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Tata Sons Reappointment: Tata Sons में बड़ा फैसला, N चंद्रशेखरन फरवरी 2032 तक चेयरमैन रहेंगे; बोर्ड ने कार्यकाल बढ़ाया

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को एक और 5 साल का कार्यकाल मिलने का रास्ता साफ हो गया है। 17 सितंबर 2026 को हुई Tata Sons बोर्ड बैठक में उनके दोबारा चेयरमैन बनाए जाने को मंजूरी दी गई।

Tata Sons Reappointment: Tata Sons में बड़ा फैसला, N चंद्रशेखरन फरवरी 2032 तक चेयरमैन रहेंगे; बोर्ड ने कार्यकाल बढ़ाया
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डेली संवाद, नई दिल्ली। Tata Sons Reappointment: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को एक और 5 साल का कार्यकाल मिलने का रास्ता साफ हो गया है। 17 सितंबर 2026 को हुई Tata Sons बोर्ड बैठक में उनके दोबारा चेयरमैन बनाए जाने को मंजूरी दी गई। नए कार्यकाल के तहत वह फरवरी 2032 तक Tata Sons का नेतृत्व कर सकते हैं।

यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त 2026 में चंद्रशेखरन ने मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद पुनर्नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करने की बात कही थी। Tata Trusts ने भी 13 अगस्त को जारी बयान में उनके 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद पुनर्नियुक्ति की पेशकश नहीं करने के फैसले की पुष्टि की थी।

अगस्त में चंद्रशेखरन ने क्यों कहा था कि दोबारा कार्यकाल नहीं लेंगे?

12 अगस्त 2026 को चंद्रशेखरन (N Chandrasekaran) ने Tata Sons के चेयरमैन पद से मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद पुनर्नियुक्ति की पेशकश नहीं करने का फैसला बताया था।

उन्होंने कहा था कि उनके अगले 5 साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की गई थी, लेकिन बोर्ड के एक सदस्य के समर्थन नहीं देने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसके बाद उन्होंने नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी बताते हुए अपना फैसला सार्वजनिक किया था। अब सितंबर में बोर्ड द्वारा नया कार्यकाल मंजूर किए जाने से स्थिति बदल गई है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, इस बदलाव के कारणों की तत्काल सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई है।

2032 तक Tata Sons के चेयरमैन रहेंगे

एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना था। Tata Sons बोर्ड की नई मंजूरी के बाद उनका नया 5 साल का कार्यकाल फरवरी 2032 तक रहने की रिपोर्ट है। चंद्रशेखरन जनवरी 2017 में Tata Sons के चेयरमैन बने थे।

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इससे पहले वह Tata Consultancy Services (TCS) में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। Tata Sons के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, उनका मौजूदा कार्यकाल 21 फरवरी 2022 से 20 फरवरी 2027 तक निर्धारित था।

Tata Sons की लिस्टिंग भी चर्चा में

चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल के साथ Tata Sons की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग भी महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। सितंबर 2026 में RBI ने Tata Sons के उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कंपनी ने खुद को उस नियामकीय वर्गीकरण से बाहर करने की मांग की थी जिसके तहत लिस्टिंग की आवश्यकता पैदा हो सकती है।

Reuters के मुताबिक, Tata Sons के पास मार्च 2025 तक करीब ₹1.75 लाख करोड़ की standalone assets थीं और RBI के नियमों के तहत कंपनी की लिस्टिंग का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।

Tata Trusts की भूमिका क्यों अहम है?

Tata Sons में Tata Trusts की करीब 66% हिस्सेदारी है। इसलिए चेयरमैन की नियुक्ति और समूह के भविष्य से जुड़े बड़े फैसलों में ट्रस्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।

अगस्त में Tata Trusts ने चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति के लिए खुद को पेश नहीं करने के फैसले का सम्मान करने की बात कही थी और नए चेयरमैन के चयन के लिए Selection Committee बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी दी थी।

चंद्रशेखरन के कार्यकाल में Tata Group का विस्तार

एन चंद्रशेखरन के नेतृत्व में Tata Group ने पारंपरिक कारोबार के अलावा कई नए क्षेत्रों में विस्तार किया है। इनमें सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, बैटरी, डिजिटल कारोबार और एविएशन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

Tata Group की कंपनियों में TCS, Tata Motors, Tata Steel, Tata Power और Air India जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।

Tata Group, Tata Sons और Tata Trusts में अंतर

Tata Group: Tata नाम के तहत संचालित अलग-अलग कंपनियों और कारोबारों का समूह।

Tata Sons: Tata Group की प्रमुख होल्डिंग कंपनी, जो समूह की कई कंपनियों में हिस्सेदारी रखती है और रणनीतिक स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Tata Trusts: परोपकारी और सामाजिक कार्यों से जुड़े ट्रस्टों का समूह, जिसके पास Tata Sons में करीब 66% हिस्सेदारी है।

अब आगे क्या?

Tata Sons बोर्ड की मंजूरी के बाद एन चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल का प्रस्ताव आगे की आवश्यक कॉरपोरेट प्रक्रिया से गुजरेगा। इस बीच Tata Sons की संभावित लिस्टिंग, RBI से जुड़े नियामकीय मुद्दे और समूह की नई कारोबारी योजनाएं भी चर्चा में रहेंगी।