डेली संवाद, नागपुर। Mohan Bhagwat Dussehra 2026 Speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर भारत की एकता, सामाजिक सद्भाव, लोकतंत्र और देश के विकास को लेकर कई अहम बातें कहीं।
नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो भारत को दबाना चाहती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत में फ्रांस और बांग्लादेश जैसे हालात पैदा करने की कोशिश कर रही हैं। उनका उद्देश्य केवल सत्ता परिवर्तन करना नहीं, बल्कि अपने समर्थकों को सत्ता में बैठाना है।
हिन्दू समाज को बांटने की साजिश
भागवत ने कहा कि कुछ लोग भारत और हिंदू समाज को बांटना चाहते हैं और उन्हें ऐसे नेताओं का समर्थन भी मिलता है। उन्होंने समाज से एकता बनाए रखने और देश को विभाजित करने वाली मानसिकता से सतर्क रहने की अपील की।
RSS प्रमुख ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन होना स्वाभाविक है। हालांकि, आंदोलनों का मकसद समस्याओं का समाधान करना होना चाहिए, न कि समाज में द्वेष, तनाव और विभाजन पैदा करना। उन्होंने कहा कि कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए किया जाता है और वे राजनीति का साधन बन जाते हैं।
भारत को कमजोर करने की कोशिश
भागवत के मुताबिक, देश और समाज को केवल नेता ही नहीं चलाते, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी समस्याओं के समाधान में अहम भूमिका निभाती है।
मोहन भागवत ने कहा कि भारत को कमजोर करने की कोशिश करने वाली ताकतों के प्रभाव में आकर उत्तेजित होने के बजाय लोगों को एकता बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।
सीमा पर आज भी अशांति
उन्होंने बंगाल विभाजन का उल्लेख करते हुए कहा कि लॉर्ड कर्जन ने हिंदू-मुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया था, जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा। वहीं, 1947 में देश का विभाजन नहीं रोका जा सका। भागवत ने इसके पीछे समाज में अलगाव की भावना और तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद भी जिस सुख और शांति की उम्मीद की गई थी, वह पूरी तरह हासिल नहीं हुई और सीमा पर आज भी अशांति बनी हुई है।
सभी को साथ लेकर चलना जरूरी
RSS प्रमुख ने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज एक हैं और देश की सांस्कृतिक जड़ें भी समान हैं। उन्होंने जोर दिया कि किसी की अलग पहचान मिटाए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए।
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि -
समाज को जोड़ने और सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला तत्व ही धर्म है। ऐसे भारत का निर्माण हो जो धर्म के मूल सिद्धांतों के आधार पर विकास करे और दुनिया के सामने एक उदाहरण पेश कर सके।
भारत की परंपराओं और विचारों में दुनिया की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है। देश को ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए, जिसमें समाज के सभी वर्ग एक साथ आगे बढ़ें। अपने छोटे-छोटे अहंकार भूल जाइए। देश के लिए जीना हमारा कर्तव्य है।
पर्यावरण का ध्यान जरूरी
मोहन भागवत ने विकास के मॉडल पर भी अपनी बात रखी। नेपाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना आवश्यक है, लेकिन इसके कारण प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें अर्थव्यवस्था के साथ पर्यावरण और नैतिक मूल्यों का भी ध्यान रखा जाए। उनके अनुसार, देश के विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना भी होना चाहिए।
AI और OTT प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल पर भी जताई चिंता
तकनीक और सूचना के बढ़ते प्रभाव पर बात करते हुए भागवत ने कहा कि आज लोगों तक हर तरह की जानकारी आसानी से पहुंच रही है, लेकिन सही और गलत की पहचान किए बिना उसका इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है।
उन्होंने कहा कि तकनीक अपने आप में केवल एक साधन है। उसका प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसका उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा है।
भागवत ने विशेष रूप से OTT प्लेटफॉर्म पर नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि सरकार तथा प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने की जरूरत भी बताई।
विजयादशमी उत्सव में कई प्रमुख हस्तियां शामिल
नागपुर स्थित RSS मुख्यालय में आयोजित विजयादशमी उत्सव के दौरान मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया। कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और उनकी पत्नी डॉ. सुदेश धनखड़, इजराइल के काउंसल जनरल यानिव रेवाच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। संघ हर साल इस अवसर पर अपना स्थापना दिवस मनाता है।