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Punjab News: शहर के मशहूर बिल्डर और रियल एस्टेट कारोबारी के खिलाफ बड़ा फैसला, लौटाने होंगे 32 लाख रुपए

लुधियाना के Dream City प्रोजेक्ट में 12 साल बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं मिलने पर उपभोक्ता आयोग ने Phoenix Infra और दो डायरेक्टरों को ₹32.05 लाख रिफंड, 12% ब्याज और ₹50 हजार खर्च देने का आदेश दिया।

Punjab News: शहर के मशहूर बिल्डर और रियल एस्टेट कारोबारी के खिलाफ बड़ा फैसला, लौटाने होंगे 32 लाख रुपए
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डेली संवाद, लुधियाना। Punjab News: पंजाब के लुधियाना में ड्रीम सिटी (Dream City) प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराने के एक दशक से अधिक समय बाद भी कब्जा नहीं मिलने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने बिल्डर फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और उसके दो डायरेक्टरों को फ्लैट खरीदार के ₹32,05,634 लौटाने का आदेश दिया है।

आयोग ने जमा की गई रकम पर संबंधित भुगतान की तारीखों से रिफंड होने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का भी निर्देश दिया है। इसके अलावा कंपनी और दोनों डायरेक्टरों पर ₹50,000 का संयुक्त खर्च लगाया गया है। मामले की सुनवाई 7 अक्टूबर को हुई।

2012 में बुक कराया था Dream City में फ्लैट

मामले के अनुसार, फतेहगढ़ साहिब निवासी मेजर सिंह सेखों (66) ने 27 दिसंबर 2012 को ड्रीम सिटी प्रोजेक्ट के ब्लॉक-एन में ग्राउंड फ्लोर पर 1,350 वर्ग फुट का फ्लैट बुक कराया था। इसके लिए उन्होंने शुरुआत में ₹1.55 लाख जमा करवाए थे।

21 मई 2014 को हुए एग्रीमेंट में फ्लैट की कुल कीमत ₹33.04 लाख तय की गई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2014 तक सात किस्तों में कुल ₹32,05,634 का भुगतान कर दिया था।

तय समय में नहीं मिला फ्लैट का कब्जा

एग्रीमेंट के मुताबिक, बिल्डर को 24 महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा देना था। इसके अतिरिक्त छह महीने की छूट अवधि भी निर्धारित की गई थी। इसके बावजूद बिल्डर निर्धारित समय में निर्माण पूरा करके फ्लैट का कब्जा नहीं दे सका।

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मेजर सिंह सेखों ने आयोग को बताया कि उन्होंने कई बार प्रोजेक्ट साइट का दौरा किया, लेकिन उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं मिला। शिकायत के अनुसार, 7 नवंबर 2022 को साइट पर जाने के दौरान भी वहां निर्माण कार्य होता दिखाई नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

बिल्डर की शर्तों को बताया एकतरफा और अनुचित

जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि एग्रीमेंट की शर्तें बिल्डर के पक्ष में झुकी हुई थीं। आयोग के अनुसार, एकतरफा और अनुचित शर्तों को उपभोक्ता पर बाध्यकारी नहीं माना जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि तय समय में फ्लैट का कब्जा नहीं देना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है।

फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और उसके दोनों डायरेक्टरों ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष नहीं रखा। इसके चलते आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई की।

AIPL और MD के खिलाफ शिकायत खारिज

इस मामले में AIPL अंबुजा हाउसिंग एंड अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर गिरिराज दामानी ने शिकायत का विरोध किया था।

उनका कहना था कि शिकायतकर्ता के साथ उनका कोई सीधा एग्रीमेंट नहीं था और न ही उन्होंने उससे कोई भुगतान प्राप्त किया था। आयोग ने उनकी दलील स्वीकार करते हुए AIPL और उसके मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी।

30 दिन में भुगतान करने के आदेश

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फीनिक्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड और उसके दोनों डायरेक्टरों को ₹32,05,634 की राशि लौटाने का आदेश दिया है। इस रकम पर संबंधित भुगतान की तारीखों से रिफंड होने तक 12 प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।

इसके अतिरिक्त ₹50,000 का संयुक्त खर्च भी देना होगा। आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर इसका पालन करना अनिवार्य है।

आयोग की अध्यक्षता संजीव बत्रा ने की, जबकि मोनिका भगत सदस्य के रूप में शामिल थीं। इस फैसले से उन फ्लैट खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण संदेश सामने आया है, जिन्हें बिल्डर द्वारा तय समय पर प्रॉपर्टी का कब्जा नहीं दिया जाता।