जालंधर: नगर निगम में दो SE और इंजीनियरों की फौज, फिर भी शहर में बन रही है घटिया सड़कें, MLA खुद कर रहे हैं जांच, मेयर और कमिश्नर मौन

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डेली संवाद, जालंधर
नगर निगम जालंधर के बीएंडआर ब्रांच में दो एसई, कई एक्सईएन और इंजीनियरों की फौज है, लेकिन शहर में घटिया रोड का निर्माण जारी है। हद तो यह है कि जहां रोड निर्माण का काम होता है, वहां नगर निगम का कोई इंजीनियर मौके पर नहीं होता, जिससे ठेकेदार के कारिंदें मनमानी तरीके से घटिया मैटेरियल लगाते हैं।

नगर निगम के इंजीनियरों को मौके पर न जाने से नाराज विधायक खुद सड़कों की जांच कर रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि विधायक कोई तकनीकी माहिर नहीं होते हैं, इसके लिए इंजीनियर ही जांच कर सकता है। हाल ही में अलास्का चौक से गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी लाडोवली रोड तक मुख्य सड़क निर्माण के चल रहे कार्य की विधायक राजिंदर बेरी ने जांच कर के निगम के इंजीनियरों की पोल खोल दी है।

काला संघिया रोड के निर्माण में गड़बड़ी भी पकड़ी गई

यही नहीं, जालंधर में काला संघिया रोड के निर्माण में गड़बड़ी भी पकड़ी गई है। यह गड़बड़ी निगम की बीएंडआर कमेटी के चेयरमैन जगदीश गग ने खुद पकड़ी, जबकि ये काम नगर निगम के इंजीनियर का था। काला संघिया रोड पर करीब 90 लाख से टाइल्स वाली रोड बनाई गई है। लेकिन बरसाती पानी की निकासी के लिए एक भी रोड गली नहीं बनाई गई है।

ये दो महज उदाहरण है, नगर निगम के इंजीनियरों की कारगुजारी को दिखाने के लिए। सूत्र बता रहे हैं कि नगर निगम के दोनों एसई दफ्तर से बाहर नहीं निकल रहे हैं, जिससे इनके इंजीनियरों की फौज रोड निर्माण की जांच ही नहीं करती। नतीजन ठेकेदारों की मौज है। ठेकेदारों के कारिंदे सड़क निर्माण में घटिया मैटेरियल लगा रहे हैं।

इंजीनियरों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

शहर में अलास्का चौक से लेकर से गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी लाडोवली रोड तक घटिया रोड बनाई गई है। यहां लुक और बजरी की खुद विधायक ने जांच की थी, लेकिन ठेकेदार के कारिदों ने लुक और बजरी की घटिया मैटेरियल लगाकर सड़क बना दी। इस पर न तो इलाके का जेई मौके पर पहुंचा और न ही एसई और एक्सईएन मौके पर आए। जिससे ठेकेदार ने घटिया सामाग्री से रोड बनाई है।

सबसे बड़ी बात यह है कि काला संघिया रोड और अलास्का चौक पर घटिया रोड बनाने वाले ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्ऱवाई नहीं की। इन इलाकों के इंजीनियरों को बख्श दिया गया। मेयर जगदीश राजा औऱ निगम कमिश्नर करुणेश शर्मा इन इंजीनियरों पर आखिरकार इतनी दरियादिली क्यों दिखा रहे हैं। यह सबसे बड़ा सवाल है।



















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