डेली संवाद, पंजाब। Visa Fraud: विदेश भेजने के नाम पर हो रही धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इसी कड़ी में एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने इमिग्रेशन इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वीजा कंसल्टेंट कंपनियों में काम कर चुकी एक महिला ने चौंकाने वाले दावे किए हैं, जिनसे पता चलता है कि किस तरह युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगा जा रहा है।
महिला के अनुसार, कई इमिग्रेशन सेंटर कनाडा (Canada) में परमानेंट रेजिडेंसी (PR) दिलाने के नाम पर स्पॉन्सरशिप सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। युवाओं को बेहतर भविष्य और लग्जरी लाइफ के सपने दिखाकर उनसे मोटी रकम वसूली जाती है। शुरुआत में उनके दस्तावेज लिए जाते हैं और फिर उन्हें अधूरा बताकर “पूरा करने” के नाम पर लाखों रुपये मांगे जाते हैं।

फर्जी दस्तावेज तैयार कर देते
महिला ने खुलासा किया कि स्टूडेंट वीजा के नाम पर सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा किया जाता है। जब युवक-युवतियां इमिग्रेशन ऑफिस पहुंचते हैं, तो उन्हें कनाडा की चमक-दमक और उच्च जीवन स्तर के बारे में बताया जाता है। इसके बाद उनके शैक्षणिक और वित्तीय दस्तावेजों में खामियां निकालकर उन्हें सुधारने के बहाने पैसे ऐंठे जाते हैं। कई मामलों में एजेंट खुद ही फर्जी दस्तावेज तैयार कर देते हैं, जो देखने में बिल्कुल असली लगते हैं।
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महिला का दावा है कि पंजाब में कई ऐसी फर्में सक्रिय हैं, जो नकली शैक्षणिक रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट तैयार करने में मदद करती हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर स्टूडेंट वीजा की फाइल तैयार की जाती है, जिससे एंबेसी को गुमराह किया जा सके। इतना ही नहीं, छात्रों का दाखिला ऐसे कॉलेजों में करवाया जाता है, जो केवल नाम के होते हैं। कई “वन रूम कॉलेज” केवल कागजों में ही मौजूद होते हैं। इन कॉलेजों से फर्जी लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस जारी किए जाते हैं, जिसके आधार पर वीजा हासिल किया जाता है। छात्रों से सालाना लगभग 25,000 डॉलर तक फीस वसूली जाती है, लेकिन असल में उन्हें पढ़ाई के बजाय काम करने के लिए छोड़ दिया जाता है।

स्पॉन्सरशिप का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग
महिला ने यह भी बताया कि स्पॉन्सरशिप का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। एक ही स्पॉन्सरशिप डॉक्यूमेंट को एडिट कर कई लोगों के नाम पर इस्तेमाल किया जाता है। यहां तक कि कनाडा से शादी या पार्टी के फर्जी निमंत्रण पत्र मंगवाकर अलग-अलग नामों से तैयार किए जाते हैं और उनके आधार पर वीजा प्रोसेस किया जाता है। भारत से कनाडा भेजने के लिए पूरी “सेटिंग” का भी दावा किया गया है। एजेंट युवाओं से कहते हैं कि उन्हें एयरपोर्ट पर ही टिकट मिलेगी।
कई मामलों में एयरपोर्ट पर स्पॉन्सर की सही तरीके से जांच भी नहीं होती। कनाडा पहुंचने के बाद भी कड़ी जांच न होने के कारण कई लोग फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वहां पहुंच जाते हैं। इस खुलासे ने इमिग्रेशन सिस्टम की पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई और जागरूकता बेहद जरूरी है, ताकि युवाओं को इस तरह की ठगी से बचाया जा सके।









