डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: सिख धर्म के प्रमुख और ऐतिहासिक पर्व ‘होला मोहल्ला’ की पवित्रता तथा पर्यावरण की स्वच्छता को बनाए रखने के उद्देश्य से पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पी.पी.सी.बी.) ने इस आयोजन को प्लास्टिक-मुक्त बनाने के लिए एक व्यापक अभियान सफलतापूर्वक चलाया। इस अभियान के अंतर्गत बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण पर्यावरण-हितैषी पहल करते हुए श्री आनंदपुर साहिब (Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee) में विभिन्न कमेटियों द्वारा संचालित लंगरों में लाखों की संख्या में बायोडिग्रेडेबल और कंपोस्टेबल डिस्पोज़ेबल वस्तुएँ निःशुल्क उपलब्ध करवाईं गई।

इस संबंध में जानकारी देते हुए पंजाब सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इस मुहिम का औपचारिक शुभारंभ 1 मार्च 2026 को पी.पी.सी.बी. की चेयरपर्सन रीना गुप्ता और सदस्य सचिव लवनीत दूबे के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अकाल तख्त साहिब और तख्त श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज से मुलाकात कर किया। अभियान शुरू करने से पहले विभाग ने इसकी प्रारंभिक तैयारियाँ लगभग एक सप्ताह पहले ही शुरू कर दी थीं, जिनमें लंगर कमेटियों से संपर्क करना, उनकी आवश्यकताओं का आकलन करना और जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल था।

प्रवक्ता ने बताया कि इस अभियान के दौरान विशेष रूप से पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचे के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया गया। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग को रोकने के लिए पी.पी.सी.बी. ने 20 लाख से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले बायोडिग्रेडेबल विकल्पों की आपूर्ति सुनिश्चित की। होला मोहल्ला के दौरान 7 लाख बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक कप, 6.5 लाख बायोडिग्रेडेबल चम्मच, 2.5 लाख प्लेटें, 5 लाख बायोडिग्रेडेबल कटोरियाँ तथा अन्य सामग्री, 5,000 बायोडिग्रेडेबल कचरा बैग और 30,000 बायोडिग्रेडेबल कैरी बैग विभिन्न लंगरों और गुरुद्वारों में वितरित किए गए।
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प्रवक्ता के अनुसार इस बड़े अभियान को ज़मीनी स्तर पर लागू करने के लिए पी.पी.सी.बी. की 20 समर्पित टीमों और स्वयंसेवकों ने व्यापक सहयोग दिया। यह अभियान 27 फरवरी 2026 से 4 मार्च 2026 तक पूरे उत्साह के साथ चलाया गया। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चेयरपर्सन रीना गुप्ता ने कहा कि गुरु साहिब का संदेश — “पवन गुरु, पानी पिता, माता धरत महत”- हमें प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और संरक्षण करने की प्रेरणा देता है। इसलिए होला मोहल्ला के अवसर पर श्री आनंदपुर साहिब की पवित्र धरती को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने से बढ़कर कोई और बेहतर प्रयास नहीं हो सकता।








