नगर निगम में लाखों रुपए के घोटाले का ‘डेली संवाद’ ने किया पर्दाफाश, मेयर ने रोके ये सभी प्रस्ताव, पढ़ें एफएंडसीसी मीटिंग में क्या हुआ

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महाबीर जायसवाल
डेली संवाद, जालंधर

डेली संवाद डॉट कॉम द्वारा एक्सपोज करने के बाद मेयर जगदीश राजा ने नगर निगम के खजाने को 30.50 लाख रुपए से ज्यादा की चपत लगाने वाले प्रस्ताव पर रोक लगा दी है। शुक्रवार को जालंधर नगर निगम की एफएंडसीसी की बैठक आयोजित हुई। बैठक में जो विकास काम पहले 31 फीसदी लेस रेट पर ठेेकेदार करने वाला था, उसी काम को उसी ठेकेदार को 15 फीसदी लेस पर देने का प्रस्ताव रखा गया। जिसे मेयर ने संदिग्ध बताते हुए रोक दिया है।

इस पूरे काम में करीब 30.50 लाख रुपए सरकार को चपत लगने जा रही है। जिसका खुलासा डेली संवाद ने किया था। बैठक में मेयर जगदीश राजा, निगम कमिश्नर दीपर्वा लाकड़ा, सीनियर डिप्टी मेयर सुरिंदर कौर, डिप्टी मेयर हरसिमरनजीत सिंह बंटी, पार्षद ज्ञान चंद, पार्षद गुरविंदर पाल सिंह बंटी नीलकंठ सहित निगम अधिकारी मौजूद थे।

यह है पूरा मामला

इसे भी पढ़ें : ‘डेली संवाद EXPOSED’: एफएंडसीसी में 30.50 लाख रुपए की चपत!, 31% की बजाए 15% लेस रेट पर काम देकर ठेकेदार को मालामाल करने की बड़ी साजिश, देखें सबूत

केस-1 : निगम को 10.19 लाख की चपत

शनिवार को एफएंडसीसी की बैठक में प्रस्ताव संख्या 199 पारित किया गया। इस प्रस्ताव के मुताबिक वार्ड-30 के चारबाग औऱ रियाजपुरा में गलियों के काम लिए टैंडर मांगे गए। काम 32.90 लाख रुपए का प्रस्तावित किया गया। निगम ने 11 नवंबर 2017 को टैंडर काल किया। किसी ने टैंडर नहीं भरा। 2 जनवरी 2018 को फिर से टैंडर निकाला गया। तीन टैंडर आए। इसमें तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी ने 31 फीसदी लेस रेट पर काम करने का टैंडर भरा। जिसे निगम ने एप्रूव किया। लेकिन अर्नेस्ट मनी न जमा करवाने पर ठेकेदार ने काम से हाथ पीछे खींच लिया।

अब इसी काम के लिए निगम ने 9 अगस्त 2018 को टैंडर रिकाल किया। इस बार सिंगल टैंडर उसी तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी का आया, जिसने 8 महीने पहले अर्नेस्ट मनी न जमा कर काम से पीछे हट गया। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अफसरों ने उसी ठेकेदार को फिर से काम देने का मन बना लिया, वह भी 15 फीसदी लेस रेट पर। जबकि 8 महीने पहले यही ठेकेदार इसी काम को 31 फीसदी लेस रेट पर करने जा रहा था। कुल मिलाकर 32.90 लाख के काम में 16 फीसदी यानि 10.19 लाख रुपए निगम का नुकसान हो रहा है।

केस – 2 : इसमें 9.89 लाख रुपए की निगम को लगेगी चपत

प्रस्ताव संख्या 200 पारित किया गया है। इस प्रस्ताव के मुताबिक बीटी कालोनीस दानिशमंदा श्मशानघाट, कोट बाजर में गलियों के काम लिए टैंडर मांगे गए। काम 31.91 लाख रुपए का प्रस्तावित किया गया। निगम ने 11 नवंबर 2017 को टैंडर काल किया। किसी ने टैंडर नहीं भरा। 2 जनवरी 2018 को फिर से टैंडर निकाला गया। तीन टैंडर आए। इसमें तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी ने 31 फीसदी लेस रेट पर काम करने का टैंडर भरा। जिसे निगम ने एप्रूव किया। लेकिन अर्नेस्ट मनी न जमा करवाने पर ठेकेदार ने काम से हाथ पीछे खींच लिया।

अब इसी काम के लिए निगम ने 9 अगस्त 2018 को टैंडर रिकाल किया। इस बार सिंगल टैंडर उसी तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी का आया, जिसने 8 महीने पहले अर्नेस्ट मनी न जमा कर काम से पीछे हट गया। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अफसरों ने उसी ठेकेदार को फिर से काम देने का मन बना लिया, वह भी 15 फीसदी लेस रेट पर। जबकि 8 महीने पहले यही ठेकेदार इसी काम को 31 फीसदी लेस रेट पर करने जा रहा था। कुल मिलाकर 31.91 लाख के काम में 16 फीसदी यानि 9.89 लाख रुपए निगम का नुकसान हो रहा है।

केस-3 :  निगम को 10.41 लाख रुपए की लगेगा चूना

प्रस्ताव संख्या 201 पारित किया गया। इस प्रस्ताव के मुताबिक वार्ड-11 और वार्ड-12 के परागपुर में गलियों के काम लिए टैंडर मांगे गए। काम 33.60 लाख रुपए का प्रस्तावित किया गया। निगम ने 11 नवंबर 2017 को टैंडर काल किया। किसी ने टैंडर नहीं भरा। 2 जनवरी 2018 को फिर से टैंडर निकाला गया। तीन टैंडर आए। इसमें तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी ने 31 फीसदी लेस रेट पर काम करने का टैंडर भरा। जिसे निगम ने एप्रूव किया। लेकिन अर्नेस्ट मनी न जमा करवाने पर ठेकेदार ने काम से हाथ पीछे खींच लिया।

अब इसी काम के लिए निगम ने 9 अगस्त 2018 को टैंडर रिकाल किया। इस बार सिंगल टैंडर उसी तेजमोहन को-आपरेटिव सोसाइटी का आया, जिसने 8 महीने पहले अर्नेस्ट मनी न जमा कर काम से पीछे हट गया। लेकिन हैरानी की बात तो यह है कि अफसरों ने उसी ठेकेदार को फिर से काम देने का मन बना लिया, वह भी 15 फीसदी लेस रेट पर। जबकि 8 महीने पहले यही ठेकेदार इसी काम को 31 फीसदी लेस रेट पर करने जा रहा था। कुल मिलाकर 33.60 लाख के काम में 16 फीसदी यानि 10.41 लाख रुपए निगम का नुकसान हो रहा है।

सूत्र बता रहे हैं कि नगर निगम को चूना लगाने के लिए सुनियोजित तरीके से ठेकेदार के साथ मिलकर ये प्रस्ताव तैयार करवाया। जो काम पहले 31 फीसदी कम रेट पर होना था, उसे अब 15 फीसदी कम रेट पर करवाया जा रहा है। इसमें 16 फीसदी सीधे सरकार का नुकसान हो रहा है। ये 16 फीसदी यानि 30.50 लाख रुपए ठेकेदार और अफसरों में बंटना था।

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