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Punjab News: भगवंत मान सरकार ने नशा पीड़ितों को लंबे समय तक नशा-मुक्त रखने के लिए 'कम्युनिटी ब्रिज मॉडल' किया शुरू

कम्युनिटी ब्रिज मॉडल के तहत पंजाब भर में नशा पीड़ितों के लिए 90 दिनों का ढांचागत पुनर्वास सुनिश्चित किया जाएगा, पंजाब में कम्युनिटी ब्रिज मॉडल के तहत नशा मुक्ति केंद्रों से आगे भी जारी रहेगी पेशेवर सहायता

Punjab News: भगवंत मान सरकार ने नशा पीड़ितों को लंबे समय तक नशा-मुक्त रखने के लिए 'कम्युनिटी ब्रिज मॉडल' किया शुरू
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डेली संवाद, चंडीगढ़। Punjab News: पंजाब की भगवंत मान सरकार राज्य में नशे के खिलाफ चल रहे 'युद्ध नशियां विरुद्ध' अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए कम्युनिटी ब्रिज मॉडल (Community Bridge Model-CBM) शुरू करने जा रही है।

यह 90 दिनों का समाज-आधारित पुनर्वास (Rehabilitation) कार्यक्रम होगा, जिसके तहत मरीजों का इलाज नशा मुक्ति केंद्र से डिस्चार्ज होने के बाद भी उनके घर पर पेशेवर निगरानी में जारी रहेगा। सरकार का मानना है कि इस पहल से मरीजों के दोबारा नशे की गिरफ्त में आने की संभावना कम होगी और उनकी रिकवरी अधिक प्रभावी होगी।

क्या है Community Bridge Model?

कम्युनिटी ब्रिज मॉडल एक 90 दिन का संरचित पुनर्वास कार्यक्रम है। इसमें मरीज पहले सरकारी नशा मुक्ति केंद्र में चिकित्सकीय निगरानी में डिटॉक्सीफिकेशन कराएगा। डॉक्टर द्वारा चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित किए जाने के बाद मरीज को घर भेज दिया जाएगा, लेकिन उसका इलाज यहीं समाप्त नहीं होगा।

डिस्चार्ज के बाद मरीज की रिकवरी प्रक्रिया घर पर ही जारी रहेगी। इस दौरान टेली-काउंसलिंग, नियमित फॉलोअप, परिवार की सक्रिय भागीदारी और समय-समय पर डोप टेस्ट किए जाएंगे।

परिवार निभाएगा अहम भूमिका

सरकार के अनुसार, मरीज को डिस्चार्ज करने से पहले उसके परिवार के लिए अनिवार्य साइको-एजुकेशन सत्र आयोजित किया जाएगा। इसमें परिवार को बताया जाएगा कि मरीज को नशे से दूर रखने और मानसिक रूप से मजबूत बनाने में उनकी क्या भूमिका होगी।

डिस्चार्ज के बाद पहले 30 दिनों तक सप्ताह में तीन से चार बार टेली-काउंसलिंग की जाएगी। इसके बाद अगले डेढ़ महीने तक सप्ताह में एक या दो बार काउंसलिंग जारी रहेगी। पूरे कार्यक्रम के दौरान मरीज का नियमित मूल्यांकन और डोप टेस्ट भी किया जाएगा।

पुनः नशे की स्थिति में तुरंत होगा हस्तक्षेप

यदि किसी मरीज का डोप टेस्ट पॉजिटिव आता है या वह काउंसलिंग सत्र में शामिल नहीं होता, तो सबसे पहले काउंसलर उससे संपर्क करेगा। जरूरत पड़ने पर सुपरवाइजर और परिवार को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

यदि मरीज के दोबारा नशे की ओर लौटने की आशंका होती है, तो उसे फिर से नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराने की व्यवस्था की जाएगी।

4 जिलों में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि फिलहाल इस मॉडल को अमृतसर, होशियारपुर, मोगा और मोहाली में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जा रहा है। सफलता मिलने के बाद इसे पूरे पंजाब में विस्तारित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह मॉडल केवल इलाज तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मरीजों को लंबे समय तक नशा-मुक्त रखने और परिवार को भी इस प्रक्रिया में भागीदार बनाने का प्रयास करेगा।

56 नशा मुक्ति केंद्र और 540 से अधिक OOAT क्लीनिक

वर्तमान में पंजाब में 56 सरकारी नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र और 540 से अधिक आउटपेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) क्लीनिक संचालित हैं। सरकार का कहना है कि Community Bridge Model से न केवल मरीजों की रिकवरी बेहतर होगी, बल्कि नशा मुक्ति केंद्रों पर बिस्तरों का दबाव भी कम होगा और अधिक मरीजों को इलाज मिल सकेगा।