपुरिया की पत्नी अमनदीप कौर ने विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। 18 अक्टूबर को हलके के गांव सर्फकोट में उन्होंने चुनाव मैदान में उतरने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किसी राजनीतिक पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगी।
अमेरिका से तीन दिन पहले लौटीं अमनदीप कौर ने कहा कि डेरा बाबा नानक से उनका पारिवारिक और भावनात्मक रिश्ता है। वह इस हलके की बेटी भी हैं और बहू भी। ऐसे में यहां के लोगों की सेवा करना उनका नैतिक फर्ज है। उन्होंने कहा कि अब वह स्थायी रूप से यहीं रहकर लोगों के बीच काम करेंगी।
'मेरे पति जग्गू नहीं, जगदीप सिंह अठवाल हैं'
अमनदीप कौर ने अपने पति को गैंगस्टर कहे जाने पर भावुक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब कोई उनके पति को जग्गू भगवानपुरिया कहता है, तो उन्हें दुख होता है। उनके मुताबिक, उनके पति का नाम जगदीप सिंह अठवाल है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति जन्म से गैंगस्टर नहीं होता और उनके पति पर लगा यह टैग खत्म होना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपने पति को एक आम इंसान के रूप में देखने की अपील की। हालांकि, जग्गू भगवानपुरिया के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों और विभिन्न मामलों में उनकी कथित भूमिका को लेकर कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी है। अमनदीप कौर की प्रतिक्रिया उनका व्यक्तिगत पक्ष है।
कांग्रेस, AAP और BJP के नेताओं से मुकाबले पर क्या बोलीं?
डेरा बाबा नानक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा, आम आदमी पार्टी के गुरदीप सिंह रंधावा और भाजपा के नेताओं के मुकाबले चुनाव लड़ने के सवाल पर अमनदीप कौर ने कहा कि ये नेता वरिष्ठ हैं और उनके लिए पिता समान हैं।उन्होंने कहा कि कोई भी नेता जन्म से बड़ा या दिग्गज नहीं होता।
उनके मुताबिक, डेरा बाबा नानक की संगत से उन्हें समर्थन और प्यार मिल रहा है, जिससे उनका राजनीतिक आत्मविश्वास बढ़ा है। अमनदीप कौर के चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद अब इस बात पर नजर रहेगी कि वह किस पार्टी के साथ जुड़ती हैं या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ती हैं।
डेरा बाबा नानक में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का मुद्दा उठाया
अमनदीप कौर ने सीमावर्ती विधानसभा हलके में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि डेरा बाबा नानक क्षेत्र में बेहतर अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों की जरूरत है।
उन्होंने सवाल उठाया कि गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को अमृतसर क्यों रेफर करना पड़ता है। उनके मुताबिक, सीमावर्ती इलाके के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं अपने क्षेत्र में ही मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
'नशे की असली जड़ बेरोजगारी'
पंजाब में नशे की समस्या पर बोलते हुए अमनदीप कौर ने कहा कि केवल नशे के खिलाफ नारे लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक, बेरोजगारी भी नशे की समस्या की एक बड़ी वजह है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए, ताकि वे बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकें। उनके अनुसार, रोजगार, शिक्षा और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है।
अमनदीप कौर ने बताया कि उनकी टीम पिछले छह महीनों से चेयरमैन राजविंदर कौर की अगुवाई में जरूरतमंद परिवारों की मदद कर रही है। उन्होंने गरीब बेटियों की शादी, शगुन योजना और बच्चों की पढ़ाई के लिए किए जा रहे कार्यों का जिक्र किया।उनके मुताबिक, यह काम किसी राजनीतिक स्वार्थ के बिना किया जा रहा है और चुनाव के बाद भी जारी रहेगा।
चुनाव लड़ना तय, पार्टी के नाम पर फैसला बाकी
अमनदीप कौर ने स्पष्ट किया कि डेरा बाबा नानक से चुनाव लड़ने का फैसला हो चुका है। हालांकि, चुनाव किसी राजनीतिक दल के चुनाव चिह्न पर लड़ना है या निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में उनकी टीम और चेयरमैन राजविंदर कौर उचित समय पर फैसला लेंगी। इस घोषणा के बाद डेरा बाबा नानक की राजनीति में अमनदीप कौर की संभावित भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। उनके चुनाव लड़ने के फैसले का स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
जग्गू भगवानपुरिया पर 128 से अधिक आपराधिक मामलों का दावा
जगदीप सिंह उर्फ जग्गू भगवानपुरिया पंजाब के चर्चित गैंगस्टरों में शामिल है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उसके खिलाफ पंजाब और अन्य राज्यों में 128 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं। इनमें हत्या, फिरौती, जबरन वसूली, नशा तस्करी और अवैध हथियारों की सप्लाई से जुड़े मामले शामिल हैं।
वह पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के मामले में भी आरोपी है। उसके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कई मामले दर्ज बताए गए हैं। वह वर्ष 2015 से जेल में बंद है और वर्तमान में असम की सिलचर सेंट्रल जेल में है। जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े मामलों में आरोपों और न्यायिक निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है। किसी मामले में आरोपी होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है।