1984 के सिख दंगे में 34 साल बाद सज्जन कुमार दोषी करार, पढ़ें दिल्ली हाईकोर्ट का पूरा फैसला

Daily Samvad
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नई दिल्ली। तकरीबन 34 साल के बाद 1984 सिख दंगे से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सोमवार को निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सज्जन कुमार को दंगे के लिए दोषी माना है. सज्जन को हिंसा कराने और दंगा भड़काने का दोषी पाया गया है।

यह मामला एक हत्याकांड से जुड़ा है जिसमें नवंबर 1984 को दिल्ली छावनी के राजनगर क्षेत्र में एक ही परिवार के पांच सदस्यों को मार दिया गया था. इस हत्याकांड में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार भी आरोपी हैं।

इसी मामले पर हाई कोर्ट की डबल बेंच के जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस विनोद गोयल की बेंच ने बीते 29 अक्टूबर को सीबीआई, पीड़ितों और दोषियों की ओर से दायर अपीलों पर दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. दिल्ली हाई कोर्ट में कुल 7 अपील हैं जिन पर सोमवार को दिल्ली हाई कोर्ट को अपना फैसला सुनाना है।

सज्जन कुमार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था

इससे पहले 1984 सिख दंगा मामले में 2013 में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को निचली अदालत ने बरी कर दिया था, जबकि सज्जन कुमार के अलावा बाकी और आरोपियों को कोर्ट ने दोषी करार दिया था. इसमें पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, कैप्टन भागमल, गिरधारी लाल और दो अन्य लोग शामिल थे।

कोर्ट ने अपने आदेश में इनको दंगा भड़काने में दोषी माना था और पूर्व कांग्रेस पार्षद बलवान खोखर, भागमल और गिरधारी लाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जबकि पूर्व विधायक महेंद्र यादव और किशन खोखर को तीन तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी।

इस फैसले को दोषियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी

निचली अदालत के इस फैसले को दोषियों ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. इसके अलावा सीबीआई और पीड़ितों ने भी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी किए जाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में अपील दायर की और सज्जन कुमार समेत सभी दोषियों पर आरोप लगाया था कि दंगा भड़काने के पीछे इन लोगों का हाथ है।

दिल्ली हाई कोर्ट से आने वाला फैसला यह साफ करेगा कि सज्जन कुमार और कांग्रेस के लिए आज का दिन राहत भरा होगा या आफत भरा. दिलचस्प यह भी है कि कल ही कमलनाथ मध्य-प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले रहे हैं और उनको मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर भी सिख समुदाय को आपत्ति है. इसमें मुख्य वजह वह आरोप है जिसमें कमलनाथ के 1984 के सिख दंगे में शामिल होने के आरोप हैं।

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