डेली संवाद, जालंधर/सुल्तानपुर लोधी। Punjab News: पंजाब विधानसभा द्वारा पास किए गए “जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार बिल 2026” को राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया द्वारा मंजूरी दिए जाने पर राज्यसभा सदस्य और प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने पूरे सिख जगत को बधाई दी है।
उन्होंने जारी किए बयान में कहा कि 13 अप्रैल 2026 को पंजाब विधानसभा ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हो रही बेअदबी को रोकने के लिए जो संशोधन बिल पास किया था, उस पर राज्यपाल के हस्ताक्षर होने के बाद अब यह कानून बन गया है। इसके तहत बेअदबी करने वाले को उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। याद रहे है कि संसद के बजट सत्र के दौरान संत सीचेवाल ने स्पेशल मेंशन के जरिए केंद्र सरकार से धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की थी। यह पहली बार था जब किसी सांसद ने बेअदबी के खिलाफ कानून बनाने की मांग उठाई थी।
दोषियों के मन में कानून का डर नहीं था
संत सीचेवाल ने इस बिल पर राज्यपाल की मुहर लगने पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Mann) और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बरगाड़ी, बहिबल कलां और कोटकपूरा में वर्ष 2015 में हुई घटनाएं आज भी जख्म बनी हुई हैं। बेअदबी की घटनाओं ने पूरे पंथ के दिल को झकझोर कर रख दिया था। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं को 11 साल बीत जाने के बावजूद दोषियों के मन में कानून का डर नहीं था।
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नकौदर बेअदबी कांड के पीड़ित माता-पिता भी पिछले 40 वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं। संत सीचेवाल ने समाना में टावर मोर्चा लगाने वाले गुरजीत सिंह खालसा के संघर्ष को नमन करते हुए इस आंदोलन में शामिल पूरी संगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसा सच्चा गुरसिख ही इस प्रकार का संघर्ष कर सकता है। इससे सरकार पर भी दबाव बना क्योंकि उसका उद्देश्य स्पष्ट और नेक था।
13 अप्रैल को जब यह बिल पास किया जा रहा
उल्लेखनीय है कि गुरजीत सिंह खालसा पिछले डेढ़ साल से 400 फीट ऊंचे टावर पर धरना दे रहे हैं। संत सीचेवाल ने कहा कि बेअदबी की घटनाओं में पकड़े जाने वाले कथित आरोपियों को अक्सर मानसिक रोगी बताकर बचाने की कोशिश की जाती थी। अब ऐसे मामलों की जांच के लिए मनोवैज्ञानिक डॉक्टरों का एक विशेष बोर्ड बनाया जाएगा, जो यह तय करेगा कि आरोपी अपने कृत्य के परिणाम से अवगत था या उसे किसी ने उकसाया था।
उल्लेखनीय है कि 13 अप्रैल को जब यह बिल पास किया जा रहा था, तब संत बलबीर सिंह सीचेवाल धार्मिक नेताओं के साथ पंजाब विधानसभा की राज्यपाल गैलरी में बैठकर इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने थे।









